हमारे ब्लॉग जनयुग के प्रहरी "जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरणा और सकारत्मक भाव के आधार पर ब्लॉग में आप जीवन के हर पहलू पर आधारित लेख पढ़ सकते हैं, जैसे कि प्रेरणा, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत विकास, जैविक खेती संबधित जानकारी और जीवन के अनुभव। हमारा उद्देश्य आपको संघर्ष के साथ आगे बढ़ना और जीवन में नई दृष्टि प्रदान करना है और आपको अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना है।" धन्यवाद
Friday, December 29, 2023
अध्यात्म विज्ञान
Tuesday, December 26, 2023
मानव जीवन की उत्कृष्टता
Monday, December 25, 2023
हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए
Saturday, December 23, 2023
कठिनाइयां हमे सचेत करती हैं
Monday, December 18, 2023
अध्यात्मवादी बनो
Sunday, December 17, 2023
मिथ्या चिन्तन को त्यागें
Tuesday, September 19, 2023
कर्म से भाग्य बदलता है
Tuesday, August 29, 2023
अपना हैं ये भूल मत करना कभी
Tuesday, August 1, 2023
झूठ पर आवाज़ उठाना गलत नहीं है
Sunday, July 9, 2023
आदर्श विद्यार्थी का जीवन
Thursday, July 6, 2023
संतान के प्रति पिता का भाव
Monday, July 3, 2023
गुरु पूर्णिमा का महत्त्व
Saturday, June 24, 2023
AI टूल्स किसानों के लिए बनेगा हर पल मार्गदर्शक
Friday, June 23, 2023
टेक्नोलॉजी से हम कितना लाभ लें सकते हैं
Wednesday, June 21, 2023
क्या जॉब कम हो जाएगी ए आई टूल्स से
Sunday, June 11, 2023
बेटी का रिश्ता बाप के लिए बड़ी चुनौती
Tuesday, May 30, 2023
जीवन में हर जगह भावुकता काम नहीं आती
Saturday, April 22, 2023
जैविक खाद का सरल तरीका
Wednesday, April 19, 2023
जैविक खेती से दोहरा फायदा
Monday, April 17, 2023
पिता जीवन का आधार
Saturday, April 15, 2023
नेक विचार समाज को सुदृढ़ बनाता है
Wednesday, April 12, 2023
आईना सबसे बड़ा गुरु
Friday, April 7, 2023
प्रार्थना में ईश्वर के रूप का वर्णन क्यों
प्रार्थना में ईश्वर के रूप का वर्णन क्यों करते हैं क्योंकि जब हमारा मन हमारे आराध्य देव को याद करते समय उनके रूप और गुणों का बखान इसलिए करते हैं कि निराकार रूप साकार रूप में हमारे सामने आ जाता है हमारी आस्था और दृढ़ विश्वास बढ़ जाता हैं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है उसमें हम किसी कार्य को करते हैं तो उसमें बल मिलता है और सफलता प्राप्त होती हैं, हमें ताकत अंदर से ही मिलती हैं, जब हम स्वयं की ताकत को जागृत हेतु प्रयास कर रहे होते हैं तब हमे यह नहीं सोचना चाहिए कि कौन क्या कर रहा है सिर्फ़ स्वयं के चित्त में जाना चाहिए उपवास हम कर रहे हैं तो कौन नहीं कर रहा है यह जानने की जरूरत नहीं , भुख हमें हैं तो खाना हमे चाहीए समस्या हमारी हैं तो समाधान हमे ढूंढना होगा कितनी भी बड़ी समस्या क्यों न हो जब तक हम डट कर उसका सामना नहीं करते तब तक हम कोई भी उपलब्धि हांसिल नहीं कर सकते आप जितना आगे बढ़ेंगे आपका समस्याओं से सामना उतना ही होगा समस्याओं का सामना करने से वो छोटी हो जाती हैं और डर जाने से बड़ी हो जाती है हमे सदैव याद रखना चाहिए कि हम मन को ताकत देंगे उसमें प्रकृति भी हमारा सहयोग करती हैं ईश्वर सदैव साथ रहते हैं अतः निष्ठावान होकर हर कार्य को करने से समूचे समाधान का विकल्प हमारे सामने होता है जीवन को भक्तिमय बनाएं और सत्यता _ सरलता _ स्पष्टता अपनाए ईश्वर शक्ति हर पल आपके साथ रहेगी।।
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Thursday, April 6, 2023
मानवीय रिश्ते पूर्ण नहीं होते
मानवीय रिश्ते पूर्ण नहीं होते उसे सुरक्षित और प्रभावी बनाने पड़ते हैं उस पर लगातार काम करना पड़ता है क्योंकि कोई भी रिश्ता कभी विकसित नहीं होता सदा विकासशील होता है, सदैव उसे विकसित करने का प्रयास करना होता है क्योंकि जो रिश्ते बने हैं उसे खूबसूरत अभिनय में स्थान देना चाहिए, चाहे वो जीवन के किसी भी कैरेक्टर में निर्वहन कर रहे हो, शैक्षणिक जीवन, व्यावसायिक जीवन हों या पारिवारिक जीवन हों हर रिश्ते की अपनी गरिमा होती हैं मर्यादा होती हैं, पहले तो हमें यह समझना होगा कि कौनसा रिश्ता किस दर्जे का हैं उसके उस महत्व को समझ कर फॉलो करना होता है तब वो रिश्ते प्रगाढ़ बनते हैं, एक तो कोई आपके साथ रहना चाहता है यह अनोखी बात है और किसे यदि आपके साथ रहना पड़े यह एक मजबूरी होती है , मजबूरी से नहीं मजबूती से खड़े रहे ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास अनवरत होना चाहिए उसी में जीवन का आनंद है, इसके लिए आपको सबमें सर्वोत्तम बनना होगा , एक अच्छे पिता_माता, अच्छे पुत्र_पुत्री, अच्छे शिक्षक_विद्यार्थी ,अच्छे मालिक_एम्प्लॉय और अच्छे व्यक्तित्व के व्यक्ति बनने से रिश्ते अच्छे बनते चले जाते हैं अतः हम श्रेष्ठ बनेंगे तो सारे रिश्ते श्रेष्ठ बनेंगे यह प्रयास निरंतर करते रहना चाहिए यह कभी पूर्ण नहीं होते उस पर गंभीरता रखते रहना होता है।।
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Wednesday, April 5, 2023
परिवार में अपनो की महत्ता
परिवार में अपनो की महत्ता कितनी महत्वपूर्ण है यह गहनता से सोचने का विषय है न कि यह देखने का विषय कि दुनियां में क्या हो रहा है, कौन कितना प्रेम रख रहे हैं यह समझने का विषय नहीं होता सोचना वहां चाहिए कि हम कितना त्याग कर रहे हैं, पैसा तो शायद अकेले की मेहनत के परिणाम से आ सकती हैं लेकिन पुरे जीवन की मेहनत तो क्या कई जन्मों की मेहनत से कमाए धन से परिवार का प्रेम नहीं खरीदा जा सकता, हम हमारे लिए क्या कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण नहीं होता महत्वपूर्ण तो यह होता है कि हमने परिवार के लिए क्या किया , जब हमारा त्याग दिखता है तो हम पर परिवार का प्रेम बिखरता है प्यार की परिभाषा नए आयाम स्थापित करती हैं मन के उदगार फूटने लगते हैं अपने हम पर टूटने लगते हैं जीवन में वो सब कुछ मिलने लगता है जो हम चाहते हैं, दुनियां का स्वर्ग परिवार के आंचल में होता है, दौलत की छाया तो जितनी चाहोगे मिल जाएगी लेकिन अपनो के साए की कीमत नहीं लगा पाओगे, खरीददार तो मिल जायेंगे दौलत का ढेर लगाकर परन्तु बिकने को तैयार कोई नहीं मिलेगा अतः जिनके पास पैसा नहीं उनके एक ही समस्या है कि पैसे नहीं हैं लेकिन जिनके पास पैसा है उनको पैसों के अलावा सब समस्या है ... अपनो के साथ जिए न पैसों की दिक्कत आएगी और न ही किसी वैभव की दिक्कत।।
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Friday, March 31, 2023
सुझावों की हैं दुनियां समाधान की नहीं
सुझाव की हैं दुनियां समाधान की नहीं सदैव याद रखें हमारी किसी भी प्रकार की समस्या है तो उसका समाधान दुनियां के पास नहीं है, आप किसी को समस्या बताओं आपको कई सुझाव मिल जाएंगे लेकिन समाधान हेतु कोई नहीं आएगा समाधान तो हमें स्वयं को ही निकालना है तो फिर समस्या बताने से अच्छा है खुद समाधान में लग जाएं सुझावों की दुनियां में न उलझे, संभव है इससे हम भ्रमित हो जाएं क्योंकि समस्या एक होती हैं और समाधान के लिए सुझावों का ढेर लग जाता है जो कि हमे स्वयं को अधिक पता होता है कि समाधान क्या है सुझाव हल नहीं है, सिर्फ इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जीवन में एक समस्या को दोबारा जन्म न लेने दे जिससे ऐसे डॉक्टरों की जरूरत ही न पड़े जो बिना हाथ पैर की सैकड़ों सलाह देने वाले हमारे आस पास ही मिल जाते हैं जो कोई हमारा मित्र रिश्तेदार होता है या सीनियर जूनियर लेकिन वास्तविक सच्चाई यह है कि बहुत कम लोग होते हैं जो हमारी समस्याओं में सरीक होकर समाधान हेतु प्रयास करते हैं
हमारी जीवनशैली को किसी के अधीन नहीं बनाना चाहिए क्योंकि दुनियां सिर्फ़ स्वयं की होती हैं दिखावे में हम सब की दिखती हैं अतः ईश्वर की आस्था के साथ कर्म निष्ठता एवम् जीवन का अनुशासन हर क्षेत्र में होना आवश्यक है जिससे शारीरिक पीड़ा, मानसिक पीड़ा और आर्थिक पीड़ा किसी से भी नहीं गुजरना पड़े जीवन को सरल बनाएं सहजता आएगी।।
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Wednesday, March 29, 2023
रवि दर्शन सांदु
राजस्थान दिवस पर राजस्थान को प्रणाम और जय माता दी की
क्या लिखूं मैं कविता में राणा प्रताप की माटी को
त्याग समर्पण बलिदान कि पर्याय बनी परिपाटी को
चूंडा लेकर भीष्म प्रतिज्ञा सिंहासन ठुकराते है
भामाशा त्यागी बनकर भी अपना शीश झुकाते हैं
खण्ड खण्ड राणा सांगा ने हिंदू ध्वज फहराया था
तो पन्ना ने लाल कटाकर कुल का नाम बचाया था
गोरा बादल पद्मन की जहां अमर लिखी कहानी है
कण कण जिसके शौर्य पले वो माटी राजस्थानी है
जय जय राजस्थान
रवि दर्शन सान्दू अणेवा पाली
Wednesday, March 22, 2023
हिन्दू नव वर्ष की मान्यता
