Friday, December 29, 2023

अध्यात्म विज्ञान

"अध्यात्म विज्ञान" जीवन जीने की सर्वोत्कृष्ट विद्या
अध्यात्म विज्ञान, आध्यात्मिक साधनाएँ इतनी सामर्थ्यवान, प्रभावशाली हैं कि उनके द्वारा भौतिक विज्ञान से अधिक महत्त्वपूर्ण सफलताएँ उपलब्ध की जा सकती हैं, हमारे देश में अनेक ऋषियों- महर्षियों, संत-महात्माओं, योगी-यतियों का जीवन इसका प्रमाण है, बिना साधनों के उन्होंने आज से हजारों वर्ष पूर्व अंतरिक्ष, पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा आदि के संबंध में अनेकों महत्त्वपूर्ण तथ्य खोज निकाले थे। अनेकों विद्याएँ, कला-कौशल, ज्ञान-विज्ञान में उनकी गति असाधारण थी। बड़े-बड़े राजमुकुट उनके पैरों में झुकते थे लेकिन अपनी अध्यात्म साधना के समक्ष वे सब कुछ महत्त्वहीन समझते थे और निरंतर अपने ध्येय में संलग्न रहते थे
          आज उन्हीं अध्यात्मवेत्ताओं के देश में इस महान विज्ञान की जितनी दुर्गति हुई है, उस पर किसी विचारशील व्यक्ति का दु:खी होना स्वाभाविक ही है "अध्यात्म विज्ञान" के प्रति आजकल हमारे मूल्यांकन की कसौटी, परिचयप्राप्ति के ढंग इतने बदल से गए हैं कि हम अध्यात्म विद्या से बहुत दूर भटक गए हैं इसके वास्तविक मर्म को न जानने के कारण अध्यात्म के नाम पर बहुत से लोग जीवन के सहज पथ को छोड़कर अप्राकृतिक, असामाजिक, उत्तरदायित्वहीन जीवन बिताने लग जाते हैं गलत, अस्वाभाविक जीवनक्रम के कारण कई बार शारीरिक अथवा मानसिक रोगों से पीड़ित हो जाते हैं
        आज आध्यात्मिक जीवन बिताने का अर्थ जनसाधारण में लोक- जीवन को उपेक्षित मानने से होता है अकसर लोगों में यह धारणा भी कम नहीं फैली है कि "यह संसार क्षणभंगुर" है, "माया है" "इसका त्याग करने पर ही मोक्ष-कल्याण की मंजिल प्राप्त हो सकती है" इसी धारणा से प्रेरित होकर बहुत से लोग अपना कर्त्तव्य, अपनी जिम्मेदारियाँ छोड़ बैठते हैं, अपना घर-बार छोड़ बैठते हैं, लेकिन यदि घर-गृहस्थी को छोड़ना, अपने कर्त्तव्यों से मुँह मोड़ना ही आध्यात्मिक पथ पर बढ़ने का प्रथम चिह्न है तो आध्यात्मिक इतिहास से सारे ऋषियों को हमें हटाना पड़ेगा,क्योंकि प्रायः महर्षि गृहस्थ थे, जनसाधारण का स्वाभाविक सहज जीवन बिताते थे, गुरुकुल पाठशालाएँ चलाते थे, जनता के धर्मशिक्षण का दायित्व पूरी तरह निभाते थे
       जो लोक जीवन को पुष्ट न कर सके, जो व्यक्ति का सर्वांगीण विकास न साध सके, जो जग पथ पर चलते हुए मनुष्य को शक्ति प्रेरणा न दे सके, जो मनुष्य को व्यावहारिक राजमार्ग न दिखा सके, वह अध्यात्म विज्ञान हो ही नहीं सकता।।

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Tuesday, December 26, 2023

मानव जीवन की उत्कृष्टता

मानव-जीवन को उत्कृष्टता की-पूर्णता की-लक्ष्य प्राप्ति की  अंतिम मंजिल तक पहुँचाने का एकमात्र उपाय "अध्यात्म" ही है। इससे लोक और परलोक की सार्थकता सुनिश्चित होती है। परलोक में स्वर्ग और मुक्ति का लाभ उसे ही मिलता है, जो अपने अंतःकरण को "आध्यात्मिक" आदर्शों के अनुरूप ढाल लेने में सफल होता है।
           आत्म-साक्षात्कार, ईश्वर-दर्शन एवं ब्रह्म प्राप्ति की उपलब्धि का एक ही मार्ग है कि आत्मा पर चढ़े मल-आवरण विक्षेपों को हटाकर उसे शुद्ध स्वरूप में विकसित किया जाए। लौकिक जीवन का प्रत्येक क्षेत्र उसी के लिए मंगलमय बनता है, जिसने अपने गुण, कर्म, स्वभाव एवं दृष्टिकोण को परिष्कृत कर लिया है। श्रेय पथ पर चलने वाले लोग ही महापुरुष बनते हैं और इतिहास में अपना अनुकरणीय आदर्श छोड़ जाते हैं। यश शरीर को अमर बनाने का सौभाग्य ऐसे ही लोगों को मिलता है।
        सुदृढ़ स्वास्थ्य, समर्थ मन, स्नेह-सहयोग, क्रिया-कौशल, समुचित धन, सुदृढ़ दांपत्य,  सुसंस्कृत संतान, प्रगतिशील विकास-क्रम, श्रद्धा-सम्मान, सुव्यस्थित एवं संतुष्ट जीवन का आधार केवल एक ही है- "अध्यात्म"। "अपने को सुधारने से संसार सुधार जाता है।"
           अपने को ठीक कर लेने से चारों ओर का वातावरण बनने में देर नहीं लगती। यह एक निश्चित तथ्य है कि जो अपने को सुधार न सका, अपनी गतिविधि को सुव्यवस्थित न कर सका उसका इहलौकिक और पारलौकिक भविष्य अंधकारमय ही बना रहेगा। जो इस लोक को नहीं संभाल सका, उसका परलोक क्या संभलेगा ? जो इस जीवन में नारकीय मनोभूमि लिए बैठा है, उसे परलोक में स्वर्ग मिलेगा, ऐसी आशा करता व्यर्थ है। "स्वर्ग" की रचना इसी जीवन में करनी पड़ती है, दुष्प्रवृत्तियों के भव-बंधनों से इसी जीवन में मुक्त होना पड़ता है। परलोक में यही सफलताएँ साकार बन जाती हैं । इसीलिए मनीषियों ने मनुष्य की सबसे बड़ी बुद्धिमत्ता उसकी "आध्यात्मिक" प्रवृत्ति को ही माना है।

Monday, December 25, 2023

हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए

इंसान को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए
         बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को सफ़ल होने के लिए स्वयं पर भरोसा और अपनी क्षमताओं की पहचान होना बहुत आवश्यक हैं। यदि हमें स्वयं पर भरोसा और अपनी क्षमताओं की जानकारी नहीं है, तो हम स्वयं का छोटा सा भी काम नहीं कर सकते। किसी के भी हालात कभी एक जैसे नहीं रहते। हमेशा यदि सुख नहीं रहता तो दुःख भी नहीं रहता. इसलिए कहते हैं कि जीवन किसी भी पल बदल सकता है। कभी कभी ऐसी स्थितियां बन जाती हैं जिसके कारण हमारा पूरा जीवन ही बदल जाता है, इसलिए हमें प्रत्येक परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
       नदी भी हमें यही सन्देश देती है कि हर परिस्थितियों में आगे बढ़ते रहो। राहों में यदि चट्टान रूपी समस्याएं भी आ जाएं, तो हमें चाहे अपना रास्ता बदलना पड़े लेकिन आगे बढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए। समस्याओं से लड़कर हमें जो सीख मिलती है, वैसी सीख हमें किसी भी विद्यालय से प्राप्त नहीं हो सकती।
         समस्याओं से मिली किसी भी सीख को यदि हम याद रखते हैं और भविष्य में उसे नहीं दोहराते हैं, तो हमारे जीवन में सुख शान्ति और सफलता बनी रहती है। जो लोग स्वयं की भूलों को स्वीकार कर लेते हैं, वो अपने जीवन में बहुत कुछ अच्छा और सकारात्मक सीख लेते हैं।

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Saturday, December 23, 2023

कठिनाइयां हमे सचेत करती हैं

कठिनाइयां हमें सचेत करने जीवन में आती हैं

           बबूल के बीज बोने पर काँटेदार वृक्ष का पैदा होना निश्चित है। किसी भी तरह का अनैतिक बुरा कार्य करने पर शारीरिक अवज्ञा, मानसिक रोग या किसी बाह्य दंड विपत्ति का सामना करना पड़े तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। नियतिचक्र, नैतिक मर्यादाओं के विरुद्ध आचरण करने पर मनुष्य का मनोबल क्षीण हो जाता है। कई तरह के कुविचार, कुकल्पनाएँ, उसके मन में घुस जाती हैं जिनसे बाह्य जीवन भी प्रभावित होता है और उसके फलस्वरूप कई दुष्परिणाम मिलते हैं। मानसिक द्वंद्वों में मनुष्य घुल-घुलकर विनाश को प्राप्त होने लगता है। अनैतिक आचरण से मनुष्य का विवेक, नैतिक बुद्धि प्रबल नहीं होती और उसे उचित-अनुचित का भी ध्यान नहीं रहता। फलस्वरूप गलत निर्णय होते हैं और इससे मनुष्य भयंकर दुःखद परिस्थितियों में पड़ जाता है।

       इसका यह भी अर्थ नहीं कि विश्वनियामक विधान की मर्यादा तोड़ने वाले मनुष्यों से कोई दुश्मनी हो। यह सुधारात्मक संतुलन पैदा करने वाला तत्त्व है। जिस तरह किसी रोग के बाह्य लक्षण उस रोग को प्रकृति द्वारा शरीर से बाहर निकालने का प्रयत्न है, उसी तरह नियतिचक्र के विरुद्ध आचरण करने से मिलने वाला शारीरिक या मानसिक दंड अनैतिक कार्य करने वाले को उस ओर से विरत करने के लिए ही एक प्रयत्न है। अभिमानी, दुराचारी अपनी असहाय दीन अवस्था में अपने अनैतिक कार्यों के लिए बहुत पश्चात्ताप करते हैं। नियति की ठोकर खाकर ही मनुष्य को कुछ होश आता है और वह अपने दुष्कर्मों के बारे में समझने  लगता है। भविष्य में ऐसा न करने का संकल्प भी करता है। खासकर परेशानी की स्थिति में तो वह दुष्कर्म नहीं ही करता। ऐसी स्थिति में कई सुधार भी किए जाते हैं, अनैतिक कार्य छोड़ देते हैं। विश्वनियामक सत्ता का अनुभव करने लगते हैं और उन्हें यह सोचने को बाध्य होना पड़ता है कि कोई सत्ता हमसे भी प्रबल है जो हमारे कर्मों का लेखा-जोखा लेती है। इतिहास साक्षी है कि जब नियति की ठोकर लगी, विश्व-विधान के अनुसार प्रतिक्रिया पैदा हुई, तो बड़े-बड़े महारथी, दिग्गज बलवानों को यह सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा कि कोई हमसे भी शक्तिशाली सत्ता है जो हमारा लेखा-जोखा लेती है। उनका गर्व काफूर हो गया।

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Monday, December 18, 2023

अध्यात्मवादी बनो



  हमारा दृष्टिकोण अध्यात्मवादी बने

        कितना ही "धन" कमा लिया जाए, कितनी ही "विद्या" प्राप्त कर ली जाय, कितनी ही "शक्त्ति" संचय कर ली जाए तब भी संसार के दुःखों से सर्वथा मुक्ति नहीं पायी जा सकती। धन अभावों, आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। विद्या, बौद्धिक विकास कर सकती है और शक्ति से किन्हीं दूसरों को वश में किया जा सकता है, किंतु इस प्रकार की कोई सफलता दुःखों से मुक्ति नहीं दिला सकती। धनवानों को दुःख होता है,विद्वान् शोक मनाते देखे जाते हैं और शक्तिमानों को पराजित होते देखा गया है।
         धन हो और विद्या न हो तो जड़ता से मिलकर धन विनाश का हेतु बन जाता है। विद्या हो पर स्वास्थ्य न हो तो विद्या का कोई  समुचित उपयोग संभव नहीं। दिन-रात स्वास्थ्य की चिंता लगी रहेगी। थोड़ा काम किया नहीं कि कभी सिर दर्द है तो कभी अजीर्ण हो गया, कभी सर्दी है तो कभी ज्वर घेर रहा है। इस प्रकार न जाने कितनी बाधायें और व्याधायें लगी रहती हैं। केवल विद्या के बल पर उनसे छुटकारा नहीं मिल पाता। इस प्रकार शक्ति तो हो पर धन और विद्या न हो तब भी पग-पग पर संकट खड़े रहते हैं। धन के अभाव में शक्त्ति निष्क्रिय रह जाती है और यदि उसके बल पर धन संचय भी कर लिया जाये तो विद्या के अभाव में उसका कोई समुचित उपयोग नहीं किया जा सकता।
        विद्यारहित शक्ति भयानक होती है। मनुष्य को आततायी, अन्यायी और अत्याचारी बना देती है। ऐसी अवस्था में संकटों का पारावार नहीं रहता। धन, विद्या और शक्ति तीनों वस्तुयें संसार में किसी को कदाचित् ही मिलती है।
        यदि एक बार यह तीनों वस्तुयें किसी को मिल भी जाएँ तो हानि-लाभ, वियोग-विछोह, ईर्ष्या-द्वेष आदि के न जाने कितने कारण मनुष्य को दुखी और उद्विग्न करते रहते हैं। ऐसा नहीं हो पाता कि धन, विद्या और शक्ति को पाकर भी मनुष्य सदा सुखी, संतुष्ट एवं शात बना रहे। संसार की कोई भी ऐसी उपलब्धि नहीं, जिसके मिल जाने से मनुष्य दुख-क्लेशों की ओर से सर्वथा निश्चित हो जाये
        मनुष्य जीवन का लक्ष्य "आनंद" की प्राप्ति ही है। उसी को पाने के लिए सारे प्रयत्न किये जाते हैं। भौतिक विभूतियों की सहायता से वह मिल नहीं पाता। मनुष्य दुःखी तथा उद्विग्न बना रहता है। तब कौन-सा उपाय हो सकता है, जिसके आधार पर इस असफलता को सफलता में बदला जा सके ? उसका एकमात्र उपाय यदि कोई है तो वह है 'अध्यात्म'। "अध्यात्म" की महिमा अपार है। उसके द्वारा प्राप्त होने वाले अहेतुक सुख की तुलना संसार की किसी भी विभूति से मिलने वाले क्षणिक सुख से नहीं की जा सकती। मानव-জীবন की सर्वोत्कृष्ट विभूति वही है। उसकी सहायता से मनुष्य देवताओं की भाँति सदा आनंदित रह सकता है।देवत्व प्राप्त हो जाने पर दु:ख की संभावना ही समाप्त हो जाती है।

Sunday, December 17, 2023

मिथ्या चिन्तन को त्यागें


  मिथ्या चिंतन को त्यागें
     आत्म - लाभ पाएँ
      शरीर को भोग का साधन मानना एक अकल्याण दृष्टिकोण है, अनाध्यात्मिक भाव है। इसी के कारण ही तो आज हम सब पतन के गर्त में गिरे हुए शोक-संतापों और दुःख-क्लेशों  में फंसे हुए हैं। शरीर, आध्यात्मिक साधना का एक महान् माध्यम है। इसी की सहायता से आत्मा का ज्ञान और परमात्मा का साक्षात्कार होता है। इसे संसार के अपवित्र भोगों में लिप्त कर डालना अकल्याणकर प्रमाद है, जिसे कभी भी न करना चाहिये। शरीर को भगवान का  मंदिर समझकर "आत्म-संयम" तथा "अध्यात्म साधना" द्वारा श्रेय पथ पर बढ़ना चाहिये।
      अनात्म भाव के कारण ही शरीर "साध्य" बना हुआ है, अन्यथा यह एक चमत्कारी "साधन" है, जिसका सदुपयोग कर इसी जीवन में आत्मा को पाया और परमात्मा का साक्षात्कार किया जा सकता है। शरीर को अपनी संपत्ति मानकर भोग-विलासों में लगाये रहना अहंकार है। वस्तुतः शरीर आत्मा की संपत्ति है, उसका ही उपादान है, अस्तु इसे ऐसे साधनों में ही लगाया जाना चाहिए, जिससे भव-बंधन में आबद्ध आत्मा मुक्त हो और जीवन शाश्वत सुख का लाभ प्राप्त हो।
      भव-रोगों में फँसे मनुष्यों की इस पतितावस्था से उद्धार का  एक ही मार्ग है और वह है "अध्यात्मवाद"। भौतिकवाद के उन्माद ने  आज मानव जाति को उन्मत्त बना रखा है। वह कल्याण के ज्ञान से सर्वथा रिक्त होती जा रही है। आज लोगों की मनोभूमियाँ इस सीमा तक दूषित हो गई हैं कि अमंगल में मंगल दीखने लगा है। मानसिक विकारों, आवेगों, प्रलोभनों और पाप पर नियंत्रण कर सकना उनके लिए कठिन हो गया है। तनिक-सा प्रलोभन सामने आते ही पाप करने को उद्यत हो जाना, जरा-सा भय उपस्थित होते ही कर्तव्य-पथ का त्याग कर देना साधारण बात बन गई है।
          चित्त की अस्थिरता और जीवन की निरुद्देश्यता ने लोगों को विक्षिप्त बना रखा है। ऐसी भयानक मनोभूमि और ऐसे पापपूर्ण व्यवहार के रहते हुए कैसे आशा की जा सकती है कि मनुष्य अपने जीवन लक्ष्य परमानंद को प्राप्त कर सकता है। इन सब विकारों और विपरीतताओं का एकमात्र कारण है- "अध्यात्मवाद" की उपेक्षा। यदि "संसार" के साथ "आत्मा" का भी ध्यान रखा जाये, उसके विकास और मुक्ति का प्रयत्न करते रहा जाये तो शीघ्र ही इन सारे भव-रोगों से मुक्त होकर मनुष्य आनंद की ओर अग्रसर हो चले। "आत्म-लाभ" ही सर्वश्रेष्ठ लाभ माना गया का है, उसी को प्राप्त करना श्रेय है और उसी को पाने के लिए प्रयत्न भी किया जाना चाहिए।

