खुद को बेहतर बनाने के लिए खुद की उतनी ही मदद करे जितना आप दूसरों के लिए मदद करने हेतु तत्पर रहते हो किसी अन्य की मदद के लिए आप कितना सोचते हो, उसकी पीड़ा को कितना समझते हो उतना ही अपने लिए समझते हैं तो समस्या आएगी ही नहीं, जितना हम दूसरों को ज्ञान देने में समय बिताते हैं और वो हम हमारे चित्त में सोचकर सुधार लाने लग जाएं तो शायद हमें इतना ज्ञान बाटने की जरूरत ही न पड़े, स्वयं के सुधार में अधिक निवेश करना चाहिए क्योंकि हम समय का निवेश दूसरों के सिस्टम को सुधारने में लग जाते है तो स्वयं के लिए अधिक समय नही लगा पाते , सबसे पहले हमें स्वयं से प्रेम करना चाहिए बिना किसी शर्त के आत्म स्वीकृति का अभ्यास करना चाहिए, दुसरो से प्रेम करने का बेहतर तरीका है कि आप स्वयं को सबसे अधिक प्रेम करें, आप क्या करते हैं और क्या विश्वास करते हैं, इससे आपको और दूसरों को अच्छा महसूस होना ही चाहिए, ये आप अपना ध्यान रखे बिना दूसरों के लिए कुछ करने का प्रयास करते हैं, तो अंत में आप आक्रोशित, नाराज और नकारात्मक महसूस कर सकते हैं, यदि आप स्वयं से प्रेम करते हैं, तो जब आप किसी की मदद करेंगे तो एक सकारात्मक प्रभाव बनाएंगे अतः आप धरातल पर अच्छे इंसान की तरह अभिनय करके नही वास्तविक जीवन में अच्छे बनने का प्रयास करना चाहिए और अपने अंदर से नाराजगी और आत्मघृणा को दूर करके अच्छे इंसान बनने का प्रयास करना चाहिए।।
क्रमशः पढ़ते रहिए मेरे ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी को
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