हिन्दू नव वर्ष की मान्यता सूर्य देव की पहली किरण के स्वागत के साथ शुरू किया जाता है और पश्चात देशों के अंग्रेजी कैलेंडर का नव वर्ष रात के अंधेरे में शुरू होता है, दोनों कैलेंडर में यह बुनियादी फर्क है एक में रात को 12 बजे शुरू होता है और एक में सूरज की पहली किरण के साथ शुरू होता है बहुत से देश ग्रेगोरियन कैलेंडर को नहीं मानते थे हमारे देश की तरह वो हिन्दू पंचाग को मानते लेकिन आज पश्चिमी देशों का यह कैलेंडर सभी मानने लग गए और हमारा देश भी व्यापार जन्म दिनांक आदि इसी पर आधारित हो गया जिसका न तो मौसम से न प्रकृति से हैं कोई लेना देना है और न ही तीज त्यौहार से जबकि हमारे हिन्दू कैलेंडर में ऐसा नहीं है भारत में दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति के लोग हैं और विक्रम संवत की शुरुआत भी चैत्र मास के इसी चैत्र प्रतिपदा से होती हैं ब्रह्म पुराण के अनुसार भी सृष्टि इसी दिन बनी थी और इसी दिन से भारतवर्ष में काल गणना भी शुरु हुईं थी हिन्दू कैलेंडर और ग्रेगोरियन कैलेंडर और हिन्दू कैलेंडर में कुछ बुनियादी फर्क बताते है ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत ईशा मसीह के जन्म से मानी जाती हैं और हिन्दू कैलेंडर विक्रम संवत 57 बीसी से मानी जाती हैं, जब महाराज विक्रमादित्य ने युद्ध में सकाज को पराजित किया था , हिन्दू कैलेंडर 2080 में प्रवेश कर चुका है और अंग्रेजी कैलेंडर में 2023 चल रहा है भारतीय कैलेंडर की गणना सूर्य और चंद्रमा से होती हैं जबकि ग्रेगोरियन कैलेण्डर पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के अनुसार चलता है पृथ्वी सूर्य के एक चक्कर 365.25 दिन में लगाती हैं इसलिए 365 दिन में एक वर्ष होता है और हर चार साल में एक लीप ईयर होता है ग्रेगोरियन कैलेण्डर सिर्फ तारीखों पर चलता है जिससे यह पता चलता है कि महीना चेंज हो गया है या नया साल आ गया है जबकि हिन्दू नव वर्ष में पूरी प्रकृति भी नवीनता का एहसास कराती हैं कि नव वर्ष आ गया है पतझड़ होकर प्रकृति अपने श्रृंगार की प्रक्रिया में होती है मानो पूरी सृष्टि में ही नयापन आ गया हो, अग्रेजी नव वर्ष की शुरुआत पार्टी से होती हैं तो हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत त्यौहार की ऊर्जा के साथ मनाते हैं इस पूरे देश में अलग अलग नाम से जाना जाता है इस दिन कश्मीर में नवरोज, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उगादी, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, केरल में विशू और पंजाब में बैसाखी के त्यौहार के साथ शुरु होता है अतः हमारे देश में हमारी संस्कृति से जुड़ा नव वर्ष को मनाए यह प्रकृति के डीएनए से जुड़ा पर्व है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को से नव वर्ष के साथ जीवन में नवाचार लाए।।
पढ़ते रहे अपने ब्लॉग को #जन युग के प्रहरी अब जाग चुके हैं
Tuesday, March 21, 2023
भारतीय नववर्ष का महत्व
भारतीय नववर्ष का महत्व समझे कि हमारे पर्व, हमारी संस्कृति हमारा संस्कार क्या कहता है हमारे त्यौहार, हमारी तिथियां सब पश्चात संस्कृति से जोड़ दिए गए जिसकी गणना अंग्रेजी तारीखों से की जाने लगी है, हमारा नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होता है, हमारे शुभ मुहूर्त, विवाह आदि तिथियों को देखकर किए जाते है, लेकिन हम पश्चात संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं तिथियां कम याद रहती हैं तारीखे अधिक जिसका अधिक कारण यह मोबाइल जो कि विशेष प्रयोजन के लिए बनाया गया है लेकिन जन्म से ही बच्चो को थमा दिया जाता हैं एप्पल कम्पनी के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने बिल क्लिंटन से पूछा कि आपके परिवार में कितने फोन है तो उन्होने कहा कि परिवार में जितने मेंबर उतने फोन, लेकिन स्टीव जॉब्स ने कहा कि मेरे घर में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कोई मोबाइल को छूता तक नहीं क्योंकि स्टीव जॉब्स ने कहा मैने इस मोबाइल को बनाया हैं मैं अधिक समझता हूं इसके बारे में जब तक मैच्युरिटी नहीं आती इसकी उपयोगिता समझ नहीं आएगी, आधुनिक तकनीकी को हमे समझ से पहले इस्तेमाल नहीं करना चाहिए , हमारी संस्कृति को हमे सदैव याद रखना चाहिए हर वार तिथि, पर्व जो हमारी सनातनी संस्कृति में बने हैं उसके पिछे तार्किक और वैज्ञानिक आधार हैं हमे सदैव याद रखना चाहिए समझना चाहिए, हमारे शरीर में 80% पानी की मात्रा होती है जो तिथियों के आधार पर प्रभावित होती है,जब पूर्णमासी होती हैं तो पानी ऊपर चढ़ता है और जब अमावस्या आती हैं तो पानी नीचे उतरता है बुद्धि का बैलेंस खराब हो जाता हैं इसलिए अमावस्या को छुट्टी रखी जाती हैं, जितनी भी यांत्रिक दुर्घटनाएं होती हैं वो सब अमावस्या को होती हैं क्योंकि चन्द्रमा दिखता नहीं है तो शरीर में निष्क्रियता आती हैं दुर्घटनाएं बढ़ती है अधिकांश भूकंप अमावस्या के आस पास आते हैं 2,4 दिन पहले या बाद आता है, हिन्दू कलेंडर को सदैव याद रखें हर तिथि पर्व का अपना महत्व है अतः हमारे हिन्दू वर्ष चैत्र प्रतिपदा को प्रारंभ होता है और हर दिन, माह और त्योहारों के पिछे समय के साथ लॉजिक हैं स्मरण रहे।।
नववर्ष की अनंत कोटिशः बधाई
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Monday, March 20, 2023
अपनी कहानी खुद लिखों
अपनी कहानी खुद लिखों वातावरण तुम्हे किसी भी दिशा में ले जा सकता हैं लेकिन तुम्हे ही समझना होगा कि जिस दिशा में तुम्हारा अतीत का समय निकला वो तुम्हारे लिए कितना उपयोगी है, क्योंकि अब तक जो हुआ वो तुम्हारे हाथ में नहीं था लेकिन वर्तमान तुम्हारे हाथ में है, जिस विद्यालय में तुमने अध्ययन किया उसका चयन तुमने नहीं किया, जो दोस्त तुम्हे मिले वो संयोग था, तुम्हारी समझ ऐसे माहौल से आई जिस माहौल में तुम रहे, वो माहौल तुम्हे मिला वो सम्पूर्ण तुम्हारा अपना निर्णय नहीं था.. हां उस माहौल से चयन तुमने किया कि किसे पसन्द करू लेकिन तब विकल्प तुम्हारे पास सीमित थे जब हमारी समझ यह निर्णय ले सकती हैं कि हमें किस वातावरण में रहना चाहिए इसके बाद तो हर उस क्षण के जिम्मेदार हम है जिस संगति में हम रह रहे हैं यह जरूरी नहीं होता कि हमारा अतीत ठीक नहीं था तो भविष्य भी ठीक नहीं होगा वर्तमान को सुधार लेंगे तो भविष्य उत्तम बन जाएगा यह पक्का है क्योंकि हम अब तक किरदार निभा रहे थे और अब हम चाहें तो कहानीकार बन सकते हैं, किरदार के हाथ में सिर्फ लेखक द्वारा लिखित बात को फॉलो करना होता है जैसे कि हमें जो वातावरण मिला उसके अनुरूप हम बने अब हम जो वातावरण बनाएंगे उसके अनुरूप लोग बनेंगे अतः हम एक अच्छा लेखक बने ताकि हमारे जीवन की कहानी को हम बेहतर तरीके से लिखें जिसे हम और हमारे साथ कनेक्ट होने वाला हर किरदार अपनी अलग पहचान बनाएं।।
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Sunday, March 19, 2023
प्रतिदिन एक कार्य करें
प्रतिदिन एक कार्य करें जो आपको लगना चाहिए कि यह कल से भिन्न हैं लेकीन वो हर दिन अलग होना आवश्यक है कि आज मैने वो त्रुटि सुधार की जो कल मुझमें थी, यदि आप निरंतर ऐसा करते हैं तो आपका जीवन सुखमय होगा चाहे उस समय आप जीवन के किसी भी हिस्से में खड़े होकर देख रहे हो, वो आर्थिक व्यवस्था का भाग हो या पारिवारिक जिम्मेदारी या फिर समाजिक दायित्व निभा रहे हो हर पल आनन्द महसूस करोगे, हमारा प्रयास परिवर्तन के साथ कनेक्ट होकर भूल को सुधारने की दिशा में होना चाहिए उक्त किसी भी हिस्से में जीवन व्यतीत कर रहे हैं हमारा परिणाम सकारात्मक होगा, बेहतर प्रयास बेहतर परिणाम लाते हैं हमने किसी की कमी को देखकर जीवन नही जीना चाहिए हमारी गलती को देखकर समझना चाहिए कि क्या हम जैसे है उससे अधिक बेहतर कैसे बने क्योंकि दूसरो की कमियां देखने जाएंगे तो हर पेड़ पोधे फूल पत्तियां खूबियों को लेकर खड़ी है लेकिन उनकी जड़ों में कई गन्दगी भरी होती हैं फिर भी उनमें महक होती हैं, हमे रूपांतर की प्रक्रिया से गुजरना चाहिए क्योंकि यही जीवन का स्वभाव है जिसे हमे अच्छी तरह से देखना होगा, धरती की हर दूसरी चीज रूपांतर की प्रक्रिया में है हम इन प्राकृतिक चीजों को समझते हुए आगे बढ़ेंगे तो हम सही दिशा में चल रहे हैं अन्यथा हम कही भटक रहे हैं अतः आप किसी दूसरे प्राणी से बेहतर नही कर पा रहे हैं तो आपका जीवन सार्थक नही है मनुष्य जीवन बहुत महंगा जीवन हैं क्योंकि खाने, पीने, सोने, बैठने चलने फिरने और पहनने के लिए बहुत सारी चीज़ें आवश्यक होती हैं लेकिन हमे जीवन के प्रति सदैव संवेदनशील बनना चाहिए ताकि हम हर संभव प्रयास का हिस्सा बने जिससे हमारा जीवन सुखमय और आनंदित बने।।
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Monday, March 6, 2023
स्वतंत्र सोच बनाना कठिन
स्वतंत्र सोच बनाना कठिन हैं क्योंकि हमारा चेतन मन हमारे अवचेतन मन के अधीन होता हैं, हमारी सोच हमारे आस पास के वातावरण पर निर्भर करता हैं, यदि हमनें उन चीजों को समझ लिया की हमें वो करना चाहिए जो हमारे लिए सही है उसके लिए हम हमारी स्वतंत्र सोच बनानी होगी जिसके लिए हमें आत्म चिंतन और हमारे इर्द गिर्द वातावरण को पूर्णतया विवेकशीलता से समझना आवश्यक होता हैं, हमारी सोच और आगे की क्रमिक प्लानिंग को लोग उनके विवेक से बदल देते हैं क्योंकि हमारे सोच को बदलने का काम वो लोग कर सकते हैं जहां हम उनकी योजना के अनुरूप चलने लग जाते हैं वो हमारे दिमाग में ऐसी विचार धाराओं से तैयार कर देते हैं कि हमारा मन मस्तिष्क उनकी सोच के साथ चलने लग जाता हैं और हमारे द्वारा वो ही कार्य करवाया जाता हैं जो वो लोग चाहते हैं, जिसका उदाहरण माइंड रीडर हमारे साथ प्रेक्टिकल कर के बताते हैं और हमारी सोच उनके अधीन होकर काम करने लगती हैं, जीवन में बहुत बार ऐसा कई लोगो के साथ होता हैं जहां उनकी निर्णय क्षमता को छिन्न भिन्न कर देते हैं और व्यक्ति हताष होकर असफलता का मार्ग प्रसस्त हो जाता हैं अतः जीवन में अच्छे मुकाम को पाना चाहते हैं तो हमारे मन को स्वतंत्र रूप देकर निर्णय शक्ति को सुदृढ़ बनानी चाहिए ताकि कोई भी हमारे सफल मार्ग में बाधा नहीं बनें और जीवन में आर्थिक आजादी के साथ सुकून का जीवन व्यतीत करने का सफल प्रयास कर सकें !!