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Tuesday, September 19, 2023

कर्म से भाग्य बदलता है

कर्म से भाग्य बदलता है सोच से नहीं गरीब और अमीर की सोच में अन्तर क्या होता है, अब हम पहले इस बात को समझते हैं कि दोनों में से किसी की आर्थिक व्यवस्थापन बिगड़ जाती हैं तो अधिकांश अमीर यह सोचते हैं कि पैसा आएगा तो हम काम करेंगे जिससे की पहले से अधिक सुदृढ़ता आ सकें और गरीब यह सोचता है कि कुछ काम करूंगा तो पैसा आएगा जिससे आर्थिक व्यवस्थापन में सुधार आएगा अब अन्तर यहां दोनों की सोच में हैं कि हम कैसे सक्षम बनेंगे लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि हम बिना कुछ किए सक्षम नहीं हो सकते हमें काम तो करना पड़ेगा दूसरी बात हम यहां यह समझेंगे कि बिना समय गंवाए हमें जो अवसर मिल रहा है विवेकपूर्ण तरीके से उस काम में लग जाना ही समझदारी होती हैं चाहे अतित आपका आर्थिक संपन्नता में जिया हो या कमजोरी में....हम किसी सुअवसर की तलाश में बैठे समय खराब करते देते हैं तो बहुत सारे अवसर हमारे हाथ से निकल जाते हैं कर्म करते हुए अवसर को तलाशे तो अमीर हो या गरीब उनकी लगन और मेहनत में सक्षमता होती हैं न कि इंतजार में....हम भाग्य को दोष न दे क्योंकि कर्म के बिना कुछ भी नहीं है और न ही किसी वक्त को दोष दे, समय तो सब के लिए समान होता है चाहे वो गरीब हो या अमीर, महत्व यहां पैसों का होता है व्यक्ति का नहीं अतः मेहनत करो पैसा बनेगा तो नए रिश्ते खड़े हो जायेंगे अन्यथा अपने खास भी पहचाने से मना कर देंगे।।

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Tuesday, August 29, 2023

अपना हैं ये भूल मत करना कभी

अपना हैं ये भूल मत करना कभी कोई रिश्ता खास नहीं होता विशेष तो उनको दूर रखना चाहिए जो हमारे दुःख में साथ नहीं थे, क्योंकि जो दुःख में साथ नहीं होता उन्हें खुशी में शामिल नहीं करना चाहिए, ऐसे लोग बहुत मिल जाएंगे जो सुख में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे लेकिन असली हकदार तो वो होते हैं जिन्होंने विषम परिस्थितियों को गहराइयों से समझा और जीवन में सामान्य अनुकूलता आए उस हेतु सहयोग किया न कि सलाह दी,... परेशानी में सलाह की नहीं सहयोग की आवश्यकता होती है दुनियां अपनो की नहीं क्षमताओं की होती है, आर्थिक संपन्नता से नए रिश्ते  बन जाते हैं विपरीत परिस्थितियों में अपने भी मुंह मोड लेते हैं, हम स्वयं जितने अपने हैं उससे अधिक अपना कोई नहीं, हमारी दक्षता को विस्तारित करना चाहिए न कि दुःख को, कहानी के पात्र बना कर रख देंगे यदि हमने अपनी योग्यता का इस्तेमाल नही किया तो, कहानी के पात्र कब तक बनेंगे लेखक बनना चाहिए , हम कितने शुद्ध हैं हमारी भावनाएं कितनी शुद्ध है दुनियां को कोई फर्क नहीं पड़ना अतः हमारे कौशल की उपेक्षा कभी नहीं करना चाहिए हम इतिहास को गढ़ने का सामर्थ्य रखते हैं हमेशा याद रखना चाहिए।।

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Tuesday, August 1, 2023

झूठ पर आवाज़ उठाना गलत नहीं है

झूठ पर आवाज़ उठाना गलत नहीं है लेकिन सच और झूठ के फर्क समझना बहुत आवश्यक होता है जब तक हम इस चीज़ को नहीं समझेंगे कि जो गलत है वो हर पहलु से दुनियां की निगाह में गलत है उसका विरोध करना चाहिए चाहे सामने कोई भी हो, कई वस्तुओ का गलत प्रचार करके सेलिब्रिटी लाखों करोड़ो लेकर गलत वस्तुओ का प्रचार करते हैं तो हमें उसका दुष्प्रचार रोकना चाहिए यदि उनके प्रचार से लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता है और उस खान पान से निकट भविष्य में लोगों के स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों प्रभावित होते हैं ठीक उसी प्रकार किसी भी प्रकार का झूठ किसी प्रसिद्धि वाले व्यक्ति के पास जाकर सच में बदलता दिखे तो हमे उसका निर्णय सत्यता दिखाने में करना चाहिए चाहे उससे कुछ लोग ही जान पाए परन्तु हमारे वक्तव्य को पढ़कर लोग सोचने को मजबुर तो होंगे, सदैव हमें यह याद रखना चाहिए कि हम अनावश्यक किसी का विरोध नहीं करे लेकिन जो केवल हमारे लिए ही नहीं पब्लिकली वो गलत होना चाहिए उस जगह हमने ऐसा कदम उठाया जो वास्तविक गलत है तो कतार लगेगी अनफोलोवर की लोगों को आइना दिखने लगेगा और दुष्प्रचार को बन्द होना पड़ेगा अतः सर्वप्रथम अपने चित्त को आइए और फिर वास्तविक सत्य के प्रारूप को दिखाए "सत्य मेव जयते" ।।

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Sunday, July 9, 2023

आदर्श विद्यार्थी का जीवन

              


आदर्श विद्यार्थी का जीवन तप एवं साधना का जीवन होता है जो दुनिया के सभी भटकाव से अपने आप को दूर रखता है विद्यार्थी काल जीवन अपने भावी जीवन को मजबूत नीव प्रदान करने का सुनहरा अवसर होता है जहां चरित्र निर्माण निर्धारित होता है यह जीवन अपने ज्ञान को सुदृढ़ बनाने का एक महत्वपूर्ण समय है विद्यार्थी जीवन लगभग 5 वर्ष की आयु से आरंभ हो जाता है इस उम्र से ज्ञान अर्जित करने की तीव्र इच्छाए पनपने लगती है उसे घर की दुनिया से अलग नए शिक्षक नया वातावरण नए सहपाठी मिलते हैं इस उम्र में यह समझ आने लगता है कि समाज क्या है और समाज में किस तरह रहना चाहिए किताबों से लगाव लगने लग जाता है हर नई चीज को अर्जन करने की तीव्र इच्छा होने लगती है ऐसी स्थिति में जब विद्यार्थी विनम्र होकर गुरु से विद्या दान पाता है तो उसके सारे रास्ते आसान हो जाते हैं इस दौरान विद्यार्थी को नीति का ज्ञान, समाज का ज्ञान, विज्ञान की जानकारी, गणित की समझ बड़ी आसानी से समझ आने लगती है भाषा का ज्ञान और विचारों को अभिव्यक्त करने का समय विद्यार्थी जीवन में पूर्णतया प्राप्त करता हुआ आगे बढ़ता है विद्यार्थी जीवन आदर्श विद्यार्थी के रूप में अध्ययन शिल होता है तो उसका जीवन सुख-दुख, लाभ-हानि , गर्मी-सर्दी से परे नित्य अध्ययन शिल होता हुआ। धैर्य,लगन , साहस , ईमानदारी गुरु-भक्ति स्वाभिमान जैसे गुणों को धारण करता है तो संयमित व अनुशासित पथ पर आगे बढ़ता रहता है विद्या का प्रकाश केवल गुरुजनों एवं पुस्तकों से ही नहीं मिलता अपितु आत्मसात करने से झरने की तरह प्रभावित होता ही रहता है इस दौरान खेलकूद, घूमने- फिरने, एक-दूसरे से बातचीत करने, परिवारजन, अन्य मित्रों रिश्तेदारों से बातचीत करने तथा कई प्रकार से बिखरे ज्ञान को संग्रहित करने का समय होता है।जैसे गुण-अवगुण, अच्छा-बुरा, धर्म-अधर्म, पुण्य-पाप, अपना- पराया, इन सब चीजों की पहचान विद्यार्थी जीवन में होती है यह जीवन का वह महत्वपूर्ण समय होता है जिसमें हम अच्छाई को ग्रहण कर भले-बुरे का भान पाकर बुजुर्गों का सम्मान करते हुये मधुर वाणी का महत्व समझते हुए शारीरिक व मानसिक स्वच्छता पर सिर्फ और सिर्फ अच्छाइयों को ग्रहण करना चाहिए। यह सब सीख का सीखने का समय विद्यार्थी जीवन के आरंभ काल से ध्यान दिया जाये तो सदैव सफलता की ओर अग्रसर होता है विद्यार्थी जीवन ऊँच-नीच, छोटा- बड़ा, अमीर-गरीब, इन सब से कोसों दूर का जीवन होता है विद्यार्थी जीवन मानव जीवन की आधारशिला होती है सांसारिक दायित्वों से मुक्त होता है हर विद्यार्थी के माता-पिता अपनी संतान से वह बड़ी उम्मीद रखते हैं कि उनकी संतानें बड़ी होकर उनका नाम ऊंचा करें इसके लिए सदैव माता-पिता कई परेशानियों का सामना करते हुए विद्यार्थियों का खर्च उठाते हैं और हर गुरुजनों का विद्यार्थियों के प्रति यह प्रयत्न रहता है कि मेरा शिष्य मेरे से आगे बढ़े। हर विद्यालय का संस्था प्रधान यह चाहता है कि मेरा विद्यालय के पढ़ने वाले विद्यार्थी विद्यालय का नाम करें। इसके चलते विद्यार्थियों को भी उन सब की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए। विद्यार्थी का पहला गुरु मां होती है फिर अपने गुरुजन हमारा परिवार, हमारा समाज, हमारे मित्र, रिश्तेदार इन सबसे मिलकर विद्यार्थियों में संस्कारों का समावेश होता है वो ही संस्कार विद्यार्थी को आगे बढ़ाने अपनी सक्षमता प्रदान करने आत्मा विकास करने, अपनी उर्जा का संचार करने की दक्षता प्रदान करता है। कुसंगतियों के चक्रव्यूह से दूर रहकर ही विद्यार्थी अपने लक्ष्य की प्राप्ति की ओर सदैव अग्रसर होते हैं। खेल-कूद,व्यायाम, हमारा खान-पान, शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना यह सब हमारी मानसिक चेतना के विकास में अहम भूमिका निभाता है अभिभावकों को भी अपने बच्चों को सामाजिक समन्वयता पर विद्यार्थी जीवन में समय-समय पर उसके व्यक्तित्व विकास हेतु सहभागी बनाना चाहिये क्योंकि विद्यार्थी जीवन में व्यक्तित्व का निर्माण प्रारंभ होता है इस दौरान गुण तथा अवगुण का आत्मसात करके उसी के अनुसार उसके चरित्र का निर्माण होता है कोई भी विद्यार्थी अनुशासन के महत्व को समझे बिना अपने लक्ष्य की प्राप्ति की ओर नहीं बढ़ सकता । अनुशासन में रहने वाला विद्यार्थी ही हमेशा कठिन परिश्रमी बनता है और किसी भी बात को नजर अंदाज करने की प्रवृत्ति सामान्य विद्यार्थियों से उन्हें अलग रास्ते पर भटकाती है वर्तमान समय में अनुशासन का स्तर काफी गिर गया है इसका कारण माता-पिता की भाग-दौड़ भरी जिंदगी से अपनी संतान को वांछित समय नहीं दे पाना है जिस कारण बच्चों में अनुशासनहीनता पनपती है जितने भी उच्च पदों पर जैसे IAS, IPS, डॉक्टर, इंजीनियर, IT, IIT, प्रोफेसर शिक्षक जैसे ऊंचे पदों पर आसीन होते हैं उनके जीवन में अनुशासन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है ठीक इसके विपरीत अनुशासनहीनता से कुचक्र में फंस कर अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं अतः अनुशासनहीनता को अच्छी शिक्षा, अच्छा वातावरण एवं संस्कार देकर सामूहिक प्रयासों से विद्यार्थियों के भविष्य को संवारा जा सकता है सजाया जा सकता है।

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Thursday, July 6, 2023

संतान के प्रति पिता का भाव

संतान के प्रति पिता का भाव कैसा होना चाहिए यह आधुनिक शिक्षा प्रणाली, युवा पीढ़ी की मानसिकता को विकसित करने में हमने कितनी भूमिका निभाई और संतानों द्वारा किस प्रकार की सोच को समेटे हुए है उन बातो को ध्यान में रखते हुए हमारे कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए उन्हें कभी भी बेलगाम ना छोड़ता और साथ ही सत्यनिष्ठा ,पवित्रता, ईमानदारी ,सच्चरित्रता ,दया ,करुणा ,क्षमा ,विनम्रता ,मैत्री , सेवा ,त्याग आदि मानवीय गुण मनुष्य परिवार में ही सीखता है तो वैसा माहौल भी पिता ही बनाता है, जिस प्रकार एक पौधे की परवरिस के लिए हम उसके चारों ओर पशुओं आदि से बचने के लिए सुरक्षात्मक घेरा लगाते है जिसके बाद वह विशाल वृक्ष बन जाता हैं तब उसे कोई भयंकर आंधी तूफ़ान भी उसको हिला तक नहीं सकता तत्पश्चात वृक्ष छाया, फल ,लकड़ी के माध्यम से कितनो का सहारा बनता है, उसी प्रकार पिता बच्चो के सर्वांगीण विकास के लिए एक मजबूत रक्षा कवच बनता है,पिता का कर्तव्य बहुत व्यापक होता है स्वयं एक महान गुरु होता है साथ ही उसके लिए एक योग्य गुरु निर्धारित करता है, जो उसे शिक्षा देकर सभ्य समाज में जीने लायक बनाता है उसके इर्द गिर्द सपनों का जाल बुनकर स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करने वाला पिता ही एक ऐसी शख्शियत हैं इस दुनिया में जो यह चाहेगा कि मेरी संतान मुझसे आगे निकले अतः पिता अपनी संतानों को भविष्य निर्धारण के लिए आवश्यक सामग्री के साथ खुद को प्रवृत्ति में परिवर्तन लाकर संस्कार और व्यवहारिक ज्ञान का प्रारूप एक आदर्श पिता ही तैयार करता है पिता का स्थान आसमान से भी ऊंचा होता हैं।।

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Monday, July 3, 2023

गुरु पूर्णिमा का महत्त्व

गुरु पूर्णिमा का महत्त्व महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी के जन्म दिवस के साथ हमारी संस्कृति में एक त्यौहार सा बन गया है, गुरू पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने वेदों को रचाना की थी, पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग विद्या सिखाई थी एवम् परमेश्वर शिव ने ब्रह्मा जी के चार मानस पुत्रों को वेदों का ज्ञान भी दिया था,बौद्ध धर्म को मानने वाले भगवान बुद्ध की याद में मनाते हैं इनकी मान्यता है कि उत्तर प्रदेश के सारनाथ में इस दिन पहला उपदेश दिया था, नेपाल और भूटान में इस पर्व को शिक्षक दिवस के रुप में मनाते हैं हालांकि भारत में 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता हैं, वेदव्यास जी द्वारा मनुष्य जाति को वेदों का ज्ञान पहली बार उन्होंने ही दिया था, इसलिए सनातन धर्म में महर्षि वेदव्यास जी को प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है, गुरु हमें प्रबुद्ध करके हमारे अंधकार को दूर कर जीवन प्रकाशित करते हैं, गुरु जीवन को आदर्श विचारो का अनुसरण कराते हैं, मनुष्य जीवन में दिव्यता गुरू से ज्ञानर्जन निष्ठा पूर्वक करने से आती हैं, अतः गुरु हमारे जीवन की आंतरिक शक्ति को जगाते है सत्य और आनंद के दायरे में ले जाते है गुरु पूर्णिमा का महत्त्व हमारे गुरूओ ने हमारे जीवन को गढ़ने का काम किया है उनके सम्मान में यह पावन पर्व मनाया जाता हैं, मनुष्य जीवन में गुरुओं की अहम भूमिका होती हैं तो उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए हिंदू परम्परा में आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता हैं।।

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Saturday, June 24, 2023

AI टूल्स किसानों के लिए बनेगा हर पल मार्गदर्शक

AI टूल्स किसानों के लिए बनेगा हर पल मार्गदर्शक प्रौद्योगिकी के इस युग में किसानों के लिए AI टूल्स बड़ा लाभ दिलाने में सहायक होगा इसके लिए महत्वपूर्ण चीज होगी डाटा कलेक्शन आने वाले समय में ऐसे ऐसे उपकरण हमे उपलब्ध होंगे जिसकी मदद से हम हमारी खेती को उगाने से लेकर फसलों में जलवायु के आधार पर कोनसा बीज हमें इस्तेमाल करना चाहिए उसकी गुणवत्ता कितनी हैं, कीतना हमें खाद देना चाहिए पानी का PH लेवल कितना हैं मिट्टी के अनुकूल पानी की व्यवस्था कितनी होना चाहिए कम पानी या बंजर जमीन में कम पानी के चलते या खारे पानी में भी हम कोनसी फसल का बढ़िया उत्पादन कर सकते हैं इसकी पुरी जानकारी हमें AI टूल्स के माध्यम से मिलेगी, फसलों में हो रहे नुकसान के बारे मे सटीक जानकारी और उपाय भी बताया जाएगा कि आपको क्या करना चाहिए ताकि आपकी पौधो की ग्रौथ पैदावार अधिक हो सके, सप्लाई चैन को समझ कर हमें अधिक कीमत वाली लिस्ट भी मिलेगी की किस फसल की पैदावार में अधिक फायदा होगा, फसल की बिमारी का भी पता लगाकर साथ सटीक उपाय भी बताएगा अतः प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल निकट भविष्य में किसानों को बेहतर परिणाम देंगे आवश्यकता रहेगी AI तकनीकी को समझने की जिसका हमें हर क्षैत्र में आर्थिक क्रान्ति लाएगा।।

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Friday, June 23, 2023

टेक्नोलॉजी से हम कितना लाभ लें सकते हैं

टेक्नोलोजी से हम कितना लाभ लें सकते हैं AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसी खोज हैं जिससे हमें कई फायदे तो कुछ नुकसान भी होगा जैसे जॉब या अन्य दुविधाएं.... लेकिन मुख्य बात यह है कि हम इसको कितना समझते हैं और कितना लाभ लें सकते हैं यह हमारे ऊपर निर्भर करेगा, समय के साथ धाराओं की दिशा में बहना हमने सिख लिया और हवा के रुख को फॉलो करते हुए जीवन में कुछ कर गुजरने का सिद्धांत बना लिए तो टेक्नोलोजी हमें कई नई दिशाएं प्रदान करेंगी AI की क्षमताएं अनन्य हैं हमारी कल्पना से परे हमें कई जानकारियां उपलब्ध हो सकती हैं बशर्ते हम कितना अध्ययन करते है इस टेक्नोलोजी को समझने का उसी हिसाब से हमारे लिए उपयोगिता होगी, आर्थिक लाभ भी हम इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से चाहे जितना ले सकते हैं हमारी क्षमताओं से अधिक कार्य और कम समय में हर वो कार्य या मार्गदर्शन मिलेगा इससे जो हम टेक्नोलॉजी की दुनिया से उम्मीद रखते हैं, आधुनिक युग में अतित की कल्पनाओं से बाहर की कार्य क्षमताए मशीन द्वारा की जा रही हैं ठीक ऐसा ही निकट भविष्य में होने वाला है जो आज हम सोच भी नहीं सकते हैं वो आने वाले कल में मशीनों द्वारा होगा अतः प्रोद्योगिकी हमें बहुत कुछ देने को बैठी है लेकिन हम लेना क्या चाहते हैं और इससे कितना बड़ा लाभ ले सकते हैं यह हमारे ऊपर निर्भर करेगा आधुनिक युग को समय पर समझें समय रहते टेक्नोलोजी हमें फ़ायदा देगी।।

