संतान में जन्म के साथ ही स्वभाव में गुस्सा या शान्त स्वभाव जो आता हैं वो बच्चा गर्भ में जन्म लेता है तब से माँ के आचरण से मिलना शुरू हो जाता हैं, गर्भ धारण के बाद बच्चा अपनी मां के आचार विचार उनके स्वभाव के अनुकूल बनने लगता हैं जिस प्रकार एक ऑडियो रिकॉर्डर किसी वॉइस को टैप करता है ठीक उसी तरह मां के मन में चल रहे विचार गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क में समाहित होता जाता है और जिस प्रकार मां अपने गर्भावस्था के दौरान जो सुनती समझती हैं आने वाली संतान उसी प्रकार की बुद्धि के विकास के साथ जन्म लेता है अतीत में इसका उदाहरण अभिमन्यु द्वारा चक्रव्यूह की जानकारी को सुभद्रा के नींद आने के बाद नही समझ पाना , तो हम समझ सकते हैं कि मां के मस्तिष्क के साथ गर्भस्थ शिशु का मतिष्क भी उसी अवस्था में काम करता है जैसे मां की चेतन अवस्था में बुद्धि विकारों से दूर रहे और अच्छा पठन - श्रवण करे तो शिशु भी उसी तरह सीखता जाएगा और ठीक उसी प्रकार बुरा विचार भी प्रभावित करेगा, इसीलिए तो मां को पहला गुरु कहा जाता हैं कि मां ही बच्चो के बुद्धि विकास में प्रथम उत्तरदायी होती हैं, इसके साथ ही जिस परिवार में गर्भस्थ स्त्री होती हैं उस परिवार में नौ माह तक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक वातावरण होना चाहिए जिससे होने वाली संतान तीक्ष्ण बुद्धि और विवेक शील हो, गर्भस्थ स्त्री को अच्छे वातावरण देने के जिम्मेदारी पूरे परिवार की होना चाहिए, जिस परिवार में अपनापन , प्रेम करुणा , शांत वातावरण होता है उस परिवार के बच्चे संस्कारी होते हैं क्योंकि उन बच्चों को गर्भ से लेकर जन्म के बाद समझ आने तक ऐसा माहौल मिलेगा तो बच्चे उसके अनुकूल हो जाते हैं और उसी दिशा में फिर आगे बढ़ते हैं अतः हम सब की जिम्मेदारी होती हैं कि किसी भी गर्भधारण की हुई स्त्री से अच्छा व्यवहार करे शालीनता से बात करें ताकि भावी पीढ़ी का अच्छा निर्माण हो।।क्रमशः।।
हमारे ब्लॉग जनयुग के प्रहरी "जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरणा और सकारत्मक भाव के आधार पर ब्लॉग में आप जीवन के हर पहलू पर आधारित लेख पढ़ सकते हैं, जैसे कि प्रेरणा, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत विकास, जैविक खेती संबधित जानकारी और जीवन के अनुभव। हमारा उद्देश्य आपको संघर्ष के साथ आगे बढ़ना और जीवन में नई दृष्टि प्रदान करना है और आपको अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना है।" धन्यवाद
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
समय का चक्र और संघर्ष की कहानी
जनयुग के प्रहरी में आप पढ़े 😊 समय का चक्र और अज्ञातवास की कहानी, संघर्ष की कहानी समय का पहिया घूमता रहता है, और हमें अपने जीवन में कई बार ...
No comments:
Post a Comment