पढ़ते रहे ब्लॉग जन युग के प्रहरी
Wednesday, February 22, 2023
कुछ नया करने के लिए सोचे
कुछ नया करने के लिए सोचे कि हमें क्या करना चाहिए कहने के लिए साधारण बात है लेकिन सफलता के लिए कुछ नया करने जाना एक बड़ी चुनौती है , हम नया तो करना चाहते हैं लेकिन क्या करना चाहिए किस प्रकार से करना है हमारे जीवन के जोड़े हुए अनुभवों को कैसे पंक्तिबद्ध करके हमें नया सोचना है यह बड़ा विषय है यदि हमें नया करना है तो हमारा अनुभव हमें वो सारी चीजें दे चुका होता हैं जो हमनें आज तक किया है, लाभ हानि व्यवसायिक जीवन के उतार चढ़ाव जो सब देख चुके हैं वो हमें नए व्यवसाय के साथ अप्लाई करना होगा तब हम नया कर पाएंगे क्योंकि कुछ अलग करना अपने आप मे एक इतनी बड़ी चुनौती है कि कोई भी उसे स्वीकार नहीं करेगा चाहे वो आपके मित्र रिस्तेदार हो या हमेशा आपके साथ रहने वाले हमारे समीपस्थ लोग ही उसको नकारेंगे लेकिन जब तक आप यह दृढ़ संकल्प नही लेंगे कि आप किसी की परवाह किए बिना अपना रिमोट को स्वयं के पास रखकर नया करने जाओगे तभी शुरुआत होगी दुनिया कभी नहीं चाहेगी कि तुम नया करो या बड़ा करो हमारी सफलता में सबसे अधिक जिम्मेदार हम स्वयं होते हैं इतिहास के पन्नों पर लोगों ने हमेशा टांग खिंचाई की है अतः खुद को बेहतर बनाने का तरीका यही है कि अपने अनुभव से निर्णय लेने के बाद इमारत को गढ़े न कि दूसरे के नकारात्मक विचारों से नरवश होकर हमारी गति को विराम देकर थके नयी सफलता का आयाम तभी सम्भव है जब हम बिना रुके , बिना थके, निरन्तर हमारे प्रयास में लगे रहे तो सफलता के सदैव सफल प्रयास होंगे।।
पढ़ते रहे ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी
Tuesday, February 21, 2023
शुध्द खान पान से शुद्ध विचार
शुद्ध खान पान से शुद्ध विचार आते हैं आधुनिक युग में हमारे विकारों का मुख्य कारण हमारा खान पान हैं हम जैसा खाया अन्न वैसा रहे मन और जैसा खाया अन्न वैसा रहे तन, अन्न शुध्द होगा तो तन स्वस्थ्य रहेगा और तन स्वस्थ्य तो मन स्वस्थ्य, हमारा देश कृषि प्रधान देश है जिसमें अधिकांश उत्पादन किसानों द्वारा प्रेस्टिसाइज उपयोग करके किया जाता हैं पहले वातावरण में शुद्धता थी तो लोगो के विचारों में शुद्धता थी पूर्ण रूप से जैविक तरीके से खेती हुआ करती थी जहाँ यूरिया डीएपी जैसी कोई खाद था, प्राकृतिक बीज से कृषि उत्पादन हुआ करता था आज हम अतीत को भूल गए जैविक खेती के तरीके भूल गए शुध्दता का स्वाद नही पता परख के नाम पर शुद्धता की जानकारी नहीं पाश्चात संस्कृति ने हमें बहुत कुछ भुला दिया पुनः हमे हमारी संस्कृति और संस्कारों की ओर आना पड़ेगा , हमने कृषि अनुसंधान में विकल्प खो दिए जो अतीत में नीम और गाय के गोबर से खेती हो जाया करती थी लेकिन वो ही पुराने प्रकल्प तैयार करने होंगे जिससे हम आपस में ही एक दूसरे की मदद खेती उत्पादन में किट नाशक और फसलों की ग्रोथ में लिया करते थे जिससे हमारी फसल वर्तमान समय से अधिक उत्पादन होता था, आज हम हमारी धरती माता को खाद बीज से खराब कर रहे हैं और हमारी पुरानी पद्धति का दोहन हो रहा है, हम जैविक कृषि करेंगे तो पैदावार शुध्द होगी जब शुध्द पैदावार होगी तो हमें शुद्ध खान पान मिलेगा और शुध्द खान पान से हमारे विचारों में शुद्धता आएगी हमारी वाणी मधुर होगी जिससे वातावरण में मधुरता फैलेगी सैकड़ों बीमारियों जड़ से खत्म हो जाएगी अतः हमारे शुद्धता के सेवन से विचार शुद्ध होंगे और शुध्द विचारों की महक प्रवाहित करेंगे।।
पढ़ते रहिये ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी
Monday, February 20, 2023
परेशानी में धैर्य
परेशानी में धैर्य और बुद्धिमता की आवश्यकता होती हैं, परेशानी किस प्रकार की है और उसका मार्ग किन प्रयासों से हो सकता हैं उस समय सिर्फ वो ही प्रयास किया जाय तो सम्भवतः समस्या दूर होगी हम किसी भी विसम परिस्थिति में मनः स्थिति खो देते हैं तो हमारे निर्णय भी गलत होने की संभावना बनती हैं , हमारे विवेक हमारी परिस्थितियों को मोड़ दे सकता हैं यदि हम हमारी सोच सही मायने में लेकर चले तो माहौल भी हमें सही निर्यायक स्थान पर ले जाएगा और सही दिशा मिलेगी तथा हम विपरीत परिस्थितियों से बाहर आ जाएंगे, जब कोई परेशानी आती हैं तो हमें यह समझना चाहिए कि ईश्वर हमारी परीक्षा ले रहा हैं और उस परीक्षा में बहुत ही सहजता से उतीर्ण होना है ताकि किसी जीवन में सरलता बनी रहे, यदि हम कभी विकट परिस्थिति में हम विचलित नहीं होंगे तो हम कभी दुःखी हो ही नहीं सकते क्योंकि दुःख और सुख हमारे अनुभवों में छुपा होता हैं, हमारे मन की दिशा को भटकने नही देंगे तो जीवन सुखमय होगा अतः हमारे जीवन में मधुरता लाने के लिए शान्त और शिथिल मन के साथ अनुभूति परिस्थितियों के अनुकूल बनाकर जीने से परेशानी मुक्त जीवन का आनंद अनुभव होगा।।
पढ़ते रहे ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी
Thursday, February 16, 2023
प्रार्थना और प्रयत्न दोनों साथ चलते हैं
पुरुषार्थ के बिना कुछ नहीं हम भाग्य के भरोसे सब कुछ छोड़ दें कि हमें सब कुछ मिल जाएगा तो कुछ नहीं मिलने वाला हमेशा प्रार्थना एवं प्रयत्न दोनों साथ चलते हैं जब हम यह सोच रहे हैं कि हमारे भाग्य की वस्तु हमें स्वतः मिल जाएगी तो यह हमारी भूल है बिना श्रम के कुछ भी नहीं मिलता चाहे हम कितना ही भाग्य को कोसे श्रम हमारी सफलता की अहम भूमिका है, बहुत से लोग ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञ के पास जाते हैं शनि ग्रह के प्रकोप हैं राहु केतु का साया हैं हमें 6 महीने और रहेगा साल भर और रहेगा कितना भी कर ले समस्या रहने वाली हैं ..... यह सब बातें कर्महीन लोगों की है, विद्वान बताते हैं फलित ज्योतिष सौ प्रतिशत सत्य नही होता, 6 माह साल भर क्या हमें 1 पल भी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए कर्म प्रधान होता हैं प्रार्थना दैनिक जीवन को ऊर्जा प्रदान करता हैं ईश्वर की आस्था के साथ प्रयास करना चाहिए शुध्द वातावरण में रहना चाहिए ताकि मन और धन की शुद्धि के साथ स्वस्थ समृद्ध जीवन जीने का अवसर मिले, जब हम शुद्धता के साथ पूरी ईमानदारी और मेहनत से जीवन जिएंगे तो हमें कोई परेशानी नही आएगी अतः जीवन को सुखद बनाने के लिए श्रम के साथ ईश्वर में श्रद्धा रखने से ऊर्जा का संचार बढ़ता जाएगा सफल जीवन के दोनों मंत्र *प्रार्थना और प्रयत्न* ।।
पढ़ते रहे ब्लॉग जनयुग के प्रहरी
Tuesday, February 14, 2023
सुख एवं दुःख के कारण स्वयं
हमारी संस्कृति हमारे विरासत की धरोहर है, हम इसे संजोए रखें और भावी जीवन को संस्कारमय बनाकर वातावरण में महकता दे यह हमारे चित्त के उत्पन्न विचारों पर निर्भर करेगा, हमारी शिक्षा का स्तर जितना महत्वपूर्ण हैं उतना ही महत्वपूर्ण हमारे संस्कार हैं,यदि जीवन में दुःख ही दुःख है,कोई आनन्द नहीं है,तो समझो जीवन की दिशा गलत है दुःख कोई दे नहीं रहा है, दुःख का कारण हम स्वयं है, हमारे जीने का ढंग ठीक नहीं है, हमारी त्रुटि को ढूंढने का प्रयास करें हम जीवन के विपरीत दिशा में यात्रा कर रहे हैं, हमारी संस्कृति को हम भूल रहे हैं रास्ता भटक रहे हैं, हमारे सारे कृत्य हमारे स्वभाव के अनुकूल नहीं है, अपितु प्रतिकूल है, इसलिए दुःखी है जिस दिन हम जीवन की सुनेंगे और वहाँ से जीवन को सही दिशा प्रदान करेंगे उसी क्षण आनन्द ही आनन्द महसूस होगा इसलिए अनुभूति में हमेशा सुख का अहसास करने के लिए अपने निर्णय को बार बार न बदले, निर्णय लेने से पहले चिंतन ,मनन करें परिणाम आने तक इंतजार करना चाहिए अन्यथा अनुभवों की दुनियां में बिखराव आने लगेगा एवं जीवन में मधुरता का आभास कम होगा अतः स्वयं के कारण को समझना होगा तभी जीवन सुखद एवं समृद्ध बनेगा।।
पढ़ते रहे जनयुग के प्रहरी ब्लॉग
Wednesday, January 25, 2023
छोटे छोटे कार्य से बड़ा परिवर्तन
छोटे छोटे कार्य करने से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता हैं, जुनून होना चाहिए कार्य करने का हौसला बुलन्द रखना होता हैं, ऐसा किस्सा हैं 14 जनवरी 1934 को बिहार के गया के पास गहलौर गांव के एक मजदूर का हैं जो मजदूरी किया करता था और उसकी पत्नि प्रतिदिन खाना लेकर जाया करती थी जिसको एक पहाड़ पार करके जाना पड़ता था, 1959 की बात है एक दिन उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी जब अपने पति के खाना लेकर जा रही थी तब मिट्टी का घड़ा पैर पर फिसल जाने से गिर गई और लहूलुहान हो गई तो दशरथ मांझी उसेब अस्पताल लेकर गया जो कि 70 किलोमीटर दूर था उस समय कोई वाहन इत्यादि नही थे वो अपने पीठ पर बांध कर पैदल चल पड़ा तुरन्त अपनी तेज गति से अस्पताल पहुँचने प्रयास किया लेकिन अस्पताल पहुँचते पहुँचते उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी डॉ ने उसे मृत घोषित कर दिया, उसे गुस्सा आया कि काश उस पहाड़ी को पार करके नही जाना पड़ता तो समय पर अस्पताल पहुँच जाता और उसकी पत्नी बच जाती उसी दिन से वो उस पहाड़ी को खोदने में लग गया और 22 साल तक उस पहाड़ी को काटा अंततः उसने 360 फुट लम्बी 30 फुट चौड़ी 25 फुट ऊंची पहाड़ी को काटकर सड़क बना डाली, जो 55 किलोमीटर की दूरी के रास्ते को तय करने की बजाय 15 किलोमीटर दूरी का रास्ता बना दिया आज पूरी दुनिया पूरा देश उस भारत रत्न दशरथ मांझी को माउन्टेन मैंन के नाम से जानती हैं जो एक मजदूर वर्ग से सम्बंध रखने वाला व्यक्ति छोटे छोटे प्रयास से चीनी हथौड़े से बड़े पहाड़ को तोड़ डाला , अतः व्यक्ति अपने नाम से नही व्यक्तित्व से पहचाना जाता हैं अपने कार्य करने की लगन और संकल्प से परिणाम निर्भर करता हैं।।