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Wednesday, June 21, 2023

क्या जॉब कम हो जाएगी ए आई टूल्स से

क्या जॉब कम हो जाएगी ए आई टूल्स से यदि हमने हवा के रुख के हिसाब से चलना सिख लिया तो हमे आर्थिक विकास में किसी भी प्रकार से दिक्कत नहीं आएगी हमारी योग्यता के हिसाब से जॉब मिलती है तो करना चाहिए अन्यथा समय रहते टेक्नोलोजी का उपयोग करके हमे उसका पुरा फायदा उठाना चाहिए लेकिन पहले इसे समझना होगा कि टेक्नोलोजी वास्तविकता में हमें कितना सहयोग कर सकती हैं जो कि हमारी कल्पना के बाहर हैं, यदि आप यह सोच रहे हैं कि यह मै नहीं कर सकता तो समझ लीजिए आपने अत्यधिक मददगार AI को आपने पुरा समझा ही नहीं अधूरा ज्ञान प्रॉब्लम खड़ी करता है, पहले कंप्लीट अपडेट होना पड़ेगा लेकिन कुछ बड़ा परिवर्तन चाहते हो तो बड़ी सोच रखनी होगी गहराई तक समझना होगा यह तो फिक्स हैं कि आने वाले समय में बेरोजगारी बढ़ेगी कुछ उदाहरण से समझते हैं कि पहले हाथ से खुदाई होती थी अब जेसीबी से, लोडिंग अनलोडिंग में क्रेन आ गई, पुस्तकों की जगह KUKUFM और GIGL पुस्तक पढ़ कर सुना रहा, टीवी केबल की जगह इंटरनेट आ गया, डिजिटल युग ने बहुत बदलाव ला दिया, ठीक उसी तरह AI से भी बड़ा बदलाव आने वाला है अतः समय के साथ निर्णय लेकर हमारी क्षमताओं को सही दिशा में लगाएं चाहे जॉब हो या बिजनेस अपनी अलग पहचान बनाएं।।

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Sunday, June 11, 2023

बेटी का रिश्ता बाप के लिए बड़ी चुनौती

बेटी का रिश्ता बाप के लिए बड़ी चुनौती है एक तरफ बेटी के साथ ससुराल में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो दूसरी तरफ कई समाजों में बेटियों के जन्म दर की कमी के कारण कई बेटो के रिश्तो में दिक्कते आना आम बात हो रही है,,,बेटी का किसी परिवार में अवतरण होना भी एक सौभाग्य की बात है,
 बेटे बेटियों का लालन पालन और समानता के अधिकार के साथ शिक्षा के साथ संस्कार एवम् संस्कृति का ज्ञान देना एक माता पिता एवम् परिवार को भी साथ में बहुत से विषयों पर संयमित जीवन जीना होता है तथा जिस घर में बिटिया पल रही होती हैं वहां हमारी संस्कृति के माहौल में रहना सबके लिए आवश्यक होता है क्योंकी आजकल के चल रहे ट्रेंड जिसमें असीमित और अनावश्यक आवश्यकताओं के बिच जी रहा है समाज ... जिसमें सीमित साधनों की उपयोगिता को समझाना एक बाप के लिए बेटी की परवरिश कितनी चुनौती पूर्ण होगी यह किसी बड़े अनुष्ठान से कम नहीं बावजूद इसके बेटी के ससुराल वाले पाखंडी निकल जाएं तो कितनी दुःखद बात होगी इसका अंदाज सिर्फ संस्कारमय जीवन शैली के साथ त्याग और तपस्या करने वाले को ही होगा अन्य किसी को नहीं, जिस घर में बेटी नहीं होती उसको तो इसका अंदाज कम होता है लेकिन बहुत बार ऐसा होने पर भी वो भूल जाते हैं कि बहु बेटी का रूप होती हैं जब बेटे और बेटी में फर्क भी नहीं समझना और साथ ही संतानों को आवश्यक आजादी के साथ संस्कार पाना संतानों के लिए भी उस समय सहज होगा जब हमने ऐसे वातावरण का निर्माण किया होगा अन्यथा आधुनिकता मार्ग भटकाव में देरी नहीं करेगा अतः रिश्ते उसी घर में करे जहा संस्कार हो, संस्कृति का भान हो, समधी जीवन पर्यन्त रिश्ते की गरिमा को समझता रहे और बहू में बेटी का रुप देखें अन्यथा हमारे समधी का चुनाव पश्चाताप की आग में जलाता रहेगा।।

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Tuesday, May 30, 2023

जीवन में हर जगह भावुकता काम नहीं आती

जीवन में हर जगह भावुकता काम नहीं आती चाहे वो मोटिवेशन हो या डिमोटिवेशन आप जीवन में खुश हो तब भी अच्छे काम कर पाओ यह निश्वित नहीं है और न ही यह निश्चित होता है कि आपके दुःखी होने पर सही काम कर पाओ, ठीक उसी तरह यह भी फिक्स नहीं होता कि लाभ या हानि होने पर अच्छा काम कर पाए, हमें यह समझना चाहिए कि हम जो काम कर रहे हैं उसमें हम फोकस कीतना दे रहे हैं, जितना फायदेमंद हमारे उस कार्य पर फोकस देकर करेंगे वो कार्य उतना ही बेहतर परिणाम देगा, सफ़लता लगन से मिलती हैं न कि भावुकता से ,,, हमारी मेहनत के साथ हमारे उद्देश्य और कार्य करने का संकल्प हमारे सफल निर्णायक दायरे में जब पहुंचाएंगे कि हमारी तल्लीनता उसी दिशा में काम कर रही होगी क्योंकि हमारे पास भावनाओ का महासागर होता है जो प्रोद्योगिकी को भी फॉलो नहीं करने देता और हमारी कार्य करने की दक्षता उस समय कम हो जाती हैं जब हम स्वयं को केंद्रित नहीं करते.....जब हम किसी कार्य को सम्पन्न करते समय अपने आप को केंद्रित करते हैं तो हम भावुक नहीं होंगे निपुण होकर कार्य करेगें जो श्रेष्ठ परिणाम देगा अतः जीवन में हमें इमोशन और प्रेरणा के साथ अधिक जिम्मेदार होकर कार्य करना चाहिए ताकि केन्द्र बिन्दु को ध्यान में रखकर कर्म करने से सफ़लता की गारंटी रहेगी ।।

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Saturday, April 22, 2023

जैविक खाद का सरल तरीका

जैविक खाद का सरल तरीका राजीव दीक्षित जी के बताएं अनुसार👉🏻 जिस पशु का गोबर उसी का मूत्र मानो गाय का गोबर तो उसी का मूत्र, भैंस का या बैल गोबर तो उसी का मूत्र 

गोबर 10 किलो 
मुत्र 10 लिटर 
काला गुड़ 1 किलो 
दाल का आटा 1किलो 
मिट्टी 1 किलो

मिट्टी पीपल या बरगद के पेड़ की जो सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देता है,,,तो उसके आसपास की मिट्टी में अधिक जीवाणु होते हैं किसी ड्रम में मिलाकर गोल लो फिर उसको 15 दिन तक कपड़े से ढक कर छांव में रख दो 15 दिन बाद खाद तैयार हो जाएगा, इसमें करोड़ो सूक्ष्म जीवाणु पैदा हो जायेंगे मिट्टी में यदि जीवाणु लाखो में हैं तो 15 दिन में करोड़ो हो जायेंगे यह जीवाणु घोल तैयार हो गया, अब इसको जितना गोबर था उसका दस गुणा पानी मिलाकर खेत में छिड़क दो या ड्रिप द्वारा सिंचाई के साथ भी दे सकते हो, यानि दस किलो गोबर था तो कम से कम 100 लिटर पानी अधिक से अधिक 200 लिटर पानी एक एकड़ के लिए तैयार हो गया, अब जितने जीवाणु थे वो सारे खेत में चले जाएंगे, जिससे पौधे की ग्रौथ करने के लिए जितने भी सूक्ष्म पोषक तत्व चाहिए ये जीवाणु देते हैं, यही जीवाणु पौधे को लम्बा घना बनाता है, पैदावार बढ़ाता है, 
डालने का समय : पहला खेत जुताई के दूसरे दिन डाल दो, लगभग 5 दिन बाद बुवाई कर दो दुसरा बुवाई के 21 दिन बाद फिर दुबारा डाल दो, मानो 4 महीने की फसल हैं तो 5 बार डालना पड़ेगा हर 21 दिन बाद छिड़काव करना होगा, फसल अधिक समय की हैं तो उसी समय अंतराल में थोड़ा अधिक बार डालना पड़ेगा , इससे भरपूर कैल्सियम,आयरन, फॉसफेरस जैसे सैकड़ों तत्त्व मिलेंगे फसल को , पहले वर्ष संभव है थोड़ी पैदावार कम हो लेकिन लगातार इस्तेमाल होने से जबर्दस्त पैदावार होगी कम लागत यानि कि नहीं के बराबर खर्च में, सिर्फ मेहनत करनी होगी अतः जैविक उत्पादन से फ़सल पौष्टिक होगी तो हमें पौष्टिक आहार मिलेगा कमाई अधिक होगी और स्वस्थ्य समाज का निर्माण हमारे निरंतर ऐसा करने से होगा ।।

पढ़ते रहे ब्लॉग # जनयूग के प्रहरी में जैविक खेती की जानकारी के साथ हमारे यूट्यूब चैनल पर क्लिक करे , कम्पोस्ट और वर्मिकंपोस्ट खाद बनाने का सरल तरीका जानें

https://youtu.be/2wgT8b7mcmg

कृषि वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार शर्मा के साथ इंटरव्यू

Wednesday, April 19, 2023

जैविक खेती से दोहरा फायदा

जैविक खेती से दोहरा फायदा मिलता है कम लागत में अधिक उत्पादन एवम् स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता भी आती हैं, हमारा देश कृषि प्रधान देश है अधिक निर्भरता कृषि पर आधारित है जिसमें हमने खेती करने के तरीके को इतना बदल दिया कि आज हम रसायनिक खाद बीज से कुछ समय तो लाभन्वित हो जाते हैं लेकिन लम्बे समय में हम स्वास्थ्य और जमीन दोनो को खराब करते हैं जानकारी के अभाव में हमने जैविक खेती से दूरी बना ली है लेकिन समय के साथ यदि हमने सही फसल का चुनाव एवम् सही उत्पादन प्रक्रिया को समझ लिया तो हम कम बजट में अधिक पौष्टिक आहार पैदावार कर सकते हैं अपने परिवार के साथ हमारे देश को समृद्ध बनाने में बडी भूमिका निभा सकते हैं इसके लिए पहले हमें प्रशिक्षित होना पड़ेगा तभी हम आस पास में प्रशिक्षण दे पाएंगे और यही क्रम आगे मल्टीपल होगा तथा साथ ही सुदृढ़ एवम् स्वस्थ्य समाज में सफल प्रयास का हिस्सा बन पाएंगे, पहले न इतनी बीमारियां थी और न ही इतने हॉस्पिटल थे अब अनगिनत बीमारियां हो रही हैं तो न जाने कितने हॉस्पिटल खुल रहे हैं कारण यही है कि हमारा खान पान बिगड़ गया है और बिना सोचे समझे हमने अनचाहें तत्व फसलों को देना प्रारंभ कर दिया जिससे कई बीमारियों का जन्म हो रहा है अतः हमें स्वस्थ्य रहने और आर्थिक संपन्नता में क्रान्ति लाने हेतु किस फसलों में अधिक आमदनी होती है ऐसी जैविक खेती जैसे अनुष्ठान आरंभ कर दिए तो निश्चित इस महाभियान में बड़े बदलाव की संभावना बनेगी।।

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Monday, April 17, 2023

पिता जीवन का आधार

पिता जीवन का आधार होता है अनुशासन पाठ जहा सीखा जाता हैं वो पिता का साया ही होता है मां का त्याग तो किसी कलम में नहीं समा सकता और मां पर लिखने के लिए तो दुनिया की कलम कम पड़ जाएगी लेकिन पिता का तप और संतानों की सोच समझ पाना बड़ा दुर्लभ विषय है संतानों का आदर्श होते हैं पिता जो आने वाली हर परेशानी को समझने का साहस और अनुभव सिर्फ पिता में ही होता है पिता हर अनुभवों का आभाष कराते हैं आजकल की युवा पीढ़ी कितना समझती है कि पिता का महत्व जीवन में कितना हैं यह समय ही सीखाती हैं जब पिता के नहीं होने पर पिता की बाते याद आती हैं कि उनका एक एक शब्द जीवन को बदलने जैसा होता है, बचपन से जो शिक्षा के साथ संस्कार जोडने का काम करते हैं वो पिता ही है, दुनियां की डिग्री पाने के बाद भी संताने पिता से अधिक अनुभवी नहीं बन सकते व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होने का स्थान तो पिता के शरण में ही मिलता है, इस दुनियां का हर पिता यह चाहता है कि उनकी संताने हर पहलुओं में ऊंचा स्थान पाए चाहे वह जूठ मूठ भी कहेंगे लेकिन कहेंगे मेरे बेटे श्रेष्ठ है मेरी बेटी श्रेष्ठ है क्योंकी गुरु की तरह पिता ज्ञान, मित्र की तरह सलाह और मै हूं न कहने वाला पिता ही होता है,पिता ही जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं पिता के बिना जीवन कटी हुई पतंग की तरह होता है, पुरा जीवन स्वयं के सुख दुःख की परवाह किए बिना हर हाल में चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ लिखकर बड़े आदमी बने जीवन में कोई दुःख न आए अतः बिना पिता के बिना छत के घर और बिना आसमान के जमीन का होना हैं पिता के महत्त्व की भूमिका की व्याख्या करना मुश्किल है , माता पिता एक अनमोल रत्न हैं जिनके आशीर्वाद दिया दुनिया की कामयाबी हासिल हो जाती हैं सदैव इनका सम्मान करें माता पिता ईश्वर की सौगात होते हैं।।

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Saturday, April 15, 2023

नेक विचार समाज को सुदृढ़ बनाता है

नेक विचार समाज को सुदृढ़ बनाता है सामाजिक विधान भी एक सशक्त समाज के व्यवस्थापन में अहम भूमिका निभाता है जिस प्रकार से हर देश के संविधान हमारी आजादी और जीने का अनुशासन सिखाता है उसी प्रकार हर समाज की मर्यादाओं के दायरे को निर्देशित करता है कि हमे समाज में कैसे रहना है देशान्तर काल और समय की दूरी से एक ही समाज की परंपराए थोड़ी बहुत भिन्न हो जाती हैं लेकिन कई मान्यताओं के पिछे कोई न कोई वैज्ञानिक आधार होता है जो समय काल और परिस्थिति के हिसाब से परिवर्तन होता रहा है जहां समय मांग करता है सामाजिक सम्मति से संस्कारों का पाठ्यक्रम जुड़ता जाता हैं हर समाज में एक अनोखा इतिहास समाहित होता हैं और हर समाज अपनी संस्कृति के संचार को आने वाली पीढ़ी में धारा प्रवाह हेतु प्रयास कर एक सुदृढ़ अनुशासन का व्यवस्थापन करते हैं, कही शिक्षा के स्तर से तो कहीं अनुभवों के अंदाज से अपनेपन की आहट भावी पीढ़ी में स्थापन हेतु व्यवस्था बनती हैं जब कोई न कोई निश्वार्थ भाव से ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता सेवा के प्रकल्प तैयार करते हैं जिनको नाम की नहीं सिर्फ़ परिणाम की चाहत होती हैं इस अनुष्ठान का दीप चाहे एक के मन में प्रज्वलित हो लेकिन समान विचारों के कर्मठ योद्धाओ का कारवां खड़ा हो जाएं तो संस्कारों की  दीपमाला भावी पीढ़ी में दमकती है तथा संस्कारमय एवम् एक दूसरे को जोड़ने का क्रम अनवरत बन जाता हैं अतः निष्ठावान लोगों के साथ समान विचारों से सहमत होकर उन प्रकल्पो को गति देने का प्रयास करें जिसमें निश्वार्थ मदद की पाठशाला स्थापित करने का संकल्प हों क्योंकि जीवन में व्यवसाय में स्वार्थ और सेवा में निस्वार्थ भाव होना चाहिए।।

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Wednesday, April 12, 2023

आईना सबसे बड़ा गुरु

आईना सबसे बड़ा गुरु होता है दुनियां के मोटिवेशनल आर्टिकल पढ़ लो, स्पीच सुन लो, कुछ नहीं होगा जब तक अंदर से आवाज नहीं आती कि हमें यह यह कार्य करना हैं, सुबह का अलार्म आपको निर्देशित करेगा कि 5 बज गए हैं तुम उठ जाओ लेकिन उठना तुम्हें पड़ेगा , काम दुनियां में बहुत पड़ा है हमारा विजन क्लियर होना चाहिए कि हमें करना क्या है नहीं करने वाले आलसी लोगों को कितना भी मोटीवेट करो कुछ काम नहीं आयेगा कुछ कर गुजरने का हौंसला रखने वाले एक लाइन से इतिहास बना डालते हैं ऐसे अतीत और वर्तमान में सैकड़ों उदाहरण मिल जायेंगे इसलिए करना क्या है बनना क्या है खुद तय करे वही बनोगे, क्योंकि तुम्हारे अन्दर के संकल्प और मेहनत से परिणाम आएगा दुनियां सिखाती भी है और भटकाती भी है निर्णय तुम्हारे काम आयेंगे  *न उम्र आड़े आएगी और न ही शिक्षा का स्तर* सिर्फ़ काम करने का तरीका और जुनून तुम्हारे नए आयाम स्थापित करेगा खुद के अनुभव को दुरुस्त कर लो हर काम आसान लगेगा अन्यथा सब कुछ मुश्किल नजर आएगा चाहे जॉब करो या बिजनस अतः दुनियां की सीख लेने से पहले ख़ुद को फॉलो करें ,आत्मसाद करे ,आइने में स्वयं को देखे, खुद को समझें, खुद की सुने, मंज़िल मिलेगी जो तुम चाहते हो।।

