आनंद जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य नही हैं यह बुनियादी जरूरत है आपके भीतर जो कुछ हो रहा है उसका आधार क्या है यह समझने की जरूरत है क्योंकि बहुत सारी सुख सुविधा पाने के बाद भी खुशहाली नही मिलती, खुशहाली तभी मिलेगी जब स्वयं को आप अपने हिसाब से इंजीनियर बना लेंगे, अपने भीतर कई रसायन होते हैं जिसमें आपने आनन्द वाला रसायन बना लिया तो आपकी समस्या होना खत्म हो जाएगा जब आपके अंदर कोई समस्या नहीं है तो बाहरी समस्या आपको प्रभावित नही कर पाएगी , अनुशासन जीवन में जरूरी होता हैं इसका मतलब यह नही होता कि हम कोई कंट्रोल करें हमें वो कार्य करना चाहिए जिसकी हमें जरूरत है किसी भी स्थिति में जो जरूरी हैं वो फैसला लेने की हममें काबिलियत होना चाहिए , हम हमारी पसन्द ना पसन्द से परे जाकर वो कार्य करते हैं तो उसी चीज की दुनिया में जरूरत है , स्थिति के हिसाब से चलने से न केवल परिस्थितिया सुंदर बनेगी बल्कि हमारे विकास का भी कारण बनेगी शान्ति के पल हमनें कितने जिये हैं वो आनन्द हैं खुशहाली हैं क्योंकि खुशहाली कोई लक्ष्य नही होता खुशहाली तो एक माप हैं खुशहाल का मतलब आप एक सहज है, खुशहाल का अर्थ यह नहीं आप कुछ पाना चाहते हैं और वो आपको मिल जाए, जीवन में सहज होना ही खुशहाली हैं, अतः खुशहाल रहने के लिए आवश्यकताओं के अनुसार चले न कि इच्छाओं के अनुसार साधनों में आवश्यकताओं का तालमेल बिठाते हुए आगे बढ़ना चाहिए इच्छाए तो अनन्त होती हैं।।क्रमशः।।
पढ़ते रहिए ब्लॉग जनयुग के प्रहरी
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