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Monday, January 23, 2023
खुद को कैसे बेहतर बनाएं
खुद को बेहतर बनाने के लिए खुद की उतनी ही मदद करे जितना आप दूसरों के लिए मदद करने हेतु तत्पर रहते हो किसी अन्य की मदद के लिए आप कितना सोचते हो, उसकी पीड़ा को कितना समझते हो उतना ही अपने लिए समझते हैं तो समस्या आएगी ही नहीं, जितना हम दूसरों को ज्ञान देने में समय बिताते हैं और वो हम हमारे चित्त में सोचकर सुधार लाने लग जाएं तो शायद हमें इतना ज्ञान बाटने की जरूरत ही न पड़े, स्वयं के सुधार में अधिक निवेश करना चाहिए क्योंकि हम समय का निवेश दूसरों के सिस्टम को सुधारने में लग जाते है तो स्वयं के लिए अधिक समय नही लगा पाते , सबसे पहले हमें स्वयं से प्रेम करना चाहिए बिना किसी शर्त के आत्म स्वीकृति का अभ्यास करना चाहिए, दुसरो से प्रेम करने का बेहतर तरीका है कि आप स्वयं को सबसे अधिक प्रेम करें, आप क्या करते हैं और क्या विश्वास करते हैं, इससे आपको और दूसरों को अच्छा महसूस होना ही चाहिए, ये आप अपना ध्यान रखे बिना दूसरों के लिए कुछ करने का प्रयास करते हैं, तो अंत में आप आक्रोशित, नाराज और नकारात्मक महसूस कर सकते हैं, यदि आप स्वयं से प्रेम करते हैं, तो जब आप किसी की मदद करेंगे तो एक सकारात्मक प्रभाव बनाएंगे अतः आप धरातल पर अच्छे इंसान की तरह अभिनय करके नही वास्तविक जीवन में अच्छे बनने का प्रयास करना चाहिए और अपने अंदर से नाराजगी और आत्मघृणा को दूर करके अच्छे इंसान बनने का प्रयास करना चाहिए।।
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Sunday, January 22, 2023
दूसरों से अधिक परफेक्ट हम
जीवन में अपनी तुलना किसी दूसरे से नही करना चाहिए, हम जैसे भी हैं परफेक्ट हैं यह सदैव समझना चाहिए, विजेता वो नही होते जो कभी फेल नहीं होते बल्कि कभी हार नहीं मानते, निरन्तर संघर्ष करते है हम हमारी समस्याओं को प्रतिदिन याद करते हुए उसमें घिरे रहते है तो अच्छी चीजों को भूल जाते हैं, आप अपना भविष्य नही बदल सकते लेकिन आदते बदल सकते है जो आपका भविष्य बदल सकता हैं, अपने मिशन में कामयाब होने के लिए एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा, बारिश के दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते हैं बल्कि बाज आसमां उड़कर बारिश को ही अवॉइड कर देता हैं समस्या एक जैसी है रवैया बदल दिया उससे कठिनाई भी सरल हो गई सफलता का आनन्द उठाने के लिए कठिनाईयो का सामना करना पड़ता हैं, इंतजार करने वाले को उतना ही मिलता हैं जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते है, सभी मे समान प्रतिभा नही होती लेकिन प्रतिभा को विकसित करने का अवसर सबके पास समान होता हैं हमारी प्रतिभा विकसित करके हम कठिन से कठिन कार्य सुलभता से कर लेते हैं यह सोच मत रखो कि इस कार्य को कौन करेगा बल्कि यह सोचना चाहिए कि मेरे अलावा कौन कर पाएगा यही सोच हमें नई ऊर्जा देता हैं,हम सूरज की तरह चमकना हैं तो वैसी तपन भी लाना पड़ेगा महानता ज्ञान, जूनून और करुणा से आती हैं अतः हमेशा अपने आप से कहो कि यह कार्य मैं कर सकता हूं, ईश्वर सदैव मेरे साथ हैं, मैं सर्वश्रेष्ठ हु, कुशल नेतृत्व हैं मुझे जो कार्य करना है उस कार्य को करने का दिन आज है सदैव प्रगति पथ मिलेगा।।
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Saturday, January 21, 2023
फेल होना सफलता की एक सीढ़ी हैं
फेल होना सफलता की एक सीढ़ी हैं, हम सफल होना चाहते हैं तो फेल होने के लिए हमेशा तैयार रहना पड़ेगा, जब तक हम असफल नही होते हमें सिख नही मिलेगी, वो ही अनुभव हमारे सफलता के आधार स्तम्भ होंगे हम यह सोचे कि बिना किसी प्रॉब्लम के सब कुछ मिल जाए तो यह असम्भव हैं, प्रॉब्लम का सामना करना सीख गए और उसका हल निकालना आ गया तो सफल होने से आपको कोई नहीं रोक सकता किसी कार्य करने से पहले यह सोचकर चलना है कि प्रॉब्लम तो आना ही है और उससे लड़ने के लिए तैयार रहना है यह साइकोलॉजी पहले से दिमाग में बिठा लेते है तो सफल होने से कोई नहीं रोक सकता हर असफलता हमें कुछ न कुछ सीखा कर जाएगा, जितना हम सीखेंगे हमारे लिए रास्ते और आसान हो जाएंगे हमने जो गलती पिछे की होती हैं दुबारा नही होगी ताकि हमारी मन्जिल आसान हो जाएगी, हमें दाएं बाएं नही देखना है हमें सिर्फ हमारी सोच को सकारात्मक रखना होता हैं दृढ़ संकल्प के साथ हमारे निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए सम्पूर्ण सामर्थ्य लगाते हैं तो हमें वो सब कुछ मिल जाएगा जो हम चाहते हैं अतः हम हर असफल वाले सफर में सिखते हुए वो सब सीखते हुए सफर करेंगे तो परिणाम सकारात्मक निकलेंगे।।
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Friday, January 20, 2023
समझ का फर्क
समझ का फर्क ही हमें परिणाम पर प्रभाव डालता है, कोई भी व्यक्ति मेहनत के अनुसार परिणाम की उम्मीद रखता है तो ठीक है, अन्यथा अधिकांश लोगों की सोच ऐसी होती हैं जो यह सोचते हैं कि हमें कुछ मेहनत ही न करनी पड़े और हमें सब कुछ मिल जाए दूसरा यह कि कुछ लोग ऐसे होते है जो यह चाहते हैं कि मेरे साथ वाले को मुझसे कम मिले जो मिल रहा है उससे उनका मन नही भरता उनकी तुलना हर दम करते हैं और कुछ लोगो की सोच उनके मूल्य से अधिक रिटर्न देने का मन बनाते है हमारी समझ हमारी ऊंचाइयां तय करता हैं हमारे सिद्धान्त हमारी अनुशासन व्यवस्था स्थापित करता हैं, जिससे हमें लक्ष्य प्राप्ति में सहयोग मिलता हैं, हमारी नीति रीति उन्नति में कार्य करती हैं कि हमने कैसे विधान से आर्थिक समृद्धि पर कार्य योजना बनाई है उसी के अनुरूप सफलता का पथ संचलन होगा अतः हम हमारे जीवन में व्यवसायिक विधेयक के सीमाओं में सेवारत रहेंगे तो हमारी समझ शक्ति उसके अनुकूल बनेगी और नई क्रांति का आगाज होगा।।
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Thursday, January 19, 2023
सफर उन्नति का
सफर उन्नति का तय करने के लिए हमें हमारी पुर्ण ईमानदारी लगन, कठोर परिश्रम एवं कर्म क्षेत्र की निष्ठा पर निर्भर करता है कि कितना चलने के बाद हमें सफलता मिलेगी, हम हमारे अनुभवों की दुनिया का उपयोग कैसे कर रहे हैं और किस समय कर रहे हैं इसका भी महत्वपूर्ण योगदान रहता हैं, बहुत बार हम हमारे भाग्य को दोषी मानकर रुक जाते हैं और हमारी कमी को नही देखते की हम कहा चूक कर रहे हैं जहाँ से हम सुधार करें, हमारी ताकि हमें किसी को दोष नहीं देना पड़े, हमारे वडिलो ने कहा है कि मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता होता हैं तो उस निर्माण में दोषी भी हम ही होंगे कर्म प्रधान होता हैं यह हमारे शास्त्र कहते है तो फिर तो हमारी प्रधानता को महत्व देना चाहिए न कि कर्म भूमि छोड़कर किस्मत को दोष देना, विनोबा भावे ने कहा है कि प्रार्थना और प्रयत्न दोनो साथ चलते हैं तो हमें प्रयत्न की कतार को क्यों तोड़े जब तक हमें मुकाम नही मिलता...हमारा गन्तव्य हमारी राह देखता हैं हमारे क्रमिक विकास के पथ को कसौटी पर खरा उतारते हुए कर्मो के ब्रिज पार करते हुए निरन्तर चलने का सम्बोधन करते हुए, अतः हमारे गन्तव्य पर पहुचने तक हमारी सम्पूर्ण ताकत हमारे रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए लगाते रहे, निरन्तरता से प्रयास करते रहे,,, किसी को दोष देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी सफलता चरण चूमेगी।।
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Tuesday, January 17, 2023
सामाजिक व्यवस्थापन
हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार आनुवांशिक और वातावरण की सहभागिता से मिलता हैं ,