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Friday, April 7, 2023

प्रार्थना में ईश्वर के रूप का वर्णन क्यों

 प्रार्थना में ईश्वर के रूप का वर्णन क्यों करते हैं क्योंकि जब हमारा मन हमारे आराध्य देव को याद करते समय उनके रूप और गुणों का बखान इसलिए करते हैं कि निराकार रूप साकार रूप में हमारे सामने आ जाता है हमारी आस्था और दृढ़ विश्वास बढ़ जाता हैं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है उसमें हम किसी कार्य को करते हैं तो उसमें बल मिलता है और सफलता प्राप्त होती हैं, हमें ताकत अंदर से ही मिलती हैं, जब हम स्वयं की ताकत को जागृत हेतु प्रयास कर रहे होते हैं तब हमे यह नहीं सोचना चाहिए कि कौन क्या कर रहा है सिर्फ़ स्वयं के चित्त में जाना चाहिए उपवास हम कर रहे हैं तो कौन नहीं कर रहा है यह जानने की जरूरत नहीं , भुख हमें हैं तो खाना हमे चाहीए समस्या हमारी हैं तो समाधान हमे ढूंढना होगा कितनी भी बड़ी समस्या क्यों न हो जब तक हम डट कर उसका सामना नहीं करते तब तक हम कोई भी उपलब्धि हांसिल नहीं कर सकते आप जितना आगे बढ़ेंगे आपका समस्याओं से सामना उतना ही होगा समस्याओं का सामना करने से वो छोटी हो जाती हैं और डर जाने से बड़ी हो जाती है हमे सदैव याद रखना चाहिए कि हम मन को ताकत देंगे उसमें प्रकृति भी हमारा सहयोग करती हैं ईश्वर सदैव साथ रहते हैं अतः निष्ठावान होकर हर कार्य को करने से समूचे समाधान का विकल्प हमारे सामने होता है जीवन को भक्तिमय बनाएं और सत्यता _ सरलता _ स्पष्टता अपनाए ईश्वर शक्ति हर पल आपके साथ रहेगी।।


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Thursday, April 6, 2023

मानवीय रिश्ते पूर्ण नहीं होते

 मानवीय रिश्ते पूर्ण नहीं होते उसे सुरक्षित और प्रभावी बनाने पड़ते हैं उस पर लगातार काम करना पड़ता है क्योंकि कोई भी रिश्ता कभी विकसित नहीं होता सदा विकासशील होता है, सदैव उसे विकसित करने का प्रयास करना होता है क्योंकि जो रिश्ते बने हैं उसे खूबसूरत अभिनय में स्थान देना चाहिए, चाहे वो जीवन के किसी भी कैरेक्टर में निर्वहन कर रहे हो, शैक्षणिक जीवन, व्यावसायिक जीवन हों या पारिवारिक जीवन हों हर रिश्ते की अपनी गरिमा होती हैं मर्यादा होती हैं, पहले तो हमें यह समझना होगा कि कौनसा रिश्ता किस दर्जे का हैं उसके उस महत्व को समझ कर फॉलो करना होता है तब वो रिश्ते प्रगाढ़ बनते हैं, एक तो कोई आपके साथ रहना चाहता है यह अनोखी बात है और किसे यदि आपके साथ रहना पड़े यह एक मजबूरी होती है , मजबूरी से नहीं मजबूती से खड़े रहे ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास अनवरत होना चाहिए उसी में जीवन का आनंद है, इसके लिए आपको सबमें सर्वोत्तम बनना होगा , एक अच्छे पिता_माता, अच्छे पुत्र_पुत्री, अच्छे शिक्षक_विद्यार्थी ,अच्छे मालिक_एम्प्लॉय और अच्छे व्यक्तित्व के व्यक्ति बनने से रिश्ते अच्छे बनते चले जाते हैं अतः हम श्रेष्ठ बनेंगे तो सारे रिश्ते श्रेष्ठ बनेंगे यह प्रयास निरंतर करते रहना चाहिए यह कभी पूर्ण नहीं होते उस पर गंभीरता रखते रहना होता है।।


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Wednesday, April 5, 2023

परिवार में अपनो की महत्ता

 परिवार में अपनो की महत्ता कितनी महत्वपूर्ण है यह गहनता से सोचने का विषय है न कि यह देखने का विषय कि दुनियां में क्या हो रहा है, कौन कितना प्रेम रख रहे हैं यह समझने का विषय नहीं होता सोचना वहां चाहिए कि हम कितना त्याग कर रहे हैं, पैसा तो शायद अकेले की मेहनत के परिणाम से आ सकती हैं लेकिन पुरे जीवन की मेहनत तो क्या कई जन्मों की मेहनत से कमाए धन से परिवार का प्रेम नहीं खरीदा जा सकता, हम हमारे लिए क्या कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण नहीं होता महत्वपूर्ण तो यह होता है कि हमने परिवार के लिए क्या किया , जब हमारा त्याग दिखता है तो हम पर परिवार का प्रेम बिखरता है प्यार की परिभाषा नए आयाम स्थापित करती हैं मन के उदगार फूटने लगते हैं अपने हम पर टूटने लगते हैं जीवन में वो सब कुछ मिलने लगता है जो हम चाहते हैं, दुनियां का स्वर्ग परिवार के आंचल में होता है, दौलत की छाया तो जितनी चाहोगे मिल जाएगी लेकिन अपनो के साए की कीमत नहीं लगा पाओगे, खरीददार तो मिल जायेंगे दौलत का ढेर लगाकर परन्तु बिकने को तैयार कोई नहीं मिलेगा अतः जिनके पास पैसा नहीं उनके एक ही समस्या है कि पैसे नहीं हैं लेकिन जिनके पास पैसा है उनको पैसों के अलावा सब समस्या है ... अपनो के साथ जिए न पैसों की दिक्कत आएगी और न ही किसी वैभव की दिक्कत।।


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Friday, March 31, 2023

सुझावों की हैं दुनियां समाधान की नहीं

 सुझाव की हैं दुनियां समाधान की नहीं सदैव याद रखें हमारी किसी भी प्रकार की समस्या है तो उसका समाधान दुनियां के पास नहीं है, आप किसी को समस्या बताओं आपको कई सुझाव मिल जाएंगे लेकिन समाधान हेतु कोई नहीं आएगा समाधान तो हमें स्वयं को ही निकालना है तो फिर समस्या बताने से अच्छा है खुद समाधान में लग जाएं सुझावों की दुनियां में न उलझे, संभव है इससे हम भ्रमित हो जाएं क्योंकि समस्या एक होती हैं और समाधान के लिए सुझावों का ढेर लग जाता है जो कि हमे स्वयं को अधिक पता होता है कि समाधान क्या है सुझाव हल नहीं है, सिर्फ इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जीवन में एक समस्या को दोबारा जन्म न लेने दे जिससे ऐसे डॉक्टरों की जरूरत ही न पड़े जो बिना हाथ पैर की सैकड़ों सलाह देने वाले हमारे आस पास ही मिल जाते हैं जो कोई हमारा मित्र रिश्तेदार होता है या सीनियर जूनियर लेकिन वास्तविक सच्चाई यह है कि बहुत कम लोग होते हैं जो हमारी समस्याओं में सरीक होकर समाधान हेतु प्रयास करते हैं

हमारी जीवनशैली को किसी के अधीन नहीं बनाना चाहिए क्योंकि दुनियां सिर्फ़ स्वयं की होती हैं दिखावे में हम सब की दिखती हैं अतः ईश्वर की आस्था के साथ कर्म निष्ठता एवम् जीवन का अनुशासन हर क्षेत्र में होना आवश्यक है जिससे शारीरिक पीड़ा, मानसिक पीड़ा और आर्थिक पीड़ा किसी से भी नहीं गुजरना पड़े जीवन को सरल बनाएं सहजता आएगी।।


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Wednesday, March 29, 2023

रवि दर्शन सांदु

 राजस्थान दिवस पर राजस्थान को प्रणाम और जय माता दी की



क्या लिखूं मैं कविता में राणा प्रताप की माटी को

त्याग समर्पण बलिदान कि पर्याय बनी परिपाटी को

चूंडा लेकर भीष्म प्रतिज्ञा सिंहासन ठुकराते है

भामाशा त्यागी बनकर भी अपना शीश झुकाते हैं 

खण्ड खण्ड राणा सांगा ने हिंदू ध्वज फहराया था 

तो पन्ना ने लाल कटाकर कुल का नाम बचाया था

गोरा बादल पद्मन की जहां अमर लिखी कहानी है

कण कण  जिसके शौर्य पले वो माटी राजस्थानी है

जय जय राजस्थान 

रवि दर्शन सान्दू अणेवा पाली

Wednesday, March 22, 2023

हिन्दू नव वर्ष की मान्यता

 हिन्दू नव वर्ष की मान्यता सूर्य देव की पहली किरण के स्वागत के साथ शुरू किया जाता है और पश्चात देशों के अंग्रेजी कैलेंडर का नव वर्ष रात के अंधेरे में शुरू होता है, दोनों कैलेंडर में यह बुनियादी फर्क है एक में रात को 12 बजे शुरू होता है और एक में सूरज की पहली किरण के साथ शुरू होता है बहुत से देश ग्रेगोरियन कैलेंडर को नहीं मानते थे हमारे देश की तरह वो हिन्दू पंचाग को मानते लेकिन आज पश्चिमी देशों का यह कैलेंडर सभी मानने लग गए और हमारा देश भी व्यापार जन्म दिनांक आदि इसी पर आधारित हो गया जिसका न तो मौसम से न प्रकृति से हैं कोई लेना देना है और न ही तीज त्यौहार से जबकि हमारे हिन्दू कैलेंडर में ऐसा नहीं है भारत में दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति के लोग हैं और विक्रम संवत की शुरुआत भी चैत्र मास के इसी चैत्र प्रतिपदा से होती हैं ब्रह्म पुराण के अनुसार भी सृष्टि इसी दिन बनी थी और इसी दिन से भारतवर्ष में काल गणना भी शुरु हुईं थी हिन्दू कैलेंडर और ग्रेगोरियन कैलेंडर और हिन्दू कैलेंडर में कुछ बुनियादी फर्क बताते है ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत ईशा मसीह के जन्म से मानी जाती हैं और हिन्दू कैलेंडर विक्रम संवत 57 बीसी से मानी जाती हैं, जब महाराज विक्रमादित्य ने युद्ध में सकाज को पराजित किया था , हिन्दू कैलेंडर 2080 में प्रवेश कर चुका है और अंग्रेजी कैलेंडर में 2023 चल रहा है भारतीय कैलेंडर की गणना सूर्य और चंद्रमा से होती हैं जबकि ग्रेगोरियन कैलेण्डर पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के अनुसार चलता है पृथ्वी सूर्य के एक चक्कर 365.25 दिन में लगाती हैं इसलिए 365 दिन में एक वर्ष होता है और हर चार साल में एक लीप ईयर होता है ग्रेगोरियन कैलेण्डर सिर्फ तारीखों पर चलता है जिससे यह पता चलता है कि महीना चेंज हो गया है या नया साल आ गया है जबकि हिन्दू नव वर्ष में पूरी प्रकृति भी नवीनता का एहसास कराती हैं कि नव वर्ष आ गया है पतझड़ होकर प्रकृति अपने श्रृंगार की प्रक्रिया में होती है मानो पूरी सृष्टि में ही नयापन आ गया हो, अग्रेजी नव वर्ष की शुरुआत पार्टी से होती हैं तो हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत त्यौहार की ऊर्जा के साथ मनाते हैं इस पूरे देश में अलग अलग नाम से जाना जाता है इस दिन कश्मीर में नवरोज, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उगादी, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, केरल में विशू और पंजाब में बैसाखी के त्यौहार के साथ शुरु होता है अतः हमारे देश में हमारी संस्कृति से जुड़ा नव वर्ष को मनाए यह प्रकृति के डीएनए से जुड़ा पर्व है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को से नव वर्ष के साथ जीवन में नवाचार लाए।।


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Tuesday, March 21, 2023

भारतीय नववर्ष का महत्व

 भारतीय नववर्ष का महत्व समझे कि हमारे पर्व, हमारी संस्कृति हमारा संस्कार क्या कहता है हमारे त्यौहार, हमारी तिथियां सब पश्चात संस्कृति से जोड़ दिए गए जिसकी गणना अंग्रेजी तारीखों से की जाने लगी है, हमारा नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होता है, हमारे शुभ मुहूर्त, विवाह आदि तिथियों को देखकर किए जाते है, लेकिन हम पश्चात संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं तिथियां कम याद रहती हैं तारीखे अधिक जिसका अधिक कारण यह मोबाइल जो कि विशेष प्रयोजन के लिए बनाया गया है लेकिन जन्म से ही बच्चो को थमा दिया जाता हैं एप्पल कम्पनी के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने बिल क्लिंटन से पूछा कि आपके परिवार में कितने फोन है तो उन्होने कहा कि परिवार में जितने मेंबर उतने फोन, लेकिन स्टीव जॉब्स ने कहा कि मेरे घर में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कोई मोबाइल को छूता तक नहीं क्योंकि स्टीव जॉब्स ने कहा मैने इस मोबाइल को बनाया हैं मैं अधिक समझता हूं इसके बारे में जब तक मैच्युरिटी नहीं आती इसकी उपयोगिता समझ नहीं आएगी, आधुनिक तकनीकी को हमे समझ से पहले इस्तेमाल नहीं करना चाहिए , हमारी संस्कृति को हमे सदैव याद रखना चाहिए हर वार तिथि, पर्व जो हमारी सनातनी संस्कृति में बने हैं उसके पिछे तार्किक और वैज्ञानिक आधार हैं हमे सदैव याद रखना चाहिए समझना चाहिए, हमारे शरीर में 80% पानी की मात्रा होती है जो तिथियों के आधार पर प्रभावित होती है,जब पूर्णमासी होती हैं तो पानी ऊपर चढ़ता है और जब अमावस्या आती हैं तो पानी नीचे उतरता है बुद्धि का बैलेंस खराब हो जाता हैं इसलिए अमावस्या को छुट्टी रखी जाती हैं, जितनी भी यांत्रिक दुर्घटनाएं होती हैं वो सब अमावस्या को होती हैं क्योंकि चन्द्रमा दिखता नहीं है तो शरीर में निष्क्रियता आती हैं दुर्घटनाएं बढ़ती है अधिकांश भूकंप अमावस्या के आस पास आते हैं 2,4 दिन पहले या बाद आता है, हिन्दू कलेंडर को सदैव याद रखें हर तिथि पर्व का अपना महत्व है अतः हमारे हिन्दू वर्ष चैत्र प्रतिपदा को प्रारंभ होता है और हर दिन, माह और त्योहारों के पिछे समय के साथ लॉजिक हैं स्मरण रहे।।


नववर्ष की अनंत कोटिशः बधाई 


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Monday, March 20, 2023

अपनी कहानी खुद लिखों

 अपनी कहानी खुद लिखों वातावरण तुम्हे किसी भी दिशा में ले जा सकता हैं लेकिन तुम्हे ही समझना होगा कि जिस दिशा में तुम्हारा अतीत का समय निकला वो तुम्हारे लिए कितना उपयोगी है, क्योंकि अब तक जो हुआ वो तुम्हारे हाथ में नहीं था लेकिन वर्तमान तुम्हारे हाथ में है, जिस विद्यालय में तुमने अध्ययन किया उसका चयन तुमने नहीं किया, जो दोस्त तुम्हे मिले वो संयोग था, तुम्हारी समझ ऐसे माहौल से आई जिस माहौल में तुम रहे, वो माहौल तुम्हे मिला वो सम्पूर्ण तुम्हारा अपना निर्णय नहीं था.. हां उस माहौल से चयन तुमने किया कि किसे पसन्द करू लेकिन तब विकल्प तुम्हारे पास सीमित थे जब हमारी समझ यह निर्णय ले सकती हैं कि हमें किस वातावरण में रहना चाहिए इसके बाद तो हर उस क्षण के जिम्मेदार हम है जिस संगति में हम रह रहे हैं यह जरूरी नहीं होता कि हमारा अतीत ठीक नहीं था तो भविष्य भी ठीक नहीं होगा वर्तमान को सुधार लेंगे तो भविष्य उत्तम बन जाएगा यह पक्का है क्योंकि हम अब तक किरदार निभा रहे थे और अब हम चाहें तो कहानीकार बन सकते हैं, किरदार के हाथ में सिर्फ लेखक द्वारा लिखित बात को फॉलो करना होता है जैसे कि हमें जो वातावरण मिला उसके अनुरूप हम बने अब हम जो वातावरण बनाएंगे उसके अनुरूप लोग बनेंगे अतः हम एक अच्छा लेखक बने ताकि हमारे जीवन की कहानी को हम बेहतर तरीके से लिखें जिसे हम और हमारे साथ कनेक्ट होने वाला हर किरदार अपनी अलग पहचान बनाएं।।


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Sunday, March 19, 2023

प्रतिदिन एक कार्य करें

 प्रतिदिन एक कार्य करें जो आपको लगना चाहिए कि यह कल से भिन्न हैं लेकीन वो हर दिन अलग होना आवश्यक है कि आज मैने वो त्रुटि सुधार की जो कल मुझमें थी, यदि आप निरंतर ऐसा करते हैं तो आपका जीवन सुखमय होगा चाहे उस समय आप जीवन के किसी भी हिस्से में खड़े होकर देख रहे हो, वो आर्थिक व्यवस्था का भाग हो या पारिवारिक जिम्मेदारी या फिर समाजिक दायित्व निभा रहे हो हर पल आनन्द महसूस करोगे, हमारा प्रयास परिवर्तन के साथ कनेक्ट होकर भूल को सुधारने की दिशा में होना चाहिए उक्त किसी भी हिस्से में जीवन व्यतीत कर रहे हैं हमारा परिणाम सकारात्मक होगा, बेहतर प्रयास बेहतर परिणाम लाते हैं हमने किसी की कमी को देखकर जीवन नही जीना चाहिए हमारी गलती को देखकर समझना चाहिए कि क्या हम जैसे है उससे अधिक बेहतर कैसे बने क्योंकि दूसरो की कमियां देखने जाएंगे तो हर पेड़ पोधे फूल पत्तियां खूबियों को लेकर खड़ी है लेकिन उनकी जड़ों में कई गन्दगी भरी होती हैं फिर भी उनमें महक होती हैं, हमे रूपांतर की प्रक्रिया से गुजरना चाहिए क्योंकि यही जीवन का स्वभाव है जिसे हमे अच्छी तरह से देखना होगा, धरती की हर दूसरी चीज रूपांतर की प्रक्रिया में है हम इन प्राकृतिक चीजों को समझते हुए आगे बढ़ेंगे तो हम सही दिशा में चल रहे हैं अन्यथा हम कही भटक रहे हैं अतः आप किसी दूसरे प्राणी से बेहतर नही कर पा रहे हैं तो आपका जीवन सार्थक नही है मनुष्य जीवन बहुत महंगा जीवन हैं क्योंकि खाने, पीने, सोने, बैठने चलने फिरने और पहनने के लिए बहुत सारी चीज़ें आवश्यक होती हैं लेकिन हमे जीवन के प्रति सदैव संवेदनशील बनना चाहिए ताकि हम हर संभव प्रयास का हिस्सा बने जिससे हमारा जीवन सुखमय और आनंदित बने।।


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Monday, March 6, 2023

स्वतंत्र सोच बनाना कठिन

 स्वतंत्र सोच बनाना कठिन हैं क्योंकि हमारा चेतन मन हमारे अवचेतन मन के अधीन होता हैं, हमारी सोच हमारे आस पास के वातावरण पर निर्भर करता हैं,  यदि हमनें उन चीजों को समझ लिया की हमें वो करना चाहिए जो हमारे लिए सही है उसके लिए हम हमारी स्वतंत्र सोच बनानी होगी जिसके लिए हमें आत्म चिंतन और हमारे इर्द गिर्द वातावरण को पूर्णतया विवेकशीलता से समझना आवश्यक होता हैं, हमारी सोच और आगे की क्रमिक प्लानिंग को लोग उनके विवेक से बदल देते हैं क्योंकि हमारे सोच को बदलने का काम वो लोग कर सकते हैं जहां हम उनकी योजना के अनुरूप चलने लग जाते हैं वो हमारे दिमाग में ऐसी विचार धाराओं से तैयार कर देते हैं कि हमारा मन मस्तिष्क उनकी सोच के साथ चलने लग जाता हैं और हमारे द्वारा वो ही कार्य करवाया जाता हैं जो वो लोग चाहते हैं,  जिसका उदाहरण माइंड रीडर हमारे साथ प्रेक्टिकल कर के बताते हैं और हमारी सोच उनके अधीन होकर काम करने लगती हैं, जीवन में बहुत बार ऐसा कई लोगो के साथ होता हैं जहां उनकी निर्णय क्षमता को छिन्न भिन्न कर देते हैं और व्यक्ति हताष होकर असफलता का मार्ग प्रसस्त हो जाता हैं अतः  जीवन में अच्छे मुकाम को पाना चाहते हैं तो हमारे मन को स्वतंत्र रूप देकर निर्णय शक्ति को सुदृढ़ बनानी चाहिए ताकि कोई भी हमारे सफल मार्ग में बाधा नहीं बनें और जीवन में आर्थिक आजादी के साथ सुकून का जीवन व्यतीत करने का सफल प्रयास कर सकें !!


