समय का पहिया घूमता रहता है, और हमें अपने जीवन में कई बार अज्ञातवास का सामना करना पड़ता है। महाभारत के पात्रों की तरह, हमें भी अपने जीवन में कई बार अपने स्वार्थ को छोड़कर, अपने परिवार के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
युधिष्ठिर का कंक बनना, भीम का बल्लभ बनना, अर्जुन का बृह्नला बनना, और द्रौपदी का दासी बनना - यह सब अपने परिवार के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा थी। यह त्याग किसी स्वार्थ के लिए नहीं था, बल्कि यह परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेने की असाधारण क्षमता थी।
आज भी, हमारे आसपास कई लोग हैं जो अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कोई धन्ना सेठ की नौकरी करते हुए अपमान सह रहा है, कोई पिता सेल्समैन बनकर दर-दर भटक रहा है, और असंख्य पुरुष-स्त्रियाँ प्रतिदिन अपने सुख-दुःख त्यागकर, केवल परिवार के अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इन लोगों को देखकर हमें यह याद रखना चाहिए कि हर अज्ञातवास का अंत निश्चित है। समय का चक्र घूमेगा, और बृह्नला पुनः अर्जुन बनेगा। इसलिए, जिसका समय खराब चल रहा हो, उसका अनादर मत कीजिए। उसका साथ दीजिए। उसका सम्मान कीजिए।
हर संघर्षशील व्यक्ति में एक अर्जुन छुपा होता है, जो अपने परिवार के लिए लड़ रहा होता है। तो आइए, हम भी उनका सम्मान करें और उनके साथ खड़े हों। क्योंकि, समय का पहिया घूमता रहता है, और जो आज संघर्ष कर रहा है, वही कल विजयी होगा। 😊
No comments:
Post a Comment