सामाजिक व्यवस्थाओं की परम्पराए हर समाज के रीति रिवाजों में अलग-अलग होती हैं, लेकिन हमारी अधिकांश मानसिकता आर्थिक सक्षमता के हिसाब से अपने स्तर के लोगो के साथ विभाजित हो जाती हैं और समाज में अंतिम व्यक्ति के हित की बात बहुत कम जगह देखी जाती हैं उसके पिछे कई कारण होते हैं , यह सब विषमताएं समाप्त कैसे हो सकती हैं इस पर विचार बहुत कम लोग करते हैं लेकिन हमारे उद्देश्य यदि समाज सेवा में सही दिशा को निर्धारित कर प्रयास करते हैं तो निश्चित रूप से परिवर्तन का आगाज सम्भव है और हमारा अतित हमें सिखाता भी है,, महत्वपूर्ण बात यह नही हैं कि कितने लोग प्रथम कतार में खड़े होकर शंखनाद करते हैं इससे कही अधिक महत्वपूर्ण यह होता हैं कि हम हमारी उस जागृति में कितने निष्ठावान होकर समाज सेवा में समर्पित होते हैं हमारी संवेदनशीलता ही हमारा परिणाम निर्धारित करेगी,... हमारी सामाजिक सरोकार की भावनाओं को संवेदनशील लोगों से जोड़कर जागरूकता की कड़ी में निश्वार्थ आगे बढ़े तो निश्चित रूप से अच्छे व्यवस्थापन हेतु प्रयास हो सकता है
खैर ...... हमारी सोच का कारण किसी भी पहलुओं से हो लेकिन हम इस सोच की परम्पराओं को तोड़कर और हमारी विचार धाराओं को एक ही धारा में प्रवाहित हो ऐसे अनुष्ठान का संकल्प लें तो उस यज्ञ में हर कोई आहुति देने हेतु तैयार रहेगा अतः आईये हम इस सोच के साथ आगे बढ़े कि व्यक्ति विशेष को महत्व कम देकर उनकी अच्छी सोच को समाहित करे और एक जुट शक्ति सम्पन्न समाज के निर्माण की ओर कदम बढ़ाएं और आने वाली पीढ़ी को एक अच्छा भविष्य प्रदान हो उस हेतु मर्यादा स्थापित करने की कड़ी में कदम बढ़ाएं
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Monday, January 16, 2023
सफलता क्या है
दुनिया आपको सफल होने दे या न होने दे आपको उनकी सोच से नही अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कर्म क्षेत्र में कार्य करना है जीवन में उतार चढ़ाव सफलता का हिस्सा हैं वो आना चाहिए वो ही आपको सिखाएगा की आपको क्या करना है क्या नही, मन के अंदर की समझ आना चाहिए बाहर क्या हो रहा है उस पर नही जाए, कोई आपके पैर पर पैर दे रहा है या सिर पर भूल जाओ यह सिद्धांत बनाएं कि जो हमारे अंदर चल रहा है उसे हम तय करेंगे कोई और नही जब आप सफल मन से वो कार्य करेंगे तो उन उम्मीदों के सच होने की ज्यादा सम्भावना बनेगी बिना बुनियाद के सुधारे नही भागना हैं उसे पहले सुधारना चाहिए जिसकी हमें जरूरत है....कितनी भी चुनोतियाँ आए हमें अंदर से मजबूत रहना है हमें सफल होने से कोई नही रोक सकता क्योंकि सफलता का अर्थ ही यही होता हैं कि हम ग्रोथ कर रहे है सफलता हम उसे ही नहीं कहेंगे कि जिसे हम पाना चाहते है जो हमें मिले, सफलता का मतलब यह है कि कुछ वर्षों पहले हम जिस स्थिति में थे आज उससे बेहतर स्थिति है, जैसे हम कल नॉर्मल जिंदगी जी रहे थे और आज सब कुछ ठीक ठाक हैं, उसे हम सफलता कह सकते है क्योंकि हमारी अपेक्षाओं के अनुकूल हमें मिले यह कोई तय नहीं हैं हमारी अपेक्षाए कभी पूरी नही होती समय के साथ हमारी सोच बदलती जाती हैं और हम बीते हुए कल से आज बेहतर है तो भी हम सफलता की किसी दहलीज पर खड़े हैं, यह सीढियां कभी समाप्त नहीं होती हम सफल प्रयास करते हुए जीवन में आगे बढ़ते जाएंगे तो सफलता को छूते हुए कदमताल कर रहे हैं, हमारी अनन्त इच्छाओं पर नही सफल कदमों को देखते हुए उसी दिशा में चलना ही सफलता हैं, यह मानव प्रवृत्ति हैं कि हम थोड़ा कुछ मिल जाए तो हम बहुत कुछ इच्छा रखते है, हमें दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कर्म करने की क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए प्रकृति अपने नियमों से चलेगी पुरुषार्थ और कार्य करने के सिद्धांतों से सफलता मिलती हैं, सिद्धान्तों से समझौता नहीं करना है अपितु समय परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए बदलाव करने से बड़ा बदलाव आता हैं, कल्पनाओं के पहाड़ मन में गढ़ने से कुछ नहीं होता समय की मांग पूरी करना होता हैं जहाँ हमें सफलता का शिक्षक ले जाये मार्ग प्रसस्त होते रहने से मौलिक कार्य होता रहता हैं अतः मनोवैज्ञानिकी सफल सोच रखे सफलता का अर्थ समझ आएगा सदैव सफल प्रयास होंगे , आप खुश रहेंगे।।
क्रमशः पढ़ते रहे
ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी
Sunday, January 15, 2023
हर चीज की सीमित उपयोगिता
दुनिया में हर चीज का महत्व अपनी अपनी जगह होता हैं लेकिन उस महत्ता को समझना हमारे लिए जरूरी हैं, कोई भी वस्तु हम इस्तेमाल करने के लिए लाते हैं तो उसकी उपयोगिता समझते हुए लाना चाहिए कि इसकी हमारे लिए कितनी आवश्यकता है उसी हिसाब से उसका उपयोग करना हमारे लिए फायदेमंद होता हैं, इसके अतिरिक्त हम उस पर जरूरत से अधिक समय निवेश करते हैं तो उसकी महत्ता कम हो जाएगी अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि जो चीज वो खरीदते हैं उसका इस्तेमाल कैसे करें जो चीजे खरीदते हैं वो चीजे उनका इस्तेमाल करने लग जाती हैं, उसके अधीन हो जाते हैं वो हमें गुलाम बना देती हैं, आप उनको काम में ले वहा तक ठीक है लेकिन जब आपको वो चीजे काम में लेने लग जाए तो यह ठीक नहीं है, यदि हमनें यह समझ लिया हर एक की जीवन में सिमित भूमिका होती हैं और बखूबी उस भूमिका को आपने सिमित तरीके से निभाना शुरू कर दिया तो जीवन सफल है, जैसे भौतिक सुख सुविधाओं की सीमित भूमिका, शिक्षा की , रिश्तों की, आर्थिक व्यवस्थाओ की सीमित भूमिका ऐसा ही हर जगह एक दायरा बना कर जीना शुरू कर दिया तो जीवन सुकून से कटने लगेगा आपकी समस्याए स्वतः कम होती चली जाएगी समाधान अपने आप निकलेंगे आपको अधिक परेशान होने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि आप शुरू से अपने आप को एडजस्ट कर चुके होंगे जिस प्रकार का दायरा अपने जीने के लिए बनाया होता हैं उसका प्रयास आपके लिए रास्ते खोलता जाएगा, संयमित एवं सुखी जीवन बन जायेगा, अतः हमनें अपने आप पर विजय पा ली आवश्यकताओं के अनुरूप एक सीमा तय करके सन्तुष्ट हो गए तो वैभवशाली जीवन बन जाएगा
।।क्रमशः।।
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Saturday, January 14, 2023
आनन्द का जीवन
आनंद जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य नही हैं यह बुनियादी जरूरत है आपके भीतर जो कुछ हो रहा है उसका आधार क्या है यह समझने की जरूरत है क्योंकि बहुत सारी सुख सुविधा पाने के बाद भी खुशहाली नही मिलती, खुशहाली तभी मिलेगी जब स्वयं को आप अपने हिसाब से इंजीनियर बना लेंगे, अपने भीतर कई रसायन होते हैं जिसमें आपने आनन्द वाला रसायन बना लिया तो आपकी समस्या होना खत्म हो जाएगा जब आपके अंदर कोई समस्या नहीं है तो बाहरी समस्या आपको प्रभावित नही कर पाएगी , अनुशासन जीवन में जरूरी होता हैं इसका मतलब यह नही होता कि हम कोई कंट्रोल करें हमें वो कार्य करना चाहिए जिसकी हमें जरूरत है किसी भी स्थिति में जो जरूरी हैं वो फैसला लेने की हममें काबिलियत होना चाहिए , हम हमारी पसन्द ना पसन्द से परे जाकर वो कार्य करते हैं तो उसी चीज की दुनिया में जरूरत है , स्थिति के हिसाब से चलने से न केवल परिस्थितिया सुंदर बनेगी बल्कि हमारे विकास का भी कारण बनेगी शान्ति के पल हमनें कितने जिये हैं वो आनन्द हैं खुशहाली हैं क्योंकि खुशहाली कोई लक्ष्य नही होता खुशहाली तो एक माप हैं खुशहाल का मतलब आप एक सहज है, खुशहाल का अर्थ यह नहीं आप कुछ पाना चाहते हैं और वो आपको मिल जाए, जीवन में सहज होना ही खुशहाली हैं, अतः खुशहाल रहने के लिए आवश्यकताओं के अनुसार चले न कि इच्छाओं के अनुसार साधनों में आवश्यकताओं का तालमेल बिठाते हुए आगे बढ़ना चाहिए इच्छाए तो अनन्त होती हैं।।क्रमशः।।
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Friday, January 13, 2023
मन में दृश्य बनाकर सोचे
आत्म वार्ता से व्यक्ति अपनी मानसिकता को सही दिशा में ले जा सकता है, लेकिन प्रश्न यह है कि आत्म वार्ता हम किस प्रकार की करते हैं आत्म वार्ता मन की गति से होती हैं जैसे हमारे मन में विचार आएंगे उसी के अनुकूल वो चिंतन होगा मनन होगा और अवचेतन मन प्रभावित होगा इसलिए अपने आप से वार्ता करते समय सकारात्मक सोच से किसी दृश्य को बनाकर समझने का प्रयास करें आप सदैव मन मस्तिष्क को स्वस्थ रख पाएंगे अच्छे विचार उर्जा देते है औऱ बेहतर परिणाम की ओर अग्रसर होते है, जैसे रामायण का दृश्य सोचकर राम के शब्दों को मनन करने से वैसे विचार आएंगे, जिससे जीवन में मर्यादा स्थापित होगी, दृश्य से समझने में सरलता आती हैं हम रोज बाजार जाते है और हमारे बैग में कोई चिट्ठी पड़ी हैं जिसे हमे पोस्ट बॉक्स में डालना हैं लेकिन भूल जाते हैं तो घर से निकलते समय पोस्ट बॉक्स का चित्र बनाकर जाएं जिससे पोस्ट बॉक्स आते ही हमें याद आ जायेगा या हमारा दिमाग बाजार जाकर पोस्ट बॉक्स को ढूंढेगा क्योंकि जब हम पढ़ना लिखना सिखे तब दृश्य के माध्यम से सिखे हैं अनार का चित्र देखर उसका पहला अक्षर 'अ' आम का दृश्य देखकर पहला अक्षर 'आ' इसी प्रकार वर्णमाला को सीखा गया, समाधान का सरल उपाय हैं यह क्योंकि चेतन मन हमारी एक्टिविटी हैं और अवचेतन मन दृश्य हैं , अतः दृश्य के माध्यम से हर क्षेत्र में हम सफल क्रिया कर सकते हैं चाहे मानसिक स्थिरता हो या आर्थिक आजादी तथा शारीरिक व्याधियां भी इससे दूर हो सकती हैं ।। क्रमशः ।।