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Wednesday, February 22, 2023

कुछ नया करने के लिए सोचे

 कुछ नया करने के लिए सोचे कि हमें क्या करना चाहिए कहने के लिए साधारण बात है लेकिन सफलता के लिए कुछ नया करने जाना एक बड़ी चुनौती है , हम नया तो करना चाहते हैं लेकिन क्या करना चाहिए किस प्रकार से करना है हमारे जीवन के जोड़े हुए अनुभवों को कैसे पंक्तिबद्ध करके हमें नया सोचना है यह बड़ा विषय है यदि हमें नया करना है तो हमारा अनुभव हमें वो सारी चीजें दे चुका होता हैं जो हमनें आज तक किया है, लाभ हानि व्यवसायिक जीवन के उतार चढ़ाव जो सब देख चुके हैं वो हमें नए व्यवसाय के साथ अप्लाई करना होगा तब हम नया कर पाएंगे क्योंकि कुछ अलग करना अपने आप मे एक इतनी बड़ी चुनौती है कि कोई भी उसे स्वीकार नहीं करेगा चाहे वो आपके मित्र रिस्तेदार हो या हमेशा आपके साथ रहने वाले हमारे समीपस्थ लोग ही उसको नकारेंगे लेकिन जब तक आप यह दृढ़ संकल्प नही लेंगे कि आप किसी की परवाह किए बिना अपना रिमोट को स्वयं के पास रखकर नया करने जाओगे तभी शुरुआत होगी दुनिया कभी नहीं चाहेगी कि तुम नया करो या बड़ा करो हमारी सफलता में सबसे अधिक जिम्मेदार हम स्वयं होते हैं इतिहास के पन्नों पर लोगों ने हमेशा टांग खिंचाई की है अतः खुद को बेहतर बनाने का तरीका यही है कि अपने अनुभव से निर्णय लेने के बाद इमारत को गढ़े न कि दूसरे के नकारात्मक विचारों से नरवश होकर हमारी गति को विराम देकर थके नयी सफलता का आयाम तभी सम्भव है जब हम बिना रुके , बिना थके, निरन्तर हमारे प्रयास में लगे रहे तो सफलता के सदैव सफल प्रयास होंगे।।


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Tuesday, February 21, 2023

शुध्द खान पान से शुद्ध विचार

 शुद्ध खान पान से शुद्ध विचार आते हैं आधुनिक युग में हमारे विकारों का मुख्य कारण हमारा खान पान हैं हम जैसा खाया अन्न वैसा रहे मन और जैसा खाया अन्न वैसा रहे तन, अन्न शुध्द होगा तो तन स्वस्थ्य रहेगा और तन स्वस्थ्य तो मन स्वस्थ्य, हमारा देश कृषि प्रधान देश है जिसमें अधिकांश उत्पादन किसानों द्वारा प्रेस्टिसाइज उपयोग करके किया जाता हैं पहले वातावरण में शुद्धता थी तो लोगो के विचारों में शुद्धता थी पूर्ण रूप से जैविक तरीके से खेती हुआ करती थी जहाँ यूरिया डीएपी जैसी कोई खाद था, प्राकृतिक बीज से कृषि उत्पादन हुआ करता था आज हम अतीत को भूल गए जैविक खेती के तरीके भूल गए शुध्दता का स्वाद नही पता परख के नाम पर शुद्धता की जानकारी नहीं पाश्चात संस्कृति ने हमें बहुत कुछ भुला दिया पुनः हमे हमारी संस्कृति और संस्कारों की ओर आना पड़ेगा , हमने कृषि अनुसंधान में विकल्प खो दिए जो अतीत में नीम और गाय के गोबर से खेती हो जाया करती थी लेकिन वो ही पुराने प्रकल्प तैयार करने होंगे जिससे हम आपस में ही एक दूसरे की मदद खेती उत्पादन में किट नाशक और फसलों की ग्रोथ में लिया करते थे जिससे हमारी फसल  वर्तमान समय से अधिक उत्पादन होता था, आज हम हमारी धरती माता को खाद बीज से खराब कर रहे हैं और हमारी पुरानी पद्धति का दोहन हो रहा है, हम जैविक कृषि करेंगे तो पैदावार शुध्द होगी जब शुध्द पैदावार होगी तो हमें शुद्ध खान पान मिलेगा और शुध्द खान पान से हमारे विचारों में शुद्धता आएगी हमारी वाणी मधुर होगी जिससे वातावरण में मधुरता फैलेगी सैकड़ों बीमारियों जड़ से खत्म हो जाएगी अतः हमारे शुद्धता के सेवन से विचार शुद्ध होंगे और शुध्द विचारों की महक प्रवाहित करेंगे।।


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Monday, February 20, 2023

परेशानी में धैर्य

 परेशानी में धैर्य और बुद्धिमता की आवश्यकता होती हैं, परेशानी किस प्रकार की है और उसका मार्ग किन प्रयासों से हो सकता हैं उस समय सिर्फ वो ही प्रयास किया जाय तो सम्भवतः समस्या दूर होगी हम किसी भी विसम परिस्थिति में मनः स्थिति खो देते हैं तो हमारे निर्णय भी गलत होने की संभावना बनती हैं , हमारे विवेक हमारी परिस्थितियों को मोड़ दे सकता हैं यदि हम हमारी सोच सही मायने में लेकर चले तो माहौल भी हमें सही निर्यायक स्थान पर ले जाएगा और सही दिशा मिलेगी तथा हम विपरीत परिस्थितियों से बाहर आ जाएंगे, जब कोई परेशानी आती हैं तो हमें यह समझना चाहिए कि ईश्वर हमारी परीक्षा ले रहा हैं और उस परीक्षा में बहुत ही सहजता से उतीर्ण होना है ताकि किसी जीवन में सरलता बनी रहे, यदि हम कभी विकट परिस्थिति में हम विचलित नहीं होंगे तो हम कभी दुःखी हो ही नहीं सकते क्योंकि दुःख और सुख हमारे अनुभवों में छुपा होता हैं, हमारे मन की दिशा को भटकने नही देंगे तो जीवन सुखमय होगा अतः हमारे जीवन में मधुरता लाने के लिए शान्त और शिथिल मन के साथ अनुभूति परिस्थितियों के अनुकूल बनाकर जीने से परेशानी मुक्त जीवन का आनंद अनुभव होगा।।


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Thursday, February 16, 2023

प्रार्थना और प्रयत्न दोनों साथ चलते हैं

 पुरुषार्थ के बिना कुछ नहीं हम भाग्य के भरोसे सब कुछ छोड़ दें कि हमें सब कुछ मिल जाएगा तो कुछ नहीं मिलने वाला हमेशा प्रार्थना एवं प्रयत्न दोनों साथ चलते हैं जब हम यह सोच रहे हैं कि हमारे भाग्य की वस्तु हमें स्वतः मिल जाएगी तो यह हमारी भूल है बिना श्रम के कुछ भी नहीं मिलता चाहे हम कितना ही भाग्य को कोसे श्रम हमारी सफलता की अहम भूमिका है, बहुत से लोग ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञ के पास जाते हैं शनि ग्रह के प्रकोप हैं राहु केतु का साया हैं हमें 6 महीने और रहेगा साल भर और रहेगा कितना भी कर ले समस्या रहने वाली हैं ..... यह सब बातें कर्महीन लोगों की है, विद्वान बताते हैं फलित ज्योतिष सौ प्रतिशत सत्य नही होता, 6 माह साल भर क्या हमें 1 पल भी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए कर्म प्रधान होता हैं प्रार्थना दैनिक जीवन को ऊर्जा प्रदान करता हैं ईश्वर की आस्था के साथ प्रयास करना चाहिए शुध्द वातावरण में रहना चाहिए ताकि मन और धन की शुद्धि के साथ स्वस्थ समृद्ध जीवन जीने का अवसर मिले, जब हम शुद्धता के साथ पूरी ईमानदारी और मेहनत से जीवन जिएंगे तो हमें कोई परेशानी नही आएगी अतः जीवन को सुखद बनाने के लिए श्रम के साथ ईश्वर में श्रद्धा रखने से ऊर्जा का संचार बढ़ता जाएगा सफल जीवन के दोनों मंत्र *प्रार्थना और प्रयत्न* ।।


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Tuesday, February 14, 2023

सुख एवं दुःख के कारण स्वयं

 हमारी संस्कृति हमारे विरासत की धरोहर है, हम इसे संजोए रखें और भावी जीवन को संस्कारमय बनाकर वातावरण में महकता दे यह हमारे चित्त के उत्पन्न विचारों पर निर्भर करेगा, हमारी शिक्षा का स्तर जितना महत्वपूर्ण हैं उतना ही महत्वपूर्ण हमारे संस्कार हैं,यदि जीवन में दुःख ही दुःख है,कोई आनन्द नहीं है,तो समझो जीवन की दिशा गलत है दुःख कोई दे नहीं रहा है, दुःख का कारण हम स्वयं है, हमारे जीने का ढंग ठीक नहीं है, हमारी त्रुटि को ढूंढने का प्रयास करें हम जीवन के विपरीत दिशा में यात्रा कर रहे हैं, हमारी संस्कृति को हम भूल रहे हैं रास्ता भटक रहे हैं, हमारे सारे कृत्य हमारे स्वभाव के अनुकूल नहीं है, अपितु प्रतिकूल है, इसलिए दुःखी है जिस दिन हम जीवन की सुनेंगे और वहाँ से जीवन को सही दिशा प्रदान करेंगे उसी क्षण आनन्द ही आनन्द महसूस होगा इसलिए अनुभूति में हमेशा सुख का अहसास करने के लिए अपने निर्णय को बार बार न बदले, निर्णय लेने से पहले चिंतन ,मनन करें परिणाम आने तक इंतजार करना चाहिए अन्यथा अनुभवों की दुनियां में बिखराव आने लगेगा एवं जीवन में मधुरता का आभास कम होगा अतः स्वयं के कारण को समझना होगा तभी जीवन सुखद एवं समृद्ध बनेगा।।


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Wednesday, January 25, 2023

छोटे छोटे कार्य से बड़ा परिवर्तन

 छोटे छोटे कार्य करने से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता हैं, जुनून होना चाहिए कार्य करने का हौसला बुलन्द रखना होता हैं, ऐसा किस्सा हैं 14 जनवरी 1934 को बिहार के गया के पास गहलौर गांव के एक मजदूर का हैं जो मजदूरी किया करता था और उसकी पत्नि प्रतिदिन खाना लेकर जाया करती थी जिसको एक पहाड़  पार करके जाना पड़ता था, 1959 की बात है एक दिन उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी जब अपने पति के खाना लेकर जा रही थी तब मिट्टी का घड़ा पैर पर फिसल जाने से गिर गई और लहूलुहान हो गई तो दशरथ मांझी उसेब अस्पताल लेकर गया जो कि 70 किलोमीटर दूर था उस समय कोई वाहन इत्यादि नही थे वो अपने पीठ पर बांध कर पैदल चल पड़ा तुरन्त अपनी तेज गति से अस्पताल पहुँचने प्रयास किया लेकिन अस्पताल पहुँचते पहुँचते उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी डॉ ने उसे मृत घोषित कर दिया, उसे गुस्सा आया कि काश उस पहाड़ी को पार करके नही जाना पड़ता तो समय पर अस्पताल पहुँच जाता और उसकी पत्नी बच जाती उसी दिन से वो उस पहाड़ी को खोदने में लग गया और 22 साल तक उस पहाड़ी को काटा अंततः उसने 360 फुट लम्बी 30 फुट चौड़ी 25 फुट ऊंची पहाड़ी को काटकर सड़क बना डाली, जो 55 किलोमीटर की दूरी के रास्ते को तय करने की बजाय 15 किलोमीटर दूरी का रास्ता बना दिया आज पूरी दुनिया पूरा देश उस भारत रत्न दशरथ मांझी को माउन्टेन मैंन के नाम से जानती हैं जो एक मजदूर वर्ग से सम्बंध रखने वाला व्यक्ति छोटे छोटे प्रयास से चीनी हथौड़े से बड़े पहाड़ को तोड़ डाला , अतः व्यक्ति अपने नाम से नही व्यक्तित्व से पहचाना जाता हैं अपने कार्य करने की लगन और संकल्प से परिणाम निर्भर करता हैं।।


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Monday, January 23, 2023

खुद को कैसे बेहतर बनाएं

 खुद को बेहतर बनाने के लिए खुद की उतनी ही मदद करे जितना आप दूसरों के लिए मदद करने हेतु तत्पर रहते हो किसी अन्य की मदद के लिए आप कितना सोचते हो, उसकी पीड़ा को कितना समझते हो उतना ही अपने लिए समझते हैं तो समस्या आएगी ही नहीं, जितना हम दूसरों को ज्ञान देने में समय बिताते हैं और वो हम हमारे चित्त में सोचकर सुधार लाने लग जाएं तो शायद हमें इतना ज्ञान बाटने की जरूरत ही न पड़े, स्वयं के सुधार में अधिक निवेश करना चाहिए क्योंकि हम समय का निवेश दूसरों के सिस्टम को सुधारने में लग जाते है तो स्वयं के लिए अधिक समय नही लगा पाते , सबसे पहले हमें स्वयं से प्रेम करना चाहिए बिना किसी शर्त के आत्म स्वीकृति का अभ्यास करना चाहिए, दुसरो से प्रेम करने का बेहतर तरीका है कि आप स्वयं को सबसे अधिक प्रेम करें, आप क्या करते हैं और क्या विश्वास करते हैं, इससे आपको और दूसरों को अच्छा महसूस होना ही चाहिए, ये आप अपना ध्यान रखे बिना दूसरों के लिए कुछ करने का प्रयास करते हैं, तो अंत में आप आक्रोशित, नाराज और नकारात्मक महसूस कर सकते हैं, यदि आप स्वयं से प्रेम करते हैं, तो जब आप किसी की मदद करेंगे तो एक सकारात्मक प्रभाव बनाएंगे अतः आप धरातल पर अच्छे इंसान की तरह अभिनय करके नही वास्तविक जीवन में अच्छे बनने का प्रयास करना चाहिए और अपने अंदर से नाराजगी और आत्मघृणा को दूर करके अच्छे इंसान बनने का प्रयास करना चाहिए।।


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Sunday, January 22, 2023

दूसरों से अधिक परफेक्ट हम

 जीवन में अपनी तुलना किसी दूसरे से नही करना चाहिए, हम जैसे भी हैं परफेक्ट हैं यह सदैव समझना चाहिए, विजेता वो नही होते जो कभी फेल नहीं होते बल्कि कभी हार नहीं मानते, निरन्तर संघर्ष करते है हम हमारी समस्याओं को प्रतिदिन याद करते हुए उसमें घिरे रहते है तो अच्छी चीजों को भूल जाते हैं, आप अपना भविष्य नही बदल सकते लेकिन आदते बदल सकते है जो आपका भविष्य बदल सकता हैं, अपने मिशन में कामयाब होने के लिए एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा, बारिश के दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते हैं बल्कि बाज आसमां उड़कर बारिश को ही अवॉइड कर देता हैं समस्या एक जैसी है रवैया बदल दिया उससे कठिनाई भी सरल हो गई सफलता का आनन्द उठाने के लिए कठिनाईयो का सामना करना पड़ता हैं, इंतजार करने वाले को उतना ही मिलता हैं जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते है, सभी मे समान प्रतिभा नही होती लेकिन प्रतिभा को विकसित करने का अवसर सबके पास समान होता हैं हमारी प्रतिभा विकसित करके हम कठिन से कठिन कार्य सुलभता से कर लेते हैं यह सोच मत रखो कि इस कार्य को कौन करेगा बल्कि यह सोचना चाहिए कि मेरे अलावा कौन कर पाएगा यही सोच हमें नई ऊर्जा देता हैं,हम सूरज की तरह चमकना हैं तो वैसी तपन भी लाना पड़ेगा महानता ज्ञान, जूनून और करुणा से आती हैं अतः हमेशा अपने आप से कहो कि यह कार्य मैं कर सकता हूं, ईश्वर सदैव मेरे साथ हैं, मैं सर्वश्रेष्ठ हु, कुशल नेतृत्व हैं मुझे जो कार्य करना है उस कार्य को करने का दिन आज है सदैव प्रगति पथ मिलेगा।।


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Saturday, January 21, 2023

फेल होना सफलता की एक सीढ़ी हैं

 फेल होना सफलता की एक सीढ़ी हैं, हम सफल होना चाहते हैं तो फेल होने के लिए हमेशा तैयार रहना पड़ेगा, जब तक हम असफल नही होते हमें सिख नही मिलेगी, वो ही अनुभव हमारे सफलता के आधार स्तम्भ होंगे हम यह सोचे कि बिना किसी प्रॉब्लम के सब कुछ मिल जाए तो यह असम्भव हैं, प्रॉब्लम का सामना करना सीख गए और उसका हल निकालना आ गया तो सफल होने से आपको कोई नहीं रोक सकता किसी कार्य करने से पहले यह सोचकर चलना है कि प्रॉब्लम तो आना ही है और उससे लड़ने के लिए तैयार रहना है यह साइकोलॉजी पहले से दिमाग में बिठा लेते है तो सफल होने से कोई नहीं रोक सकता हर असफलता हमें कुछ न कुछ सीखा कर जाएगा, जितना हम सीखेंगे हमारे लिए रास्ते और आसान हो जाएंगे हमने जो गलती पिछे की होती हैं दुबारा नही होगी ताकि हमारी मन्जिल आसान हो जाएगी, हमें दाएं बाएं नही देखना है हमें सिर्फ हमारी सोच को सकारात्मक रखना होता हैं दृढ़ संकल्प के साथ हमारे निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए सम्पूर्ण सामर्थ्य लगाते हैं तो हमें वो सब कुछ मिल जाएगा जो हम चाहते हैं अतः हम हर असफल वाले सफर में सिखते हुए वो सब सीखते हुए सफर करेंगे तो परिणाम सकारात्मक निकलेंगे।।


