शिक्षा में भाषा का उतना महत्व नहीं होता जितना बुद्धि के विकास का होता हैं भाषा अनुवांशिक हिस्सा नहीं होता थोड़े बहुत प्रयास और लगातार संपर्क में रहने से भाषा को सीखा जा सकता है लेकिन संस्कार और संस्कृति को सीखने में व्यक्ति को समय लगता हैं,माहौल हर भाषा को सीखा देता हैं चाहे जिस राज्य की भाषा हो चाहे किसी देश की भाषा समझना सिर्फ इस चीज को होता हैं कि हमारे बुद्धि की तीक्षणता कितनी है हम समझ शक्ति कितनी रखते हैं हमारा जजमेंट पावर कितना तीव्र हैं हमारे अनुमान लगाने का समय कितना सही है, हमारी शिक्षा पद्दति समय के साथ परिवर्तन में आई हैं जरूरत पड़ने पर और आएगी वैकल्पिक व्यवस्थाएं जैसे जैसे सामने आएगी संशोधन होते जाएंगे लेकिन हमारे निर्यायक क्षमताओं को बढ़ाने का प्रयास हमें करना चाहिए यह सब मौलिक चिंतन से सम्भव है जिससे कही अविष्कार हुए हैं नई नई खोज हुई है, समय के साथ परिवर्तन और परिणाम आते रहे हैं, शिक्षा पद्धति का परिवर्तन तो समय के होता रहेगा लेकिन संस्कारो का पाठ पढ़ना हमारी परंपराओ का सही से अध्ययन करने का एवं समझने का काम तो हम कर सकते हैं चाहे जिस ओहदे पर रहकर कार्य करें, हमारे अनुशासन की व्यवस्था तो हमें बनानी होगी चाहे हम कर्म भूमि के किसी भी रोल का अदा कर रहे हो व्यवसायिक , नौकरी या कृषि अनुसंधान किसी भी क्षेत्र में हमारा विधिक हमें सही से बनाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी उन पद चिन्हों पर चले अतीत की प्रवृत्ति वर्तमान में पुनरावृत्ति हो और नए अनुशासन का रूप लेकर भविष्य के गर्भ में स्थापित हो.... ऐसे महकते वातावरण को हमे तैयार करने हेतु प्रयास करना चाहिए।।क्रमशः।।
हमारे ब्लॉग जनयुग के प्रहरी "जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरणा और सकारत्मक भाव के आधार पर ब्लॉग में आप जीवन के हर पहलू पर आधारित लेख पढ़ सकते हैं, जैसे कि प्रेरणा, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत विकास, जैविक खेती संबधित जानकारी और जीवन के अनुभव। हमारा उद्देश्य आपको संघर्ष के साथ आगे बढ़ना और जीवन में नई दृष्टि प्रदान करना है और आपको अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना है।" धन्यवाद
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समय का चक्र और संघर्ष की कहानी
जनयुग के प्रहरी में आप पढ़े 😊 समय का चक्र और अज्ञातवास की कहानी, संघर्ष की कहानी समय का पहिया घूमता रहता है, और हमें अपने जीवन में कई बार ...
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