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समझ शक्ति का आभास कब से
समझ शक्ति का आभास मनुष्य के जन्म से पहले गर्भ काल के दौरान ही आने लगता हैं, इसलिए हमारे शास्त्रों में गर्भ संस्कार की परम्परा हजारों सालो से ऋषि प्रदत्त प्राचीन परंपरा का मुकुट मणि जैसा विज्ञान हैं, इसके कई उदाहरण अतीत के पन्नों में अनगिनत मिलेंगे, दुनिया में हर जीवन का एक चक्र होता हैं, मनुष्य के जन्म जीवन और अंत तक 16 संस्कारों का समय के साथ एक अलग महत्व है, सनातन धर्म में हमारे ऋषि मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिए संस्कारो का अविष्कार किया, धार्मिक दृष्टिकोण से ही नही वैज्ञानिक तौर पर संस्कारो का बड़ा महत्व है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण गर्भ संस्कार माना गया है, महिला का गर्भवती होना आसान है लेकिन एक आदर्श माँ बनना थोड़ा मुश्किल है होने वाला बच्चा उस माँ का स्वाभिमान हैं माँ की ताकत है देश का भविष्य हैं उसके लिए केवल डॉ की सलाह लेकर कैल्सियम,मैग्नीशियम, आयरन ही नही इसके अलावा भी उसकी कोई पुकार होती हैं जिसे समय के साथ पुरा करना हमारा कर्तव्य हैं कि जितना खयाल हम उनको मेडिकल व्यवस्थाओं से देते है उतना हमें संस्कार रूपी शीतल वातावरण से भी देना चाहिए जिससे आने वाली सन्तान बल, बुद्धि, संस्कृति और संस्कार की जो चाहत है उसे उसका वट वृक्ष गर्भ में ही स्थापित हो जाए जिससे कर्म वीर, महारथी सन्तानो को मातृत्व प्रेम का प्रतीक बनायें, हमारी सबसे बड़ी पूंजी को गर्भ में ही सक्षम बनाए अतः गर्भ में पल रहे बच्चों को अपनी नियति पर न डालें कि बच्चा जैसा होगा अपने संस्कारो से हो जाएगा उसे एक श्रेष्ठ मां का कर्तव्य निभाते हुए श्रेष्ठ सन्तान को जन्म दे।। क्रमशः।।
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धन्यवाद🙏🏻
Thursday, January 12, 2023
शिक्षा का अर्थ किताबी ज्ञान नही
किताबी ज्ञान एवं व्यवहारिक ज्ञान दोनो का महत्व है अपनी-अपनी जगह होता है, लेकीन केवल पुस्तकों का ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता है,चाहे व्यक्ति नौकरी करें या व्यवसाय अनुभवों की पराकाष्ठा हर क्षेत्र में चाहिए, पढाई का महत्व एक सिमित क्षेत्र तक निहित होता है, लेकिन व्यवहारिक क्षेत्र का विस्तारण अपूर्ण होता है, किसी भी क्षेत्र में नौकरी करने के लिए सिमित दायरे में पढ़ाई करनी होती है जहां तक उस क्षेत्र का किताबों में संकलन होता है, लेकिन किताबों के दायरे के अलावा जीवन के हर पहलुओ का अनुभव हमें व्यवहारिक ज्ञान से ही मिलता है, जिसका दायरा असीमित होता है कि विद्यालयों की शिक्षा सहायक हो सकती है वास्तविक ज्ञान है तो हमारे आस-पास के माहौल और आत्म चिंतन से ही प्राप्त होता है हमारा श्रम ही हमें सब कुछ सिखाता है चाहे मानसिक श्रम हो या शारीरिक श्रम, हमारे प्रचन्ड पुरुषार्थ का परिणाम हमारे रास्ते तय करता है और दक्षता प्रदान करता है जिन रास्तो को तय करने के लिए हमने परिश्रम किया होता है, किताबी ज्ञान हमें डीग्री धारी बनाता है लेकिन सफलता का सूचक तो व्यवहारिक ज्ञान ही होता हो डीग्रीयाँ हमें किसी भी क्षेत्र में नौकरियां दिलवा सकता हैं लेकिन उस नौकरी के पद का निर्वहन हमारे व्यवहारिक ज्ञान से ही सम्भव होता है जहाँ व्यवहारिक ज्ञान की कमी होती है वहां दुनियां की डिग्रीयां शुन्य हो जाती है, हमारी योग्यता से कार्य करने का निर्णय तो हम स्वयं लेते हैं,, किसी सरकारी नौकरी या प्राईवेट नौकरी करना तो उस विभाग का दायरा या अंको की श्रेष्ठतम सीमा तय करेगी लेकिन किसी पाइन्ट पर खड़े रहकर चलना शुरू करते है तो कोई सीमांकन नही होता, हजारो रास्ते होते हैं निपुणता हासिल करने के लिये, हमारी रुचि किसमें है हम कोई कार्य शुरु नही करते उससे पहले महसूस होता है ,, लेकिन हम सफलतम प्रयास में लग जाए तो जिस कार्य में सफलता मिलती है उसी में हमारी रुचि बढ़ने लगती है जब तक हम खड़े है भ्रमित है, चलना शुरु हुआ हुए तो हमारे अनुभव अपने आप रास्ते बनाते जाते है ,खड़े हुए को कोई नहीं पूछता चलते हुए के साथ कारवां खड़ा हो जाता है खड़ा वाहन पड़ा है, चलते वाहन में सैकड़ो बैठने आ जाते है । अतः मन रूपी वाहन को सही दिशा प्रदान करते हुए आगे बढ़ते रहे जीवन में किताबों के अलावा व्यवहारिक ज्ञान में अधिक सामर्थ्यवान बने।। क्रमशः ||
खुद का सामर्थ्य पहले जाने
किसी अन्य को पहचाने की अपेक्षा खुद पर अधिक खोज करें , हमें क्या करना है और क्या नही करना इसका निर्णय हमें लेना है क्योंकि दुनिया में कौन क्या कर रहे हैं हमे कुछ नहीं पता हम किसी के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दे सकते , वास्तविक जीवन के बारे में स्वयं से अधिक कोई नहीं जानता , हमें किसी की तारीफ से प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं , हम किसी की वास्तविकता को नही जान सकते इसलिए जानने का प्रयास भी नही करना चाहिए, हम अपने आप को कितना बेहतर बना सकते है उसके लिए प्रयास करना चाहिए, स्वयं के सामर्थ्य पर अध्ययन करने से ही परिणाम आएगा न कि अन्य व्यक्तियों की तारीफ करने या सुनने से, हमारे भविष्य का निर्धारण हम तय करते है दुसरो को दोष देना समझदारी नही होती, जहाँ से मार्ग भटक रहे हैं वही से सही दिशा चयन करना चाहिए, स्वयं को दूसरों के अधीन मत बनाओ अपनेआप को अन्य से बेहतर समझो कि मेरा पुरुषार्थ ही नया इतिहास रचेगा, कर्मयोगी ही स्वर्णिम अक्षरों में पंक्तिबद्ध होते हैं, हमारी पहचान हमें स्वयं को बनाना चाहिए , अपने और पराए अच्छे और बुरे के बखाण में नही पड़ना चाहिए क्योंकि स्वयं से अधिक स्वयं का कोई नहीं, समय रहते सम्भल जाते है तो हर कोई अपना बन जाता हैं और जो कल अपने नही थे वो आज अपने बन जाएंगे और हमारे नाम से उनकी पहचान बताएंगे अतः शारिरीक , मानसिक और आर्थिक संपन्नता पर अधिक कार्य करने से हम सबके और सब हमारे होंगे।।क्रमशः।।
Wednesday, January 11, 2023
गर्भ संस्कार से दिव्य सन्तान
हमारे स्वर्णिम इतिहास से कुछ उदाहरण के माध्यम से गर्भ विज्ञान के बारे में जानते है कि गर्भ में पल रहे शिशु पर माँ की सोच, भावनाएं, व्यवहार एवं वातावरण का बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता हैं, राजा ऋतभध्वज की पत्नि सती मदालसा ब्रम्हज्ञानी और गर्भ विज्ञान की ज्ञाता थी, जिसने अपने 3 पुत्रों विक्रांत, सुबाहु और अरिदमन को गर्भ में ही ब्रम्हा ज्ञान की शिक्षा दी थी जिससे तीनो ही युवा अवस्था मे सारा जीवन लोक मंगल में लगा दिया और सन्यासी बन गए, अब महाराज को एक पुत्र राज्य के लिए उत्तराधिकारी बनाना था, तब रानी मदालसा ने गर्भधारण के 3 माह पूर्व से ही राजा एवं रानी ने शौर्य और साहस का अध्यन किया एवं शयन कक्ष को वीरता के प्रतीकों से सजाकर गर्भधारण किया और गर्भावस्था में ही राजनीति की शिक्षा एवं कुशल राजा के संस्कार दिए जिससे उनका पुत्र अलर्क पिता से अधिक प्रतापी राजा बना , राजा दुष्यंत और शकुंतला का पुत्र भरत को भी माता शकुंतला ने गर्भ में ही संस्कार दिए थे, जो बचपन में ही शेरो के साथ खेलते थे उन्ही के नाम से हमारे देश का नाम भारत पड़ा, इसी प्रकार जीजा बाई ने शिवा जी का, सीता ने लव कुश और ऐसी कई माताओं ने गर्भ में ही ज्ञान देकर प्रतापी एवं कुशल नेतृत्व करने वाले पुत्रों को जन्म दिया अतः गर्भधारण के साथ ही घर के वातावरण को अनुकूल बनाकर श्रेष्ठ सन्तानो को जन्म दिया जा सकता है।।क्रमशः।।
सन्तान में शिक्षा का उदगम