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Friday, January 20, 2023

समझ का फर्क

 समझ का फर्क ही हमें परिणाम पर प्रभाव डालता है, कोई भी व्यक्ति मेहनत के अनुसार परिणाम की उम्मीद रखता है तो ठीक है, अन्यथा अधिकांश लोगों की सोच ऐसी होती हैं जो यह सोचते हैं कि हमें कुछ मेहनत ही न करनी पड़े और हमें सब कुछ मिल जाए दूसरा यह कि कुछ लोग ऐसे होते है जो यह चाहते हैं कि मेरे साथ वाले को मुझसे कम मिले जो मिल रहा है उससे उनका मन नही भरता उनकी तुलना हर दम करते हैं और कुछ लोगो की सोच उनके मूल्य से अधिक रिटर्न देने का मन बनाते है हमारी समझ हमारी ऊंचाइयां तय करता हैं हमारे सिद्धान्त हमारी अनुशासन व्यवस्था स्थापित करता हैं, जिससे हमें लक्ष्य प्राप्ति में सहयोग मिलता हैं, हमारी नीति रीति उन्नति में कार्य करती हैं कि हमने कैसे विधान से आर्थिक समृद्धि पर कार्य योजना बनाई है उसी के अनुरूप सफलता का पथ संचलन होगा अतः हम हमारे जीवन में व्यवसायिक  विधेयक के सीमाओं में सेवारत रहेंगे तो हमारी समझ शक्ति उसके अनुकूल बनेगी और नई क्रांति का आगाज होगा।।


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Thursday, January 19, 2023

सफर उन्नति का

 सफर उन्नति का तय करने के लिए हमें हमारी पुर्ण ईमानदारी लगन, कठोर परिश्रम एवं कर्म क्षेत्र की निष्ठा पर निर्भर करता है कि कितना चलने के बाद हमें सफलता मिलेगी, हम हमारे अनुभवों की दुनिया का उपयोग कैसे कर रहे हैं और किस समय कर रहे हैं इसका भी महत्वपूर्ण योगदान रहता हैं, बहुत बार हम हमारे भाग्य को दोषी मानकर रुक जाते हैं और हमारी कमी को नही देखते की हम कहा चूक कर रहे हैं जहाँ से हम सुधार करें, हमारी ताकि हमें किसी को दोष नहीं देना पड़े, हमारे वडिलो ने कहा है कि मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता होता हैं तो उस निर्माण में दोषी भी हम ही होंगे कर्म प्रधान होता हैं यह हमारे शास्त्र कहते है तो फिर तो हमारी प्रधानता को महत्व देना चाहिए न कि कर्म भूमि छोड़कर किस्मत को दोष देना, विनोबा भावे ने कहा है कि प्रार्थना और प्रयत्न दोनो साथ चलते हैं तो हमें प्रयत्न की कतार को क्यों तोड़े जब तक हमें मुकाम नही मिलता...हमारा गन्तव्य हमारी राह देखता हैं हमारे क्रमिक विकास के पथ को कसौटी पर खरा उतारते हुए कर्मो के ब्रिज पार करते हुए निरन्तर चलने का सम्बोधन करते हुए, अतः हमारे गन्तव्य पर पहुचने तक हमारी सम्पूर्ण ताकत हमारे रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए लगाते रहे, निरन्तरता से प्रयास करते रहे,,, किसी को दोष देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी सफलता चरण चूमेगी।।


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Tuesday, January 17, 2023

सामाजिक व्यवस्थापन

 हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार आनुवांशिक और वातावरण की सहभागिता से मिलता हैं ,

सामाजिक व्यवस्थाओं की परम्पराए हर समाज के रीति रिवाजों में अलग-अलग होती हैं, लेकिन हमारी अधिकांश मानसिकता आर्थिक सक्षमता के हिसाब से अपने स्तर के लोगो के साथ विभाजित हो जाती हैं और समाज में अंतिम व्यक्ति के हित की बात बहुत कम जगह देखी जाती हैं उसके पिछे कई कारण होते हैं , यह सब विषमताएं समाप्त कैसे हो सकती हैं इस पर विचार बहुत कम लोग करते हैं लेकिन हमारे उद्देश्य यदि समाज सेवा में सही दिशा को निर्धारित कर प्रयास करते हैं तो निश्चित रूप से परिवर्तन का आगाज सम्भव है और हमारा अतित हमें सिखाता भी है,, महत्वपूर्ण बात यह नही हैं कि कितने लोग प्रथम कतार में खड़े होकर शंखनाद करते हैं इससे कही अधिक महत्वपूर्ण यह होता हैं कि हम  हमारी उस जागृति में कितने निष्ठावान होकर समाज सेवा में समर्पित होते हैं हमारी संवेदनशीलता ही हमारा परिणाम निर्धारित करेगी,... हमारी सामाजिक सरोकार की भावनाओं को संवेदनशील लोगों से जोड़कर   जागरूकता की कड़ी में निश्वार्थ आगे बढ़े तो निश्चित रूप से अच्छे व्यवस्थापन हेतु प्रयास हो सकता है 

खैर ...... हमारी सोच का कारण किसी भी पहलुओं से हो लेकिन हम इस सोच की परम्पराओं को तोड़कर और हमारी विचार धाराओं को एक ही धारा में प्रवाहित हो ऐसे अनुष्ठान का संकल्प लें तो उस यज्ञ में हर कोई आहुति देने हेतु तैयार रहेगा अतः आईये हम इस सोच के साथ आगे बढ़े कि व्यक्ति विशेष को महत्व कम देकर उनकी अच्छी सोच को समाहित करे और एक जुट शक्ति सम्पन्न समाज के निर्माण की ओर कदम बढ़ाएं और आने वाली पीढ़ी को एक अच्छा भविष्य प्रदान हो उस हेतु मर्यादा स्थापित करने की कड़ी में कदम बढ़ाएं


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Monday, January 16, 2023

सफलता क्या है

 दुनिया आपको सफल होने दे या न होने दे आपको उनकी सोच से नही अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कर्म क्षेत्र में कार्य करना है जीवन में उतार चढ़ाव सफलता का हिस्सा हैं वो आना चाहिए वो ही आपको सिखाएगा की आपको क्या करना है क्या नही, मन के अंदर की समझ आना चाहिए बाहर क्या हो रहा है उस पर नही जाए, कोई आपके पैर पर पैर दे रहा है या सिर पर भूल जाओ यह सिद्धांत बनाएं कि जो हमारे अंदर चल रहा है उसे हम तय करेंगे कोई और नही जब आप सफल मन से वो कार्य करेंगे तो उन उम्मीदों के सच होने की ज्यादा सम्भावना बनेगी बिना बुनियाद के सुधारे नही भागना हैं उसे पहले सुधारना चाहिए जिसकी हमें जरूरत है....कितनी भी चुनोतियाँ आए हमें अंदर से मजबूत रहना है हमें सफल होने से कोई नही रोक सकता क्योंकि सफलता का अर्थ ही यही होता हैं कि हम ग्रोथ कर रहे है सफलता हम उसे ही नहीं कहेंगे कि जिसे हम पाना चाहते है जो हमें मिले, सफलता का मतलब यह है कि कुछ वर्षों पहले हम जिस स्थिति में थे आज उससे बेहतर स्थिति है, जैसे हम कल नॉर्मल जिंदगी जी रहे थे और आज सब कुछ ठीक ठाक हैं, उसे हम सफलता कह सकते है क्योंकि हमारी अपेक्षाओं के अनुकूल हमें मिले यह कोई तय नहीं हैं हमारी अपेक्षाए कभी पूरी नही होती समय के साथ हमारी सोच बदलती जाती हैं और हम बीते हुए कल से आज बेहतर है तो भी हम सफलता की किसी दहलीज पर खड़े हैं, यह सीढियां कभी समाप्त नहीं होती हम सफल प्रयास करते हुए जीवन में आगे बढ़ते जाएंगे तो सफलता को छूते हुए कदमताल कर रहे हैं, हमारी अनन्त इच्छाओं पर नही सफल कदमों को देखते हुए उसी दिशा में चलना ही सफलता हैं, यह मानव प्रवृत्ति हैं कि हम थोड़ा कुछ मिल जाए तो हम बहुत कुछ इच्छा रखते है, हमें दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कर्म करने की क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए प्रकृति अपने नियमों से चलेगी पुरुषार्थ और कार्य करने के सिद्धांतों से सफलता मिलती हैं, सिद्धान्तों से समझौता नहीं करना है अपितु समय परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए बदलाव करने से बड़ा बदलाव आता हैं, कल्पनाओं के पहाड़ मन में गढ़ने से कुछ नहीं होता समय की मांग पूरी करना होता हैं जहाँ हमें सफलता का शिक्षक ले जाये मार्ग प्रसस्त होते रहने से मौलिक कार्य होता रहता हैं अतः मनोवैज्ञानिकी सफल सोच रखे सफलता का अर्थ समझ आएगा सदैव सफल प्रयास होंगे , आप खुश रहेंगे।।


क्रमशः पढ़ते रहे

ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी

Sunday, January 15, 2023

हर चीज की सीमित उपयोगिता

 दुनिया में हर चीज का महत्व अपनी अपनी जगह होता हैं लेकिन उस महत्ता को समझना हमारे लिए जरूरी हैं, कोई भी वस्तु हम इस्तेमाल करने के लिए लाते हैं तो उसकी उपयोगिता समझते हुए लाना चाहिए कि इसकी हमारे लिए कितनी आवश्यकता है उसी हिसाब से उसका उपयोग करना हमारे लिए फायदेमंद होता हैं, इसके अतिरिक्त हम उस पर जरूरत से अधिक समय निवेश करते हैं तो उसकी महत्ता कम हो जाएगी अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि जो चीज वो खरीदते हैं उसका इस्तेमाल कैसे करें जो चीजे खरीदते हैं वो चीजे उनका इस्तेमाल करने लग जाती हैं, उसके अधीन हो जाते हैं वो हमें गुलाम बना देती हैं, आप उनको काम में ले वहा तक ठीक है लेकिन जब आपको वो चीजे काम में लेने लग जाए तो यह ठीक नहीं है, यदि हमनें यह समझ लिया हर एक की जीवन में सिमित भूमिका होती हैं और बखूबी उस भूमिका को आपने सिमित तरीके से निभाना शुरू कर दिया तो जीवन सफल है, जैसे भौतिक सुख सुविधाओं की सीमित भूमिका, शिक्षा की , रिश्तों की, आर्थिक व्यवस्थाओ की सीमित भूमिका ऐसा ही हर जगह एक दायरा बना कर जीना शुरू कर दिया तो जीवन सुकून से कटने लगेगा आपकी समस्याए स्वतः कम होती चली जाएगी समाधान अपने आप निकलेंगे आपको अधिक परेशान होने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि आप शुरू से अपने आप को एडजस्ट कर चुके होंगे जिस प्रकार का दायरा अपने जीने के लिए बनाया होता हैं उसका प्रयास आपके लिए रास्ते खोलता जाएगा, संयमित एवं सुखी जीवन बन जायेगा, अतः हमनें अपने आप पर विजय पा ली आवश्यकताओं के अनुरूप एक सीमा तय करके सन्तुष्ट हो गए तो वैभवशाली जीवन बन जाएगा


।।क्रमशः।।


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Saturday, January 14, 2023

आनन्द का जीवन

 आनंद जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य नही हैं यह बुनियादी जरूरत है आपके भीतर जो कुछ हो रहा है उसका आधार क्या है यह समझने की जरूरत है क्योंकि बहुत सारी सुख सुविधा पाने के बाद भी खुशहाली नही मिलती, खुशहाली तभी मिलेगी जब स्वयं को आप अपने हिसाब से इंजीनियर बना लेंगे, अपने भीतर कई रसायन होते हैं जिसमें आपने आनन्द वाला रसायन बना लिया तो आपकी समस्या होना खत्म हो जाएगा जब आपके अंदर कोई समस्या नहीं है तो बाहरी समस्या आपको प्रभावित नही कर पाएगी , अनुशासन जीवन में जरूरी होता हैं इसका मतलब यह नही होता कि हम कोई कंट्रोल करें हमें वो कार्य करना चाहिए जिसकी हमें जरूरत है किसी भी स्थिति में जो जरूरी हैं वो फैसला लेने की हममें काबिलियत होना चाहिए , हम हमारी पसन्द ना पसन्द से परे जाकर वो कार्य करते हैं तो उसी चीज की दुनिया में जरूरत है , स्थिति के हिसाब से चलने से न केवल परिस्थितिया सुंदर बनेगी बल्कि हमारे विकास का भी कारण बनेगी शान्ति के पल हमनें कितने जिये हैं वो आनन्द हैं खुशहाली हैं क्योंकि खुशहाली कोई लक्ष्य नही होता खुशहाली तो एक माप हैं खुशहाल का मतलब आप एक सहज है, खुशहाल का अर्थ यह नहीं आप कुछ पाना चाहते हैं और वो आपको मिल जाए, जीवन में सहज होना ही खुशहाली हैं, अतः खुशहाल रहने के लिए आवश्यकताओं के अनुसार चले न कि इच्छाओं के अनुसार साधनों में आवश्यकताओं का तालमेल बिठाते हुए आगे बढ़ना चाहिए इच्छाए तो अनन्त होती हैं।।क्रमशः।।


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Friday, January 13, 2023

मन में दृश्य बनाकर सोचे

 आत्म वार्ता से व्यक्ति अपनी मानसिकता को सही दिशा में ले जा सकता है, लेकिन प्रश्न यह है कि आत्म वार्ता हम किस प्रकार की करते हैं आत्म वार्ता मन की गति से होती हैं जैसे हमारे मन में विचार आएंगे उसी के अनुकूल वो चिंतन होगा मनन होगा और अवचेतन मन प्रभावित होगा इसलिए अपने आप से वार्ता करते समय सकारात्मक सोच से किसी दृश्य को बनाकर समझने का प्रयास करें आप सदैव मन  मस्तिष्क को स्वस्थ रख पाएंगे अच्छे विचार उर्जा देते है औऱ बेहतर परिणाम की ओर अग्रसर होते है, जैसे रामायण का दृश्य सोचकर राम के शब्दों को मनन करने से वैसे विचार आएंगे, जिससे जीवन में मर्यादा स्थापित होगी, दृश्य से समझने में सरलता आती हैं हम रोज बाजार जाते है और हमारे बैग में कोई चिट्ठी पड़ी हैं जिसे हमे पोस्ट बॉक्स में डालना हैं लेकिन भूल जाते हैं तो घर से निकलते समय पोस्ट बॉक्स का चित्र बनाकर जाएं जिससे पोस्ट बॉक्स आते ही हमें याद आ जायेगा या हमारा दिमाग बाजार जाकर पोस्ट बॉक्स को ढूंढेगा क्योंकि जब हम पढ़ना लिखना सिखे तब दृश्य के माध्यम से सिखे हैं अनार का चित्र देखर उसका पहला अक्षर 'अ'  आम का दृश्य देखकर पहला अक्षर 'आ' इसी प्रकार वर्णमाला को सीखा गया, समाधान का सरल उपाय हैं यह क्योंकि चेतन मन हमारी एक्टिविटी हैं और अवचेतन मन दृश्य हैं , अतः दृश्य के माध्यम से हर क्षेत्र में हम सफल क्रिया कर सकते हैं चाहे मानसिक स्थिरता हो या आर्थिक आजादी तथा शारीरिक व्याधियां भी इससे दूर हो सकती हैं ।। क्रमशः ।।


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समझ शक्ति का आभास कब से

 समझ शक्ति का आभास मनुष्य के जन्म से पहले गर्भ काल के दौरान ही आने लगता हैं, इसलिए हमारे शास्त्रों में गर्भ संस्कार की परम्परा हजारों सालो से ऋषि प्रदत्त प्राचीन परंपरा का मुकुट मणि जैसा विज्ञान हैं, इसके कई उदाहरण अतीत के पन्नों में अनगिनत मिलेंगे, दुनिया में हर जीवन का एक चक्र होता हैं, मनुष्य के जन्म जीवन और अंत तक 16 संस्कारों का समय के साथ एक अलग महत्व है, सनातन धर्म में हमारे ऋषि मुनियों ने  मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिए संस्कारो का अविष्कार किया, धार्मिक दृष्टिकोण से ही नही वैज्ञानिक तौर पर संस्कारो का बड़ा महत्व है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण गर्भ संस्कार माना गया है, महिला का गर्भवती होना आसान है लेकिन एक आदर्श माँ बनना थोड़ा मुश्किल है होने वाला बच्चा उस माँ का स्वाभिमान हैं माँ की ताकत है देश का भविष्य हैं उसके लिए केवल डॉ की सलाह लेकर कैल्सियम,मैग्नीशियम, आयरन ही नही इसके अलावा भी उसकी कोई पुकार होती हैं जिसे समय के साथ पुरा करना हमारा कर्तव्य हैं कि जितना खयाल हम उनको मेडिकल व्यवस्थाओं से देते है उतना हमें संस्कार रूपी शीतल वातावरण से भी देना चाहिए जिससे आने वाली सन्तान बल, बुद्धि, संस्कृति और संस्कार की जो चाहत है उसे उसका वट वृक्ष गर्भ में ही स्थापित हो जाए जिससे कर्म वीर, महारथी सन्तानो को मातृत्व प्रेम का प्रतीक बनायें, हमारी सबसे बड़ी पूंजी को गर्भ में ही सक्षम बनाए अतः गर्भ में पल रहे बच्चों को अपनी नियति पर न डालें  कि बच्चा जैसा होगा अपने संस्कारो से हो जाएगा उसे एक श्रेष्ठ मां का कर्तव्य निभाते हुए श्रेष्ठ सन्तान को जन्म दे।। क्रमशः।।


