समझ का फर्क ही हमें परिणाम पर प्रभाव डालता है, कोई भी व्यक्ति मेहनत के अनुसार परिणाम की उम्मीद रखता है तो ठीक है, अन्यथा अधिकांश लोगों की सोच ऐसी होती हैं जो यह सोचते हैं कि हमें कुछ मेहनत ही न करनी पड़े और हमें सब कुछ मिल जाए दूसरा यह कि कुछ लोग ऐसे होते है जो यह चाहते हैं कि मेरे साथ वाले को मुझसे कम मिले जो मिल रहा है उससे उनका मन नही भरता उनकी तुलना हर दम करते हैं और कुछ लोगो की सोच उनके मूल्य से अधिक रिटर्न देने का मन बनाते है हमारी समझ हमारी ऊंचाइयां तय करता हैं हमारे सिद्धान्त हमारी अनुशासन व्यवस्था स्थापित करता हैं, जिससे हमें लक्ष्य प्राप्ति में सहयोग मिलता हैं, हमारी नीति रीति उन्नति में कार्य करती हैं कि हमने कैसे विधान से आर्थिक समृद्धि पर कार्य योजना बनाई है उसी के अनुरूप सफलता का पथ संचलन होगा अतः हम हमारे जीवन में व्यवसायिक विधेयक के सीमाओं में सेवारत रहेंगे तो हमारी समझ शक्ति उसके अनुकूल बनेगी और नई क्रांति का आगाज होगा।।
क्रमशः पढ़ते रहिये #जनयुग के प्रहरी ब्लॉग
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