छोटे छोटे कार्य करने से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता हैं, जुनून होना चाहिए कार्य करने का हौसला बुलन्द रखना होता हैं, ऐसा किस्सा हैं 14 जनवरी 1934 को बिहार के गया के पास गहलौर गांव के एक मजदूर का हैं जो मजदूरी किया करता था और उसकी पत्नि प्रतिदिन खाना लेकर जाया करती थी जिसको एक पहाड़ पार करके जाना पड़ता था, 1959 की बात है एक दिन उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी जब अपने पति के खाना लेकर जा रही थी तब मिट्टी का घड़ा पैर पर फिसल जाने से गिर गई और लहूलुहान हो गई तो दशरथ मांझी उसेब अस्पताल लेकर गया जो कि 70 किलोमीटर दूर था उस समय कोई वाहन इत्यादि नही थे वो अपने पीठ पर बांध कर पैदल चल पड़ा तुरन्त अपनी तेज गति से अस्पताल पहुँचने प्रयास किया लेकिन अस्पताल पहुँचते पहुँचते उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी डॉ ने उसे मृत घोषित कर दिया, उसे गुस्सा आया कि काश उस पहाड़ी को पार करके नही जाना पड़ता तो समय पर अस्पताल पहुँच जाता और उसकी पत्नी बच जाती उसी दिन से वो उस पहाड़ी को खोदने में लग गया और 22 साल तक उस पहाड़ी को काटा अंततः उसने 360 फुट लम्बी 30 फुट चौड़ी 25 फुट ऊंची पहाड़ी को काटकर सड़क बना डाली, जो 55 किलोमीटर की दूरी के रास्ते को तय करने की बजाय 15 किलोमीटर दूरी का रास्ता बना दिया आज पूरी दुनिया पूरा देश उस भारत रत्न दशरथ मांझी को माउन्टेन मैंन के नाम से जानती हैं जो एक मजदूर वर्ग से सम्बंध रखने वाला व्यक्ति छोटे छोटे प्रयास से चीनी हथौड़े से बड़े पहाड़ को तोड़ डाला , अतः व्यक्ति अपने नाम से नही व्यक्तित्व से पहचाना जाता हैं अपने कार्य करने की लगन और संकल्प से परिणाम निर्भर करता हैं।।
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