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Thursday, January 12, 2023

शिक्षा का अर्थ किताबी ज्ञान नही

 किताबी ज्ञान एवं व्यवहारिक ज्ञान दोनो का महत्व है अपनी-अपनी जगह होता है, लेकीन केवल पुस्तकों का  ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता है,चाहे व्यक्ति नौकरी करें या व्यवसाय अनुभवों की पराकाष्ठा हर क्षेत्र में चाहिए,  पढाई का महत्व एक सिमित क्षेत्र तक निहित होता है, लेकिन व्यवहारिक क्षेत्र का विस्तारण अपूर्ण होता है, किसी भी क्षेत्र में नौकरी करने के लिए सिमित दायरे में पढ़ाई करनी होती है जहां तक ​​उस क्षेत्र का किताबों में संकलन होता है, लेकिन किताबों के दायरे के अलावा जीवन के हर पहलुओ का अनुभव हमें व्यवहारिक ज्ञान से ही मिलता है, जिसका दायरा असीमित होता है कि विद्यालयों की शिक्षा सहायक हो सकती है  वास्तविक ज्ञान है तो हमारे आस-पास के माहौल और आत्म चिंतन से ही प्राप्त होता है हमारा श्रम ही हमें सब कुछ सिखाता है चाहे मानसिक श्रम हो या शारीरिक श्रम, हमारे प्रचन्ड पुरुषार्थ का परिणाम हमारे रास्ते तय करता है और दक्षता प्रदान करता है जिन  रास्तो को तय करने के लिए हमने परिश्रम किया होता है, किताबी ज्ञान हमें डीग्री धारी बनाता है लेकिन सफलता का सूचक तो व्यवहारिक ज्ञान ही होता हो डीग्रीयाँ हमें किसी भी क्षेत्र में नौकरियां दिलवा सकता हैं लेकिन उस नौकरी के पद का निर्वहन हमारे व्यवहारिक ज्ञान से ही सम्भव होता है जहाँ व्यवहारिक ज्ञान की कमी होती है वहां दुनियां की डिग्रीयां शुन्य हो जाती है, हमारी योग्यता से कार्य करने का निर्णय तो हम स्वयं लेते हैं,, किसी सरकारी नौकरी या प्राईवेट नौकरी करना तो उस विभाग का दायरा या अंको की श्रेष्ठतम सीमा तय करेगी लेकिन किसी पाइन्ट पर खड़े रहकर चलना शुरू करते है तो कोई सीमांकन नही होता, हजारो रास्ते होते हैं निपुणता हासिल करने के लिये, हमारी रुचि किसमें है हम कोई कार्य शुरु नही करते उससे पहले महसूस होता है ,, लेकिन हम सफलतम प्रयास में लग जाए तो जिस कार्य में सफलता मिलती है उसी में हमारी रुचि बढ़ने लगती है जब तक हम खड़े है भ्रमित है, चलना शुरु हुआ हुए तो हमारे अनुभव अपने आप रास्ते बनाते जाते है ,खड़े हुए को कोई नहीं पूछता चलते हुए के साथ कारवां खड़ा हो जाता है खड़ा वाहन पड़ा है, चलते वाहन में सैकड़ो बैठने आ जाते है । अतः मन रूपी वाहन को सही दिशा प्रदान करते हुए आगे बढ़ते रहे जीवन में किताबों के अलावा व्यवहारिक ज्ञान में अधिक सामर्थ्यवान बने।। क्रमशः ||

खुद का सामर्थ्य पहले जाने

 किसी अन्य को पहचाने की अपेक्षा खुद पर अधिक खोज करें , हमें क्या करना है और क्या नही करना इसका निर्णय हमें लेना है क्योंकि दुनिया में कौन क्या कर रहे हैं हमे कुछ नहीं पता हम किसी के बारे में  विस्तृत जानकारी नहीं दे सकते , वास्तविक जीवन के बारे में स्वयं से अधिक कोई नहीं जानता , हमें किसी की तारीफ से प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं , हम किसी की वास्तविकता को नही जान सकते इसलिए जानने का प्रयास भी नही करना चाहिए, हम अपने आप को कितना बेहतर बना सकते है उसके लिए प्रयास करना चाहिए, स्वयं के सामर्थ्य पर अध्ययन करने से ही परिणाम आएगा न कि अन्य व्यक्तियों की तारीफ करने या सुनने से, हमारे भविष्य का निर्धारण हम तय करते है दुसरो को दोष देना समझदारी नही होती, जहाँ से मार्ग भटक रहे हैं वही से सही दिशा चयन करना चाहिए, स्वयं को दूसरों के अधीन मत बनाओ अपनेआप को अन्य से बेहतर समझो कि मेरा पुरुषार्थ ही नया इतिहास रचेगा, कर्मयोगी ही स्वर्णिम अक्षरों में पंक्तिबद्ध होते हैं, हमारी पहचान हमें स्वयं को बनाना चाहिए , अपने और पराए अच्छे और बुरे के बखाण में नही पड़ना चाहिए क्योंकि स्वयं से अधिक स्वयं का कोई नहीं, समय रहते सम्भल जाते है तो हर कोई अपना बन जाता हैं और जो कल अपने नही थे वो आज अपने बन जाएंगे और हमारे नाम से उनकी पहचान बताएंगे अतः शारिरीक , मानसिक और आर्थिक संपन्नता पर अधिक कार्य करने से हम सबके और सब हमारे होंगे।।क्रमशः।।

Wednesday, January 11, 2023

गर्भ संस्कार से दिव्य सन्तान

 हमारे स्वर्णिम इतिहास से कुछ उदाहरण के माध्यम से गर्भ विज्ञान के बारे में जानते है कि गर्भ में पल रहे शिशु पर माँ की सोच, भावनाएं, व्यवहार एवं वातावरण का बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता हैं, राजा ऋतभध्वज की पत्नि सती मदालसा ब्रम्हज्ञानी और गर्भ विज्ञान की ज्ञाता थी, जिसने अपने 3 पुत्रों विक्रांत, सुबाहु और अरिदमन को गर्भ में ही ब्रम्हा ज्ञान की शिक्षा दी थी जिससे तीनो ही युवा अवस्था मे सारा जीवन लोक मंगल में लगा दिया और सन्यासी बन गए, अब महाराज को एक पुत्र राज्य के लिए उत्तराधिकारी बनाना था, तब रानी मदालसा ने गर्भधारण के 3 माह पूर्व से ही राजा एवं रानी ने शौर्य और साहस का अध्यन किया एवं शयन कक्ष को वीरता के प्रतीकों से सजाकर गर्भधारण किया और गर्भावस्था में ही राजनीति की शिक्षा एवं कुशल राजा के संस्कार दिए जिससे उनका पुत्र अलर्क पिता से अधिक प्रतापी राजा बना , राजा दुष्यंत और शकुंतला का पुत्र भरत को भी माता शकुंतला ने गर्भ में ही संस्कार दिए थे, जो बचपन में ही शेरो के साथ खेलते थे उन्ही के नाम से हमारे देश का नाम भारत पड़ा, इसी प्रकार जीजा बाई ने शिवा जी का, सीता ने लव कुश और ऐसी कई माताओं ने गर्भ में ही ज्ञान देकर प्रतापी एवं कुशल नेतृत्व करने वाले पुत्रों को जन्म दिया अतः गर्भधारण के साथ ही घर के वातावरण को अनुकूल बनाकर श्रेष्ठ सन्तानो को जन्म दिया जा सकता है।।क्रमशः।।

सन्तान में शिक्षा का उदगम

 संतान में जन्म के साथ ही स्वभाव में गुस्सा या शान्त  स्वभाव जो आता हैं वो बच्चा गर्भ में जन्म लेता है तब से माँ के आचरण से मिलना शुरू हो जाता हैं, गर्भ धारण के बाद बच्चा अपनी मां के आचार विचार उनके स्वभाव के अनुकूल बनने लगता हैं जिस प्रकार एक ऑडियो रिकॉर्डर किसी वॉइस को टैप करता है ठीक उसी तरह मां के मन में चल रहे विचार गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क में समाहित होता जाता है और जिस प्रकार मां अपने गर्भावस्था के दौरान जो सुनती समझती हैं आने वाली संतान उसी प्रकार की बुद्धि के विकास के साथ जन्म लेता है अतीत में इसका उदाहरण अभिमन्यु द्वारा चक्रव्यूह की जानकारी को सुभद्रा के नींद आने के बाद नही समझ पाना , तो हम समझ सकते हैं कि मां के मस्तिष्क के साथ गर्भस्थ शिशु का मतिष्क भी उसी अवस्था में काम करता है जैसे मां की चेतन अवस्था में बुद्धि विकारों से दूर रहे और अच्छा पठन - श्रवण करे तो शिशु भी उसी तरह सीखता जाएगा और ठीक उसी प्रकार बुरा विचार भी प्रभावित करेगा, इसीलिए तो मां को पहला गुरु कहा जाता हैं कि मां ही बच्चो के बुद्धि विकास में प्रथम उत्तरदायी होती हैं, इसके साथ ही जिस परिवार में गर्भस्थ स्त्री होती हैं उस परिवार में नौ माह तक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक वातावरण होना चाहिए जिससे होने वाली संतान तीक्ष्ण बुद्धि और विवेक शील हो, गर्भस्थ स्त्री को अच्छे वातावरण देने के जिम्मेदारी पूरे परिवार की होना चाहिए, जिस परिवार में अपनापन , प्रेम करुणा , शांत वातावरण होता है उस परिवार के बच्चे संस्कारी होते हैं क्योंकि उन बच्चों को गर्भ से लेकर जन्म के बाद समझ आने तक ऐसा माहौल मिलेगा तो बच्चे उसके अनुकूल हो जाते हैं और उसी दिशा में फिर आगे बढ़ते हैं अतः हम सब की जिम्मेदारी होती हैं कि किसी भी गर्भधारण की हुई स्त्री से अच्छा व्यवहार करे शालीनता से बात करें ताकि भावी पीढ़ी का अच्छा निर्माण हो।।क्रमशः।।

Tuesday, January 10, 2023

शिक्षा इतनी महंगी क्यों है

 शिक्षा इतनी महंगी क्यो हैं असल में देखा जाए तो इसका मुख्य कारण महंगे लोग शिक्षा में आ गए है , हमें बच्चों को एयरकंडीशनर बस चाहिए, एयरकंडीशनर रूम चाहिए, शानदार स्कूल का भवन , बैठने के लिए सोफे वाली कुर्सी भौतिक संसाधनों के साथ अंग्रेजी शिक्षा की प्राथमिकता देना चाहते हैं हमारी सन्तानों को , शिक्षा के मूल्यों का पता नही हमें अच्छे अंक चाहिए बच्चों के प्राइवेट स्कूल के साथ एक्स्ट्रा क्लास और ट्यूशन चाहिए जन्म से ही मशीन बनाना चाहते हैं इसलिए महंगी हो रही हैं शिक्षा... क्योंकि जब हमें सभी प्रकार की व्यवस्थाओं के बीच बच्चों को शिक्षा देना चाहेंगे बच्चों को तो एक एक ईंट में लगा पैसा अभिभावकों से ही लिया जाएगा उच्च ओहदे की कल्पना करते हैं हम बच्चों के लिए उच्च संस्कारो की बात नहीं सोचते यह जरूरी नहीं है कि भौतिक साधनों के बीच शिक्षा के साथ संस्कार भी मिले औऱ यह भी जरूरी नहीं कि इतनी सुविधा न मिलने पर हमारे बच्चों में प्रतिभा नही पनपे ,,सभी महंगे विद्यालय में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों में प्रेम और करुणा का अध्याय पठन हो यह निश्चित नहीं हैं,ज्ञान का जन्म भौतिक सुख सुविधाओं में नही होता... वह तो गुरुकुल में घास के तिनको से बनी दीवारों में भी जन्म होता था जहाँ से चाणक्य, विदुर जैसे नीतिकार महर्षि वाल्मीकि, दयानन्द सरस्वती जैसे प्रगाढ़ विद्वान, वाग्भट्ट पतंजलि जैसे महान वैद्य, कर्ण अर्जुन जैसे धनुर्धर योद्धाओं ने भी उन्ही घास की दीवारों में अध्ययन किया जिनकी जीवनी आधुनिक युग की बनी एयरकंडीशनर दीवारों में बैठकर पढ़ा जा रहा है अतः महंगी शिक्षा पाना महत्वपूर्ण नही है शिक्षा में हमनें पाया क्या है यह महत्वपूर्ण पूर्ण है।।क्रमशः।।

Monday, January 9, 2023

शिक्षा में भाषा का महत्व

 शिक्षा में भाषा का उतना महत्व नहीं होता जितना बुद्धि के विकास का होता हैं भाषा अनुवांशिक हिस्सा नहीं होता थोड़े बहुत प्रयास और लगातार संपर्क में रहने से भाषा को सीखा जा सकता है लेकिन संस्कार और संस्कृति को सीखने में व्यक्ति को समय लगता हैं,माहौल हर भाषा को सीखा देता हैं चाहे जिस राज्य की भाषा हो चाहे किसी देश की भाषा समझना सिर्फ इस चीज को होता हैं कि हमारे बुद्धि की तीक्षणता कितनी है हम समझ शक्ति कितनी रखते हैं हमारा जजमेंट पावर कितना तीव्र हैं हमारे अनुमान लगाने का समय कितना सही है, हमारी शिक्षा पद्दति समय के साथ परिवर्तन में आई हैं जरूरत पड़ने पर और आएगी वैकल्पिक व्यवस्थाएं जैसे जैसे सामने आएगी संशोधन होते जाएंगे लेकिन हमारे निर्यायक क्षमताओं को बढ़ाने का प्रयास हमें करना चाहिए यह सब मौलिक चिंतन से सम्भव है जिससे कही अविष्कार हुए हैं नई नई खोज हुई है, समय के साथ परिवर्तन और परिणाम आते रहे हैं, शिक्षा पद्धति का परिवर्तन तो समय के होता रहेगा लेकिन संस्कारो का पाठ पढ़ना हमारी परंपराओ का सही से अध्ययन करने का एवं समझने का काम तो हम कर सकते हैं चाहे जिस ओहदे पर रहकर कार्य करें, हमारे अनुशासन की व्यवस्था तो हमें बनानी होगी चाहे हम कर्म भूमि के किसी भी रोल का अदा कर रहे हो व्यवसायिक , नौकरी या कृषि अनुसंधान किसी भी क्षेत्र में हमारा विधिक हमें सही से बनाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी उन पद चिन्हों पर चले अतीत की प्रवृत्ति वर्तमान में पुनरावृत्ति हो और  नए अनुशासन का रूप लेकर भविष्य के गर्भ में स्थापित हो.... ऐसे महकते वातावरण को हमे तैयार करने हेतु प्रयास करना चाहिए।।क्रमशः।।

शिक्षक एवं शिक्षा

 शिक्षक एवं शिक्षा देश, दुनिया व समाज की रीढ़ की हड्डी होते हैं, हमारे देश के व्यवस्थापन में जिनकी अहम भूमिका रहती हैं उस शख्सियत का सुलझा पन होना हर प्रकार की समृद्धि  को स्थापित करता है क्योंकि शिक्षक वह कला कृति होते हैं  जो स्वयं प्रकाशित होकर दुसरो को भी प्रकाश देते हैं, शिक्षक के द्वारा ही देश के शासन व प्रशासन को चलाने वाले जन्म लेते हैं शिक्षक ज्ञान की उपासना करता हैं जहाँ ज्ञान की उपासना नही होगी वहाँ की जनता गँवार होगी, ज्ञान की उपासना से ज्ञान की गंगा बहती हैं उसी से देश के भविष्य का निर्माण होता हैं शिक्षक एक कुएं की तरह होता हैं जिससे संस्कारो की सिंचाई होती हैं जब कुएं में पानी कम होगा तो खेत सुख जाते हैं , फसलें मुर्जा जाती हैं इसलिए शिक्षक रूपी कुएं का गहरापन और शीतल होना आवश्यक होता हैं तभी गहराइयों का फायदा सबके लिए अनुकूल होता हैं, शिक्षा देने का तरीका जितना महत्वपूर्ण होता हैं उससे कहीं ज्यादा इसे ग्रहण करने की महत्ता होती हैं कथा भागवत,  भजन कीर्तन,वीर वीरांगना, डाकू अधर्मी, निर्दयी दयावान सभी शिक्षक द्वारा ही पैदा होते है शिक्षा का महत्व भी शिक्षक बताता है अनुभवों की गंगोत्री धरातल पर क्रियान्वयन गुरु के मार्गदर्शन में ही होती हैं, सभी कार्यशाला पाठशाला से उत्पन्न होती हैं शिक्षा से ही सभी का संगम होता हैं शिक्षक के बिना सब वीरान हो जाता हैं शब्दों का महासागर शिक्षक ही प्रदान करता है अतः महासागर में मंथन करते हुए अमृतपान करते रहना चाहिए।।क्रमशः।।

Sunday, January 8, 2023

शिक्षा एवं संस्कार

 शिक्षा एवं संस्कार दोनो अलग शब्द होते हैं जो दोनों हमें शिक्षक द्वारा प्राप्त होता हैं, बच्चों का विद्यालय जाकर केवल पाठ्यक्रम पढ़ना ही शिक्षा प्राप्त करना नही है पाठ्यक्रम तो एक माध्यम होता हैं शिक्षक द्वारा विद्यार्थियों में पाठ्यक्रम के माध्यम से उसके अंदर छिपी चेतना को जागृत करना ही सच्ची शिक्षा हैं और उस चेतना से संस्कारों को जोड़ना ही हमारी संस्कृति हैं, आधुनिक युग में अधिकांश रटन विद्या से पाठ्यक्रम तैयार करने का रट्टा लगा हुआ है जहाँ हमें वास्तविक शिक्षा का बोध नही हो पाता हैं वास्तविक शिक्षा तो संस्कारो के साथ हमारी संस्कृति का भान होना है इसके लिए हमारे आस पास का वातावरण अधिक जिम्मेदार होता हैं कि हम किस वातावरण में रह रहे हैं या हमे कैसा वातावरण मिल रहा है वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों का मानसिक विकास होता हैं और सही दिशा का निर्धारण होता हैं, आत्म चिंतन अच्छे माहौल से पैदा होता हैं और नया निर्माण भी उसी दिशा में कार्य करने से होता हैं जहां से इनोवेशन व खोज का उदगम होता हैं, जन्म के साथ कोई सीखकर नही आते जन्म के बाद में सब कुछ सिख मिलने लगती हैं अतीत ने भी हमें यही सिखाया है कि जन्म से कुछ वातावरण मनुष्य को एक ऐसी दिशा प्रदान कर देता हैं जहां नई खोज उत्पन्न होने लगती हैं यह उनकी क्षमताओं को समृद्ध एवं शक्तिशाली बनाने का कार्य अंतर्मन ही करता हैं लेकिन उस सम्पन्नता की जागृति लाने का प्रथम कार्य उनकी शिक्षा एवं संस्कार के साथ स्वयं की लगन से प्रतिभा निखरती हैं ।।क्रमशः।।

मोबाइल के सही मायने पार्ट 5

 मोबाइल के सही मायने पार्ट 5 में हम *शिक्षा का माध्यम* और *शिक्षित* होने की सही परिभाषा को समझते हैं कि शिक्षा हमें किन किन माध्यमों से मिलती हैं और वास्तविकता में हम शिक्षित कहेंगे किसे....हालांकि शिक्षा पाने की कोई उम्र नही होती लेकिन शिक्षा का पाना एक उम्र में जाकर हमारे आत्मसाद करने से आती हैं , शिक्षा का उदगम हमारे बचपन से होना शुरू होता हैं जहाँ से हमें सुदृढ एवं शक्तिशाली मानसिकता का निर्माण परिजन के द्वारा हमारे साथ हर चर्चा का विषय निर्धारित करता हैं कि बच्चों के द्वारा पुछे गए हर सवालों के जवाब हम किस तरह से देते हैं, खाली मानसिकता हर प्रकार के प्रश्न जानने की इच्छा रखता है जो  हमारी सन्तानो का बोलना प्रारम्भ होने से शुरू होने लगता हैं हमनें उन प्रश्नों को सुनकर उनका सही तरीके से जवाब देना शुरू कर दिया और अच्छी दिशा की ओर प्रेरित किया तो उस स्तिथि में भावी पीढ़ी का भविष्य मौलिक वातावरण की ओर अग्रसर होगा,,, अन्यथा मोबाइल पकड़ा कर उन्हें चुप कर दे या हमारे द्वारा मोबाइल में लगे रहने के साथ  उन्हें सही से जवाब देने के साथ परवरिश नही की तो बच्चों के भटकने की संभावना वही से बढ़ने लगती हैं अतः हमें बच्चों की बुद्धि के स्तर को समझते हुए उन्हें हर जवाब सटीक तरीके से दिया जाय और ऐसा ही जवाब उसके सम्पर्क में आने वाले हर मित्र, रिश्तेदार द्वारा दिलवाया जाय तो *शिक्षा का संचार होने लगेगा*...,, और शिक्षित भी वही है जो अच्छा शिक्षण पाकर *शिक्षा के द्वारा व्यक्तित्व निर्माण की बात करें असल में शिक्षित भी वही है* ।। क्रमशः ।।

