Saturday, January 7, 2023

मोबाइल के सही मायने पार्ट 4

 मोबाइल के सही मायने पार्ट 4 में हम प्राचीन काल से आधुनिकता में आए परिवर्तन की बात करेंगे कि किस प्रकार से 5 वर्ष की उम्र से ही जीवन के मूल्यों को पहचाने का काम हो जाने लग जाता था... इस बाल्यावस्था में माता पिता उनके बच्चों को विद्याध्ययन हेतु गुरुकुल में भेज दिया करते थे जिससे बच्चों की मानसिकता को विकसित करने हेतु शारीरिक , मानसिक , आध्यात्मिक और आर्थिक विकास में किस प्रकार से बेलेंस बनाकर जीवन जीना चाहिए उन सब पहलुओं पर ज्ञानार्जन किया करते थे, अतीत में हमारे पूर्वज गुरुकुल भेजने से पूर्व घर पर 5 वर्ष की उम्र से पहले ऐसा माहौल देते थे जिससे उनकी सन्तानो को नई ऊर्जा का संचार हो , आजकल हम मोबाइल की दुनिया में जन्म के तुरंत बाद ही खिलोने के तौर पर मोबाइल पकड़ा देते हैं जिससे बच्चों को अलग दिशा मिलने लगती हैं, जिस प्रकार एक खाली पेपर पर हम जो चाहे लिख सकते है ठीक उसी प्रकार बच्चों के दिमाग की स्थिति भी वैसी ही होती हैं हम जैसे वातावरण के द्वारा जिस प्रकार की चाहे आदर्शता स्थापित कर सकते है, मोबाइल हमारी वो आवश्यक व्यवस्था है जिन्हें हम हर पहलुओं को ध्यान में रखकर समझाया जाएं तो उपयोगी सिद्ध हो सकता हैं लेकिन इस व्यवस्था को हम किस सन्दर्भ में समझाए यह मत्वपूर्ण विषय है, इस धरा पर व्याप्त ज्ञान के महासागर अज्ञानता से दूरी बनाकर रखना हमारे विवेकशीलता पर निर्भर करता हैं ताकि भावी पीढ़ी में सुगमता से ज्ञान का संचार हो।। क्रमशः ।।

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