संतान में जन्म के साथ ही स्वभाव में गुस्सा या शान्त स्वभाव जो आता हैं वो बच्चा गर्भ में जन्म लेता है तब से माँ के आचरण से मिलना शुरू हो जाता हैं, गर्भ धारण के बाद बच्चा अपनी मां के आचार विचार उनके स्वभाव के अनुकूल बनने लगता हैं जिस प्रकार एक ऑडियो रिकॉर्डर किसी वॉइस को टैप करता है ठीक उसी तरह मां के मन में चल रहे विचार गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क में समाहित होता जाता है और जिस प्रकार मां अपने गर्भावस्था के दौरान जो सुनती समझती हैं आने वाली संतान उसी प्रकार की बुद्धि के विकास के साथ जन्म लेता है अतीत में इसका उदाहरण अभिमन्यु द्वारा चक्रव्यूह की जानकारी को सुभद्रा के नींद आने के बाद नही समझ पाना , तो हम समझ सकते हैं कि मां के मस्तिष्क के साथ गर्भस्थ शिशु का मतिष्क भी उसी अवस्था में काम करता है जैसे मां की चेतन अवस्था में बुद्धि विकारों से दूर रहे और अच्छा पठन - श्रवण करे तो शिशु भी उसी तरह सीखता जाएगा और ठीक उसी प्रकार बुरा विचार भी प्रभावित करेगा, इसीलिए तो मां को पहला गुरु कहा जाता हैं कि मां ही बच्चो के बुद्धि विकास में प्रथम उत्तरदायी होती हैं, इसके साथ ही जिस परिवार में गर्भस्थ स्त्री होती हैं उस परिवार में नौ माह तक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक वातावरण होना चाहिए जिससे होने वाली संतान तीक्ष्ण बुद्धि और विवेक शील हो, गर्भस्थ स्त्री को अच्छे वातावरण देने के जिम्मेदारी पूरे परिवार की होना चाहिए, जिस परिवार में अपनापन , प्रेम करुणा , शांत वातावरण होता है उस परिवार के बच्चे संस्कारी होते हैं क्योंकि उन बच्चों को गर्भ से लेकर जन्म के बाद समझ आने तक ऐसा माहौल मिलेगा तो बच्चे उसके अनुकूल हो जाते हैं और उसी दिशा में फिर आगे बढ़ते हैं अतः हम सब की जिम्मेदारी होती हैं कि किसी भी गर्भधारण की हुई स्त्री से अच्छा व्यवहार करे शालीनता से बात करें ताकि भावी पीढ़ी का अच्छा निर्माण हो।।क्रमशः।।
Tuesday, January 10, 2023
शिक्षा इतनी महंगी क्यों है
Monday, January 9, 2023
शिक्षा में भाषा का महत्व
शिक्षा में भाषा का उतना महत्व नहीं होता जितना बुद्धि के विकास का होता हैं भाषा अनुवांशिक हिस्सा नहीं होता थोड़े बहुत प्रयास और लगातार संपर्क में रहने से भाषा को सीखा जा सकता है लेकिन संस्कार और संस्कृति को सीखने में व्यक्ति को समय लगता हैं,माहौल हर भाषा को सीखा देता हैं चाहे जिस राज्य की भाषा हो चाहे किसी देश की भाषा समझना सिर्फ इस चीज को होता हैं कि हमारे बुद्धि की तीक्षणता कितनी है हम समझ शक्ति कितनी रखते हैं हमारा जजमेंट पावर कितना तीव्र हैं हमारे अनुमान लगाने का समय कितना सही है, हमारी शिक्षा पद्दति समय के साथ परिवर्तन में आई हैं जरूरत पड़ने पर और आएगी वैकल्पिक व्यवस्थाएं जैसे जैसे सामने आएगी संशोधन होते जाएंगे लेकिन हमारे निर्यायक क्षमताओं को बढ़ाने का प्रयास हमें करना चाहिए यह सब मौलिक चिंतन से सम्भव है जिससे कही अविष्कार हुए हैं नई नई खोज हुई है, समय के साथ परिवर्तन और परिणाम आते रहे हैं, शिक्षा पद्धति का परिवर्तन तो समय के होता रहेगा लेकिन संस्कारो का पाठ पढ़ना हमारी परंपराओ का सही से अध्ययन करने का एवं समझने का काम तो हम कर सकते हैं चाहे जिस ओहदे पर रहकर कार्य करें, हमारे अनुशासन की व्यवस्था तो हमें बनानी होगी चाहे हम कर्म भूमि के किसी भी रोल का अदा कर रहे हो व्यवसायिक , नौकरी या कृषि अनुसंधान किसी भी क्षेत्र में हमारा विधिक हमें सही से बनाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी उन पद चिन्हों पर चले अतीत की प्रवृत्ति वर्तमान में पुनरावृत्ति हो और नए अनुशासन का रूप लेकर भविष्य के गर्भ में स्थापित हो.... ऐसे महकते वातावरण को हमे तैयार करने हेतु प्रयास करना चाहिए।।क्रमशः।।
शिक्षक एवं शिक्षा
शिक्षक एवं शिक्षा देश, दुनिया व समाज की रीढ़ की हड्डी होते हैं, हमारे देश के व्यवस्थापन में जिनकी अहम भूमिका रहती हैं उस शख्सियत का सुलझा पन होना हर प्रकार की समृद्धि को स्थापित करता है क्योंकि शिक्षक वह कला कृति होते हैं जो स्वयं प्रकाशित होकर दुसरो को भी प्रकाश देते हैं, शिक्षक के द्वारा ही देश के शासन व प्रशासन को चलाने वाले जन्म लेते हैं शिक्षक ज्ञान की उपासना करता हैं जहाँ ज्ञान की उपासना नही होगी वहाँ की जनता गँवार होगी, ज्ञान की उपासना से ज्ञान की गंगा बहती हैं उसी से देश के भविष्य का निर्माण होता हैं शिक्षक एक कुएं की तरह होता हैं जिससे संस्कारो की सिंचाई होती हैं जब कुएं में पानी कम होगा तो खेत सुख जाते हैं , फसलें मुर्जा जाती हैं इसलिए शिक्षक रूपी कुएं का गहरापन और शीतल होना आवश्यक होता हैं तभी गहराइयों का फायदा सबके लिए अनुकूल होता हैं, शिक्षा देने का तरीका जितना महत्वपूर्ण होता हैं उससे कहीं ज्यादा इसे ग्रहण करने की महत्ता होती हैं कथा भागवत, भजन कीर्तन,वीर वीरांगना, डाकू अधर्मी, निर्दयी दयावान सभी शिक्षक द्वारा ही पैदा होते है शिक्षा का महत्व भी शिक्षक बताता है अनुभवों की गंगोत्री धरातल पर क्रियान्वयन गुरु के मार्गदर्शन में ही होती हैं, सभी कार्यशाला पाठशाला से उत्पन्न होती हैं शिक्षा से ही सभी का संगम होता हैं शिक्षक के बिना सब वीरान हो जाता हैं शब्दों का महासागर शिक्षक ही प्रदान करता है अतः महासागर में मंथन करते हुए अमृतपान करते रहना चाहिए।।क्रमशः।।
Sunday, January 8, 2023
शिक्षा एवं संस्कार
शिक्षा एवं संस्कार दोनो अलग शब्द होते हैं जो दोनों हमें शिक्षक द्वारा प्राप्त होता हैं, बच्चों का विद्यालय जाकर केवल पाठ्यक्रम पढ़ना ही शिक्षा प्राप्त करना नही है पाठ्यक्रम तो एक माध्यम होता हैं शिक्षक द्वारा विद्यार्थियों में पाठ्यक्रम के माध्यम से उसके अंदर छिपी चेतना को जागृत करना ही सच्ची शिक्षा हैं और उस चेतना से संस्कारों को जोड़ना ही हमारी संस्कृति हैं, आधुनिक युग में अधिकांश रटन विद्या से पाठ्यक्रम तैयार करने का रट्टा लगा हुआ है जहाँ हमें वास्तविक शिक्षा का बोध नही हो पाता हैं वास्तविक शिक्षा तो संस्कारो के साथ हमारी संस्कृति का भान होना है इसके लिए हमारे आस पास का वातावरण अधिक जिम्मेदार होता हैं कि हम किस वातावरण में रह रहे हैं या हमे कैसा वातावरण मिल रहा है वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों का मानसिक विकास होता हैं और सही दिशा का निर्धारण होता हैं, आत्म चिंतन अच्छे माहौल से पैदा होता हैं और नया निर्माण भी उसी दिशा में कार्य करने से होता हैं जहां से इनोवेशन व खोज का उदगम होता हैं, जन्म के साथ कोई सीखकर नही आते जन्म के बाद में सब कुछ सिख मिलने लगती हैं अतीत ने भी हमें यही सिखाया है कि जन्म से कुछ वातावरण मनुष्य को एक ऐसी दिशा प्रदान कर देता हैं जहां नई खोज उत्पन्न होने लगती हैं यह उनकी क्षमताओं को समृद्ध एवं शक्तिशाली बनाने का कार्य अंतर्मन ही करता हैं लेकिन उस सम्पन्नता की जागृति लाने का प्रथम कार्य उनकी शिक्षा एवं संस्कार के साथ स्वयं की लगन से प्रतिभा निखरती हैं ।।क्रमशः।।
मोबाइल के सही मायने पार्ट 5
मोबाइल के सही मायने पार्ट 5 में हम *शिक्षा का माध्यम* और *शिक्षित* होने की सही परिभाषा को समझते हैं कि शिक्षा हमें किन किन माध्यमों से मिलती हैं और वास्तविकता में हम शिक्षित कहेंगे किसे....हालांकि शिक्षा पाने की कोई उम्र नही होती लेकिन शिक्षा का पाना एक उम्र में जाकर हमारे आत्मसाद करने से आती हैं , शिक्षा का उदगम हमारे बचपन से होना शुरू होता हैं जहाँ से हमें सुदृढ एवं शक्तिशाली मानसिकता का निर्माण परिजन के द्वारा हमारे साथ हर चर्चा का विषय निर्धारित करता हैं कि बच्चों के द्वारा पुछे गए हर सवालों के जवाब हम किस तरह से देते हैं, खाली मानसिकता हर प्रकार के प्रश्न जानने की इच्छा रखता है जो हमारी सन्तानो का बोलना प्रारम्भ होने से शुरू होने लगता हैं हमनें उन प्रश्नों को सुनकर उनका सही तरीके से जवाब देना शुरू कर दिया और अच्छी दिशा की ओर प्रेरित किया तो उस स्तिथि में भावी पीढ़ी का भविष्य मौलिक वातावरण की ओर अग्रसर होगा,,, अन्यथा मोबाइल पकड़ा कर उन्हें चुप कर दे या हमारे द्वारा मोबाइल में लगे रहने के साथ उन्हें सही से जवाब देने के साथ परवरिश नही की तो बच्चों के भटकने की संभावना वही से बढ़ने लगती हैं अतः हमें बच्चों की बुद्धि के स्तर को समझते हुए उन्हें हर जवाब सटीक तरीके से दिया जाय और ऐसा ही जवाब उसके सम्पर्क में आने वाले हर मित्र, रिश्तेदार द्वारा दिलवाया जाय तो *शिक्षा का संचार होने लगेगा*...,, और शिक्षित भी वही है जो अच्छा शिक्षण पाकर *शिक्षा के द्वारा व्यक्तित्व निर्माण की बात करें असल में शिक्षित भी वही है* ।। क्रमशः ।।
Saturday, January 7, 2023
मोबाइल के सही मायने पार्ट 4
मोबाइल के सही मायने पार्ट 4 में हम प्राचीन काल से आधुनिकता में आए परिवर्तन की बात करेंगे कि किस प्रकार से 5 वर्ष की उम्र से ही जीवन के मूल्यों को पहचाने का काम हो जाने लग जाता था... इस बाल्यावस्था में माता पिता उनके बच्चों को विद्याध्ययन हेतु गुरुकुल में भेज दिया करते थे जिससे बच्चों की मानसिकता को विकसित करने हेतु शारीरिक , मानसिक , आध्यात्मिक और आर्थिक विकास में किस प्रकार से बेलेंस बनाकर जीवन जीना चाहिए उन सब पहलुओं पर ज्ञानार्जन किया करते थे, अतीत में हमारे पूर्वज गुरुकुल भेजने से पूर्व घर पर 5 वर्ष की उम्र से पहले ऐसा माहौल देते थे जिससे उनकी सन्तानो को नई ऊर्जा का संचार हो , आजकल हम मोबाइल की दुनिया में जन्म के तुरंत बाद ही खिलोने के तौर पर मोबाइल पकड़ा देते हैं जिससे बच्चों को अलग दिशा मिलने लगती हैं, जिस प्रकार एक खाली पेपर पर हम जो चाहे लिख सकते है ठीक उसी प्रकार बच्चों के दिमाग की स्थिति भी वैसी ही होती हैं हम जैसे वातावरण के द्वारा जिस प्रकार की चाहे आदर्शता स्थापित कर सकते है, मोबाइल हमारी वो आवश्यक व्यवस्था है जिन्हें हम हर पहलुओं को ध्यान में रखकर समझाया जाएं तो उपयोगी सिद्ध हो सकता हैं लेकिन इस व्यवस्था को हम किस सन्दर्भ में समझाए यह मत्वपूर्ण विषय है, इस धरा पर व्याप्त ज्ञान के महासागर अज्ञानता से दूरी बनाकर रखना हमारे विवेकशीलता पर निर्भर करता हैं ताकि भावी पीढ़ी में सुगमता से ज्ञान का संचार हो।। क्रमशः ।।