Saturday, January 7, 2023

मोबाइल के सही मायने पार्ट 4

 मोबाइल के सही मायने पार्ट 4 में हम प्राचीन काल से आधुनिकता में आए परिवर्तन की बात करेंगे कि किस प्रकार से 5 वर्ष की उम्र से ही जीवन के मूल्यों को पहचाने का काम हो जाने लग जाता था... इस बाल्यावस्था में माता पिता उनके बच्चों को विद्याध्ययन हेतु गुरुकुल में भेज दिया करते थे जिससे बच्चों की मानसिकता को विकसित करने हेतु शारीरिक , मानसिक , आध्यात्मिक और आर्थिक विकास में किस प्रकार से बेलेंस बनाकर जीवन जीना चाहिए उन सब पहलुओं पर ज्ञानार्जन किया करते थे, अतीत में हमारे पूर्वज गुरुकुल भेजने से पूर्व घर पर 5 वर्ष की उम्र से पहले ऐसा माहौल देते थे जिससे उनकी सन्तानो को नई ऊर्जा का संचार हो , आजकल हम मोबाइल की दुनिया में जन्म के तुरंत बाद ही खिलोने के तौर पर मोबाइल पकड़ा देते हैं जिससे बच्चों को अलग दिशा मिलने लगती हैं, जिस प्रकार एक खाली पेपर पर हम जो चाहे लिख सकते है ठीक उसी प्रकार बच्चों के दिमाग की स्थिति भी वैसी ही होती हैं हम जैसे वातावरण के द्वारा जिस प्रकार की चाहे आदर्शता स्थापित कर सकते है, मोबाइल हमारी वो आवश्यक व्यवस्था है जिन्हें हम हर पहलुओं को ध्यान में रखकर समझाया जाएं तो उपयोगी सिद्ध हो सकता हैं लेकिन इस व्यवस्था को हम किस सन्दर्भ में समझाए यह मत्वपूर्ण विषय है, इस धरा पर व्याप्त ज्ञान के महासागर अज्ञानता से दूरी बनाकर रखना हमारे विवेकशीलता पर निर्भर करता हैं ताकि भावी पीढ़ी में सुगमता से ज्ञान का संचार हो।। क्रमशः ।।

मोबाइल के मायने पार्ट 3

 मोबाइल के सही मायने पार्ट 3 में हम जानेंगे कि आज हम शिक्षा और संस्कारों की दृष्टि से यदि मोबाइल का उपयोग करें तो मोबाइल एक बड़ी क्रांति ला सकता है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि मोबाइल का उपयोग हम किस सन्दर्भ में कर रहे हैं तो उस के अनुसार ही उसका उपयोग कर हम उन चीजों को ही देखे...क्योंकि मोबाइल में पूरे ब्रह्मांड की अधिकांश वस्तुएं और अनुभव समाहित हैं हमें सिर्फ उन्हीं चीजो को खोजकर हमारे जीवन में अपनाएं जो हमारे काम की है तो हमारे लिए उसकी सही मायने में उपयोगिता बनी रहेगी , बहुत बार हम यह तो समझ लेते हैं कि हमें किन अनुभवों को ग्रहण करना है लेकिन किनसे दूर रहना है उसे समझ पाना बहुत बड़ी चुनौती है, शिक्षा का सही से अध्ययन करें तो इसके द्वारा समाज एवं देश की तमाम बुराइयों का अंत अच्छी शिक्षा के माध्यम लाया जा सकता है, यदि हम मोबाइल को हमारा गुरु मानकर सिर्फ सही आंकलन करना आ गया तो हम हमारे जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं, इसका बीजारोपण हम प्रारम्भ से ही करते हुए आने वाली पीढ़ी को निश्चित उम्र के अंतराल तक उससे दूरी बनाकर रखें कि हम बच्चों को जब तक अच्छे बुरे का भान नही हो जाता तब तक मोबाइल को एक यंत्र की भांति उनसे दूरी बनाकर रखना चाहिए ताकि बच्चे किसी के कहने पर भी हाथ नही लगाए कि मोबाइल कोई आवश्यक काम की वस्तु है न कि मनोरंजन का साधन, मोबाइल एक निर्धारित उम्र के बाद ही आने वाली पीढ़ी को हाथ लगाने देना चाहिए जिससे हम उनमें हमारे जीवन के वास्तविक अनुभवों को साझा करते हुए उन्हें अच्छे माहौल देकर भावी पीढ़ी को संस्कृति का ज्ञान और संस्कारों का पाठ पढ़ा सके अन्यथा उनको किस मार्ग पर चलना चाहिए वह भान न होते हुए मोबाइल की दुनिया के द्वारा आने वाली पीढ़ी भटक जाएगी अतः हमें इस प्रकार के वातावरण को हमारे घर परिवार में बच्चों के साथ बनाना होगा ।। क्रमशः ।।

Thursday, January 5, 2023

मोबाइल के मायने पार्ट 2

 आधुनिक युग टेक्नोलॉजी का युग हैं जिसमें हमारे कम्प्यूटर, मोबाइल की हर व्यवसाय के लिए नितांत आवश्यकता है इन आवश्यकताओ के मध्येनजर हम हर पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इन वस्तुओं का इस्तेमाल करें तो यह हमारे लिए बहुत ही फायदे की वस्तुएं हैं

तो हम आज इसके उपयोगिता को पहले नकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करते हुए आगे बढ़ेंगे.....आजकल इस प्रकार के फैशन हर घर में बन गया है कि बच्चे को जन्म से ही इसके आदि बना दिया जाता हैं कि मोबाइल फोन की वह बिना कोई उसकी उपयोगिता को समझे बिना मोबाइल की चाहत बड़ी जिद्द के साथ रखता है उसका बड़ा कारण है कि जन्म से ही उसको रोते हुए को चुप करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल कर चुप किया जाता है कि इसमें यह देख बेटे, फोटो , वीडियो ऑडियो आदि कुछ दिखाकर उसका ध्यान केंद्रित करवाया जो एक बार नव जात शिशु चुप हो जाते हैं लेकिन वही आगे जाकर उन बच्चों को लत सी पड़ने लगती हैं, जो बच्चे मोबाइल की डिमांड कर चुप रहते हैं और रोने के हथियार को इस्तेमाल करते हैं और हमें उन्हें मोबाइल देना पड़ता हैं, वैज्ञानिक आधार पर इन पहलुओं पर गौर करें तो बुद्धि जीवी बताते हैं कि कम उम्र में बच्चों को मोबाइल की वास्तविक उपयोग की अनभिज्ञता अति नुकसान देती हैं जो कई बीमारियों का कारण बनती हैं.... तो आगे की पोस्ट में हम जानेंगे कि उसका किस प्रकार के निदान बच्चों को दूरी बना सकता है और कहा हम इसे अधिक उपयोगी बना सकते हैं,....।। क्रमशः ।। 

मोबाइल के सही मायने पार्ट 1

 हमारे देश में आजकल मोबाइल की दुनिया आने के बाद युवा पीढ़ी द्वारा अनावश्यक एवं अधिक प्रयोग से स्वभाव में परिवर्तन आ रहा हैं, और चिड़चिड़ापन भी आ रहा है हमे एक ऐसे मिशन को चलने की आवश्यकता है कि जिसमे हम बच्चो को जन्म से ही मोबाइल का कम से कम उपयोग हो और सिर्फ हमारे जरूरत के साथ ही उपयोग करे ऐसी आदत डालने का प्रयास करे ताकि हमे आर्थिक आजादी लाने के लिए कितना कारगर हो सकता है, इस पहल में प्रयास करे , क्योकि आज की नई युवा पीढ़ी कुछ तो इसका उपयोग कर इसके फायदे को ढूंढ कर इसका लाभ अर्जन करने में लग गए हैं और कई तो इसके दुष्परिणामो में उलझ रहे है। 

 आईये हम कुछ इसके फायदे और नुकसान को समझते हुए हमारे वास्तविक अनुभवों को क्रमिक साझा करते हुवे आगे बढ़ते है, जिससे हम इससे दुरी भी बनाये एवं साथ में इसके उपयोगिता को समझ कर इसका वास्तविक आंकलन करे कि हम कहा इसका लाभ ले सकते है और इंटरनेट की दुनिया का जो लाभ हमें लेना चाहिए उसका वास्तविक लाभ न लेकर हम अनावश्यक समय व्यतीत कर रहे है जिसका हमें शारीरिक , मानसिक एवं आर्थिक सभी नुकसान को समझे बिना अधिकांश समय मोबाइल पर ख़राब करते है उस फ्री समय को भी हम हमारे लिए कैसे  उपयोगी बनाये उसको भी हम समझने का प्रयास कर।।। क्रमशः ।। हर पोस्ट को पढ़े।।

Wednesday, January 4, 2023

डॉ प्रेमदान भारतीय

गुटका गुटका गैंग

ग्रामीण स्वास्थ्य और नोजवानों को बर्बादी से बचाने का साहित्यिक कर्म।।

आप यह पढ़कर हैरान हुये होंगे यह कौनसी गैंग है लेकिन चोंकिये मत जैसे देश में टुकड़े टुकड़े गैंग सक्रिय है न वैसे ही हर गांव में एक गैंग सक्रिय होती है जिसे मैंने गुटके गुटके गैंग नाम दिया है। गुटका राजस्थानी भाषा का शब्द है ।शराब से जुड़ा हुआ शब्द है। हिन्दी का घूंट राजस्थानी का गुटका आसपास है। खैर शब्दों की महामारी में न जाकर वेदना पर आता हूँ।
राजस्थान में जागीरदारी वाली जातियों के गांवों में जब कोई बीमार होता था तो उसे दवा दारू के रूप में छमक कर गुटका देने की बात कहीं जाती और कोई जमी हुई खांसी ठीक हो जाती थी ऐसी व्यापक मान्यता थी ।वही गुटका आगे जाकर कई लोगों के जीवन को बर्बाद भी करता था। खैर असली पीड़ा पर आता हूँ।
ये जो गुटका गुटका गैंग होती है वो हर जागीरदारी वाले राजसी जातियों के गांवों  में हर युग हर काल में हर उम्र में सक्रिय होती है जिसका मुख्य पुण्य का काम होता है घर के रुपयों से लोगों को नोजवानों को बच्चों को शराब की लत लगाने का सत्कर्म करती है। पहले पहले यह गैंग न पीनेवाले लोगों की मुक्त कंठ से सराहना करती है। बेचारे न पीने वाले इस गैंग की चपेट में तब आते हैं जब सराहना सुनने पीने वाली पार्टी में केवल बैठने का सामाजिक अपराध करते हैं।
फिर धीरे धीरे उन नोनिहालों को पास बिठाकर प्यार से अपनापन जताते हुए एक गुटका देते हैं वो अभागा नोनिहाल नहीं जान पाता कि उसकी बर्बादी की नींव का पहला पत्थर रख दिया गया है।
अब वो होनहार बच्चा धीरे धीरे गुटका गुटका गैंग के षड़यंत्र में फंस जाता है। अब उसे बोटी डालने के बाद उसके साथ कम उम्र का होते हुए शराब की दुकान पर भेजना शुरू करती है। गैंग के बुजुर्ग अपनी से दुगनी कम उम्र वाले बच्चों के साथ पीने की कुत्सित चाल चलकर लत लगाने में जब कामयाब हो जाते हैं अपने कुटुंब में खुशियां मनाते है। वो अभागा जीवन भर नहीं समझ पाता कि गुटका गुटका गैंग उसकी बर्बादी का कारण है।
इस गैंग में सरगना बदलते रहते हैं ।अपने जीते जी ही वे गैंग की योजना, गैंग का लक्ष्य गैंग का स्वरूप तय करते और विरासत सौंपते है। ये गैंग के सरगना अपनी वसीयत में लिखते है कि
" हमने अपनी सफलता के बाद किसी को सफल नहीं होने दिया,जैसे तैसे रोका, भटकाया, गुटके की लत लगाई पढ़ाई छुड़वाई,फेल किया या करवाया जैसे भी हो हमने अपना काम पूरी ईमानदारी से करते हुए 20 से 25 नोजवानों ,अधेड़ों को,बच्चों को गुटके की लत लगाई ।आज वे लोग खुद खरीदते है पीते है खाते हैं लगभग बेरोजगार है वे हमारे गुटके गुटके गैंग के ओजार है। अब आगे इस बर्बाद करनेवाली गैंग की परंपरा को तुम आगे बढ़ाना। अपने घर से भी साल भर पिलाना पड़े तो गम मत करना ,सस्ते में निपट जाओगे लेकिन गैंग का लक्ष्य मत भूलना। "
गुटके गुटके गैंग के सरगना की वसीयत के मुताबिक बरबाद करनेवाले सपोले भी ठीक वैसे ही नोनिहालों को, प्रतिभावान नोजवानों को,होनहार युवाओं को अपनी तनख्वाह के बर्बादी के वार्षिक तय बजट से सक्रिय रहकर घिनोना अपराध करते हैं।
  ऐसी गुटका गुटका गैंग जहां भी हैं उन गांवों से अच्छे खासे बच्चे शराब में डूबकर बर्बाद हो रहे हैं।इस गैंग को नोनिहाल पहचाने ,दूर रहे, पास बैठे नहीं, हेलो हाय भी न रखें वरना कब ये गैंग शराब मांस के चक्रव्यूह में फंसा कर बर्बाद करदेंगे  पता भी नहीं चलेगा।
पुनश्च में मुझे इतना ही कहना है।
गुटके गुटके गैंग से दूर रहना है।।

चाहते हो सफल होना ज़िन्दगी में।
गैंग के चक्रव्यूह से हमेशा बचना है।।

डॉ प्रेमदान चारण

डॉ प्रेमदान भारतीय

 मन की माया के जंजाल में फंसा हुआ है जीव।

सुख  की चाह  के जाल  में फंसा हुआ है जीव।।


'समझ' रूपी 'गुरु' ही मुक्त कराएगा मन -माया से। 

असंतोष अतृप्ति के बवाल में  फंसा हुआ है जीव।।


भोग सम्पन्नता धन सम्मान आत्मा को नहीं चाहिये। 

मृग तृष्णा के अनंत कमाल  में  फंसा हुआ है जीव।।


मन से मित्रता भली न दुश्मनी दोनों में जीव की हार। 

अपने  ही हाथों होता हलाल में फंसा हुआ है जीव।।


डॉ  प्रेमदान चारण

डॉ प्रेमदान भारतीय

 ।।रचियता: डॉ प्रेमदान चारण भारतीय।।

 

गुणवान हो धनवान हो दयावान हो चारण ।

देवी उपासक बने  तो न परेशान हो चारण ।।


 रहें जिस गाँव शहर में देश या राज्य में कहीं 

 चारण तत्व जीता चारण पहचान हो चारण ।।


   न हो गद्धार न  सांप्रदायिक चारण कभी भी 

   देव स्वभाव वाला   अच्छा इंसान हो चारण ।।


  दे लोग मिशाल जहाँ  चारण तत्व को सराहे 

  सत्य  कहने जीने में अलग पहचान हो चारण 


 हमने ही छोडी  अपनी संस्क्रति परम्पराए भी अपनी

 इस हालत पे न ज्यादा हैरान हो चारण ।।


दहेज ,टिका ,कुप्रथाए दुर्व्यसन अहंकार  छोड़े 

 देश  जाग्रति अनोखी निराली शान हो चारण ।।


 छोड़े न अपनी जाति गुण किसी भी कीमत पर ।

अन्याय असत्य के खिलाफ खड़ें  आन हो चारण ।।

डॉ प्रेमदान भारतीय

 आओ हम चारण होना सिध्द करें

भ्रमित युग को हम चारण प्रबुद्ध करें


युग के विकारों पर सच का प्रहार करें।

युग सुधारक चारणत्व का सत्कार करें।।

हर चारण स्व भूमिका पर विचार करें।

चारणत्व की खुशबू लिए व्यवहार करें।


सच की राह अपनाने को आबद्ध करें।

आओ हम चारण होना सिध्द करें।।1।।


जो भूला स्व कर्तव्य से उसको याद दिलाएं।

जो भटका सच की राह उसको राह दिखाएं।।

जिसने खोये राष्ट्रीय मूल्य उसमें ज्योत जलाएं।

सही अर्थों में क्रान्तिपुत्र हर चारण कहलाये।


युग को राह दिखाने की हम जिद करें

आओ हम चारण    होना सिध्द करें।।2।।


नेता प्रजा शिक्षक सैनिक सबको राह बताए।

युवा बाल वृद्ध नर नारी में राष्ट्र भक्ति जगाएं।

उम्मीद जगाएं नई पीढ़ी में आशा दीप जलाए।

चारण कर्तव्य निभाकर हम राष्ट्र उत्थान कराएं।।


हर चारण चाणक्य सम उच्च प्रारब्ध करें।

आओ हम चारण होना सिध्द करें।।3।।


राजनीति राह भूली नेता नीति छोड़ चुके।

युवा देशभक्ति की राह अकारण मोड़ चुके।।

राष्ट्रधर्म को मूर्ख साम्प्रदायिकता से जोड़ चुके।

राष्ट्रधर्म की गर्दन को भ्रष्ट कुकर्मी मरोड़ चुके।।


देश की हो उन्नति काव्य रच नवनिद्ध करें।

आओ हम चारण होना सिध्द करें।।


डॉ प्रेमदान चारण

डॉ प्रेम दान भारतीय

 घर घर में चारणाचार की बहार चाहता हूँ

देवजाति चारण में कुछ  सुधार चाहता हूँ


विद्वता वाणी विचार कर्म साहित्य में सत्य

सम्मानित चारण वो चारणाचार चाहता हूँ


अहिंसा मानवता सहिष्णुता दया और प्रेम

भारत में चारण के लफ़्ज़े एतबार चाहता हूँ


सियासत हुकूमत से टकराने का हो साहस

चारण में मुल्क जागृति की पुकार चाहता हूँ


न हों व्यसन नहीं हो दिलों में कोई संकीर्णता 

मेरे जीते जी चारण को  निर्विकार चाहता हूँ


दें चारण फिर हुकूमत को मशवरे पहले जैसे

हर चारण के दिल में सत्य का उभार चाहता हूँ


डॉ प्रेमदान चारण

समय का चक्र और संघर्ष की कहानी

जनयुग के प्रहरी में आप पढ़े 😊 समय का चक्र और अज्ञातवास की कहानी, संघर्ष की कहानी  समय का पहिया घूमता रहता है, और हमें अपने जीवन में कई बार ...