Tuesday, January 17, 2023

सामाजिक व्यवस्थापन

 हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार आनुवांशिक और वातावरण की सहभागिता से मिलता हैं ,

सामाजिक व्यवस्थाओं की परम्पराए हर समाज के रीति रिवाजों में अलग-अलग होती हैं, लेकिन हमारी अधिकांश मानसिकता आर्थिक सक्षमता के हिसाब से अपने स्तर के लोगो के साथ विभाजित हो जाती हैं और समाज में अंतिम व्यक्ति के हित की बात बहुत कम जगह देखी जाती हैं उसके पिछे कई कारण होते हैं , यह सब विषमताएं समाप्त कैसे हो सकती हैं इस पर विचार बहुत कम लोग करते हैं लेकिन हमारे उद्देश्य यदि समाज सेवा में सही दिशा को निर्धारित कर प्रयास करते हैं तो निश्चित रूप से परिवर्तन का आगाज सम्भव है और हमारा अतित हमें सिखाता भी है,, महत्वपूर्ण बात यह नही हैं कि कितने लोग प्रथम कतार में खड़े होकर शंखनाद करते हैं इससे कही अधिक महत्वपूर्ण यह होता हैं कि हम  हमारी उस जागृति में कितने निष्ठावान होकर समाज सेवा में समर्पित होते हैं हमारी संवेदनशीलता ही हमारा परिणाम निर्धारित करेगी,... हमारी सामाजिक सरोकार की भावनाओं को संवेदनशील लोगों से जोड़कर   जागरूकता की कड़ी में निश्वार्थ आगे बढ़े तो निश्चित रूप से अच्छे व्यवस्थापन हेतु प्रयास हो सकता है 

खैर ...... हमारी सोच का कारण किसी भी पहलुओं से हो लेकिन हम इस सोच की परम्पराओं को तोड़कर और हमारी विचार धाराओं को एक ही धारा में प्रवाहित हो ऐसे अनुष्ठान का संकल्प लें तो उस यज्ञ में हर कोई आहुति देने हेतु तैयार रहेगा अतः आईये हम इस सोच के साथ आगे बढ़े कि व्यक्ति विशेष को महत्व कम देकर उनकी अच्छी सोच को समाहित करे और एक जुट शक्ति सम्पन्न समाज के निर्माण की ओर कदम बढ़ाएं और आने वाली पीढ़ी को एक अच्छा भविष्य प्रदान हो उस हेतु मर्यादा स्थापित करने की कड़ी में कदम बढ़ाएं


पढ़ते रहिए हमारे ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी

No comments:

Post a Comment

समय का चक्र और संघर्ष की कहानी

जनयुग के प्रहरी में आप पढ़े 😊 समय का चक्र और अज्ञातवास की कहानी, संघर्ष की कहानी  समय का पहिया घूमता रहता है, और हमें अपने जीवन में कई बार ...