मोबाइल के मायने पार्ट 3
मोबाइल के सही मायने पार्ट 3 में हम जानेंगे कि आज हम शिक्षा और संस्कारों की दृष्टि से यदि मोबाइल का उपयोग करें तो मोबाइल एक बड़ी क्रांति ला सकता है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि मोबाइल का उपयोग हम किस सन्दर्भ में कर रहे हैं तो उस के अनुसार ही उसका उपयोग कर हम उन चीजों को ही देखे...क्योंकि मोबाइल में पूरे ब्रह्मांड की अधिकांश वस्तुएं और अनुभव समाहित हैं हमें सिर्फ उन्हीं चीजो को खोजकर हमारे जीवन में अपनाएं जो हमारे काम की है तो हमारे लिए उसकी सही मायने में उपयोगिता बनी रहेगी , बहुत बार हम यह तो समझ लेते हैं कि हमें किन अनुभवों को ग्रहण करना है लेकिन किनसे दूर रहना है उसे समझ पाना बहुत बड़ी चुनौती है, शिक्षा का सही से अध्ययन करें तो इसके द्वारा समाज एवं देश की तमाम बुराइयों का अंत अच्छी शिक्षा के माध्यम लाया जा सकता है, यदि हम मोबाइल को हमारा गुरु मानकर सिर्फ सही आंकलन करना आ गया तो हम हमारे जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं, इसका बीजारोपण हम प्रारम्भ से ही करते हुए आने वाली पीढ़ी को निश्चित उम्र के अंतराल तक उससे दूरी बनाकर रखें कि हम बच्चों को जब तक अच्छे बुरे का भान नही हो जाता तब तक मोबाइल को एक यंत्र की भांति उनसे दूरी बनाकर रखना चाहिए ताकि बच्चे किसी के कहने पर भी हाथ नही लगाए कि मोबाइल कोई आवश्यक काम की वस्तु है न कि मनोरंजन का साधन, मोबाइल एक निर्धारित उम्र के बाद ही आने वाली पीढ़ी को हाथ लगाने देना चाहिए जिससे हम उनमें हमारे जीवन के वास्तविक अनुभवों को साझा करते हुए उन्हें अच्छे माहौल देकर भावी पीढ़ी को संस्कृति का ज्ञान और संस्कारों का पाठ पढ़ा सके अन्यथा उनको किस मार्ग पर चलना चाहिए वह भान न होते हुए मोबाइल की दुनिया के द्वारा आने वाली पीढ़ी भटक जाएगी अतः हमें इस प्रकार के वातावरण को हमारे घर परिवार में बच्चों के साथ बनाना होगा ।। क्रमशः ।।
Thursday, January 5, 2023
मोबाइल के मायने पार्ट 2
आधुनिक युग टेक्नोलॉजी का युग हैं जिसमें हमारे कम्प्यूटर, मोबाइल की हर व्यवसाय के लिए नितांत आवश्यकता है इन आवश्यकताओ के मध्येनजर हम हर पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इन वस्तुओं का इस्तेमाल करें तो यह हमारे लिए बहुत ही फायदे की वस्तुएं हैं
तो हम आज इसके उपयोगिता को पहले नकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करते हुए आगे बढ़ेंगे.....आजकल इस प्रकार के फैशन हर घर में बन गया है कि बच्चे को जन्म से ही इसके आदि बना दिया जाता हैं कि मोबाइल फोन की वह बिना कोई उसकी उपयोगिता को समझे बिना मोबाइल की चाहत बड़ी जिद्द के साथ रखता है उसका बड़ा कारण है कि जन्म से ही उसको रोते हुए को चुप करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल कर चुप किया जाता है कि इसमें यह देख बेटे, फोटो , वीडियो ऑडियो आदि कुछ दिखाकर उसका ध्यान केंद्रित करवाया जो एक बार नव जात शिशु चुप हो जाते हैं लेकिन वही आगे जाकर उन बच्चों को लत सी पड़ने लगती हैं, जो बच्चे मोबाइल की डिमांड कर चुप रहते हैं और रोने के हथियार को इस्तेमाल करते हैं और हमें उन्हें मोबाइल देना पड़ता हैं, वैज्ञानिक आधार पर इन पहलुओं पर गौर करें तो बुद्धि जीवी बताते हैं कि कम उम्र में बच्चों को मोबाइल की वास्तविक उपयोग की अनभिज्ञता अति नुकसान देती हैं जो कई बीमारियों का कारण बनती हैं.... तो आगे की पोस्ट में हम जानेंगे कि उसका किस प्रकार के निदान बच्चों को दूरी बना सकता है और कहा हम इसे अधिक उपयोगी बना सकते हैं,....।। क्रमशः ।।
मोबाइल के सही मायने पार्ट 1
हमारे देश में आजकल मोबाइल की दुनिया आने के बाद युवा पीढ़ी द्वारा अनावश्यक एवं अधिक प्रयोग से स्वभाव में परिवर्तन आ रहा हैं, और चिड़चिड़ापन भी आ रहा है हमे एक ऐसे मिशन को चलने की आवश्यकता है कि जिसमे हम बच्चो को जन्म से ही मोबाइल का कम से कम उपयोग हो और सिर्फ हमारे जरूरत के साथ ही उपयोग करे ऐसी आदत डालने का प्रयास करे ताकि हमे आर्थिक आजादी लाने के लिए कितना कारगर हो सकता है, इस पहल में प्रयास करे , क्योकि आज की नई युवा पीढ़ी कुछ तो इसका उपयोग कर इसके फायदे को ढूंढ कर इसका लाभ अर्जन करने में लग गए हैं और कई तो इसके दुष्परिणामो में उलझ रहे है।
आईये हम कुछ इसके फायदे और नुकसान को समझते हुए हमारे वास्तविक अनुभवों को क्रमिक साझा करते हुवे आगे बढ़ते है, जिससे हम इससे दुरी भी बनाये एवं साथ में इसके उपयोगिता को समझ कर इसका वास्तविक आंकलन करे कि हम कहा इसका लाभ ले सकते है और इंटरनेट की दुनिया का जो लाभ हमें लेना चाहिए उसका वास्तविक लाभ न लेकर हम अनावश्यक समय व्यतीत कर रहे है जिसका हमें शारीरिक , मानसिक एवं आर्थिक सभी नुकसान को समझे बिना अधिकांश समय मोबाइल पर ख़राब करते है उस फ्री समय को भी हम हमारे लिए कैसे उपयोगी बनाये उसको भी हम समझने का प्रयास कर।।। क्रमशः ।। हर पोस्ट को पढ़े।।
Wednesday, January 4, 2023
डॉ प्रेमदान भारतीय
डॉ प्रेमदान भारतीय
मन की माया के जंजाल में फंसा हुआ है जीव।
सुख की चाह के जाल में फंसा हुआ है जीव।।
'समझ' रूपी 'गुरु' ही मुक्त कराएगा मन -माया से।
असंतोष अतृप्ति के बवाल में फंसा हुआ है जीव।।
भोग सम्पन्नता धन सम्मान आत्मा को नहीं चाहिये।
मृग तृष्णा के अनंत कमाल में फंसा हुआ है जीव।।
मन से मित्रता भली न दुश्मनी दोनों में जीव की हार।
अपने ही हाथों होता हलाल में फंसा हुआ है जीव।।
डॉ प्रेमदान चारण
डॉ प्रेमदान भारतीय
।।रचियता: डॉ प्रेमदान चारण भारतीय।।
गुणवान हो धनवान हो दयावान हो चारण ।
देवी उपासक बने तो न परेशान हो चारण ।।
रहें जिस गाँव शहर में देश या राज्य में कहीं
चारण तत्व जीता चारण पहचान हो चारण ।।
न हो गद्धार न सांप्रदायिक चारण कभी भी
देव स्वभाव वाला अच्छा इंसान हो चारण ।।
दे लोग मिशाल जहाँ चारण तत्व को सराहे
सत्य कहने जीने में अलग पहचान हो चारण
हमने ही छोडी अपनी संस्क्रति परम्पराए भी अपनी
इस हालत पे न ज्यादा हैरान हो चारण ।।
दहेज ,टिका ,कुप्रथाए दुर्व्यसन अहंकार छोड़े
देश जाग्रति अनोखी निराली शान हो चारण ।।
छोड़े न अपनी जाति गुण किसी भी कीमत पर ।
अन्याय असत्य के खिलाफ खड़ें आन हो चारण ।।
डॉ प्रेमदान भारतीय
आओ हम चारण होना सिध्द करें
भ्रमित युग को हम चारण प्रबुद्ध करें
युग के विकारों पर सच का प्रहार करें।
युग सुधारक चारणत्व का सत्कार करें।।
हर चारण स्व भूमिका पर विचार करें।
चारणत्व की खुशबू लिए व्यवहार करें।
सच की राह अपनाने को आबद्ध करें।
आओ हम चारण होना सिध्द करें।।1।।
जो भूला स्व कर्तव्य से उसको याद दिलाएं।
जो भटका सच की राह उसको राह दिखाएं।।
जिसने खोये राष्ट्रीय मूल्य उसमें ज्योत जलाएं।
सही अर्थों में क्रान्तिपुत्र हर चारण कहलाये।
युग को राह दिखाने की हम जिद करें
आओ हम चारण होना सिध्द करें।।2।।
नेता प्रजा शिक्षक सैनिक सबको राह बताए।
युवा बाल वृद्ध नर नारी में राष्ट्र भक्ति जगाएं।
उम्मीद जगाएं नई पीढ़ी में आशा दीप जलाए।
चारण कर्तव्य निभाकर हम राष्ट्र उत्थान कराएं।।
हर चारण चाणक्य सम उच्च प्रारब्ध करें।
आओ हम चारण होना सिध्द करें।।3।।
राजनीति राह भूली नेता नीति छोड़ चुके।
युवा देशभक्ति की राह अकारण मोड़ चुके।।
राष्ट्रधर्म को मूर्ख साम्प्रदायिकता से जोड़ चुके।
राष्ट्रधर्म की गर्दन को भ्रष्ट कुकर्मी मरोड़ चुके।।
देश की हो उन्नति काव्य रच नवनिद्ध करें।
आओ हम चारण होना सिध्द करें।।
डॉ प्रेमदान चारण
डॉ प्रेम दान भारतीय
घर घर में चारणाचार की बहार चाहता हूँ
देवजाति चारण में कुछ सुधार चाहता हूँ
विद्वता वाणी विचार कर्म साहित्य में सत्य
सम्मानित चारण वो चारणाचार चाहता हूँ
अहिंसा मानवता सहिष्णुता दया और प्रेम
भारत में चारण के लफ़्ज़े एतबार चाहता हूँ
सियासत हुकूमत से टकराने का हो साहस
चारण में मुल्क जागृति की पुकार चाहता हूँ
न हों व्यसन नहीं हो दिलों में कोई संकीर्णता
मेरे जीते जी चारण को निर्विकार चाहता हूँ
दें चारण फिर हुकूमत को मशवरे पहले जैसे
हर चारण के दिल में सत्य का उभार चाहता हूँ
डॉ प्रेमदान चारण
समय का चक्र और संघर्ष की कहानी
जनयुग के प्रहरी में आप पढ़े 😊 समय का चक्र और अज्ञातवास की कहानी, संघर्ष की कहानी समय का पहिया घूमता रहता है, और हमें अपने जीवन में कई बार ...