अपना हैं ये भूल मत करना कभी कोई रिश्ता खास नहीं होता विशेष तो उनको दूर रखना चाहिए जो हमारे दुःख में साथ नहीं थे, क्योंकि जो दुःख में साथ नहीं होता उन्हें खुशी में शामिल नहीं करना चाहिए, ऐसे लोग बहुत मिल जाएंगे जो सुख में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे लेकिन असली हकदार तो वो होते हैं जिन्होंने विषम परिस्थितियों को गहराइयों से समझा और जीवन में सामान्य अनुकूलता आए उस हेतु सहयोग किया न कि सलाह दी,... परेशानी में सलाह की नहीं सहयोग की आवश्यकता होती है दुनियां अपनो की नहीं क्षमताओं की होती है, आर्थिक संपन्नता से नए रिश्ते बन जाते हैं विपरीत परिस्थितियों में अपने भी मुंह मोड लेते हैं, हम स्वयं जितने अपने हैं उससे अधिक अपना कोई नहीं, हमारी दक्षता को विस्तारित करना चाहिए न कि दुःख को, कहानी के पात्र बना कर रख देंगे यदि हमने अपनी योग्यता का इस्तेमाल नही किया तो, कहानी के पात्र कब तक बनेंगे लेखक बनना चाहिए , हम कितने शुद्ध हैं हमारी भावनाएं कितनी शुद्ध है दुनियां को कोई फर्क नहीं पड़ना अतः हमारे कौशल की उपेक्षा कभी नहीं करना चाहिए हम इतिहास को गढ़ने का सामर्थ्य रखते हैं हमेशा याद रखना चाहिए।।
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