घर घर में चारणाचार की बहार चाहता हूँ
देवजाति चारण में कुछ सुधार चाहता हूँ
विद्वता वाणी विचार कर्म साहित्य में सत्य
सम्मानित चारण वो चारणाचार चाहता हूँ
अहिंसा मानवता सहिष्णुता दया और प्रेम
भारत में चारण के लफ़्ज़े एतबार चाहता हूँ
सियासत हुकूमत से टकराने का हो साहस
चारण में मुल्क जागृति की पुकार चाहता हूँ
न हों व्यसन नहीं हो दिलों में कोई संकीर्णता
मेरे जीते जी चारण को निर्विकार चाहता हूँ
दें चारण फिर हुकूमत को मशवरे पहले जैसे
हर चारण के दिल में सत्य का उभार चाहता हूँ
डॉ प्रेमदान चारण
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