Thursday, January 19, 2023

सफर उन्नति का

 सफर उन्नति का तय करने के लिए हमें हमारी पुर्ण ईमानदारी लगन, कठोर परिश्रम एवं कर्म क्षेत्र की निष्ठा पर निर्भर करता है कि कितना चलने के बाद हमें सफलता मिलेगी, हम हमारे अनुभवों की दुनिया का उपयोग कैसे कर रहे हैं और किस समय कर रहे हैं इसका भी महत्वपूर्ण योगदान रहता हैं, बहुत बार हम हमारे भाग्य को दोषी मानकर रुक जाते हैं और हमारी कमी को नही देखते की हम कहा चूक कर रहे हैं जहाँ से हम सुधार करें, हमारी ताकि हमें किसी को दोष नहीं देना पड़े, हमारे वडिलो ने कहा है कि मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता होता हैं तो उस निर्माण में दोषी भी हम ही होंगे कर्म प्रधान होता हैं यह हमारे शास्त्र कहते है तो फिर तो हमारी प्रधानता को महत्व देना चाहिए न कि कर्म भूमि छोड़कर किस्मत को दोष देना, विनोबा भावे ने कहा है कि प्रार्थना और प्रयत्न दोनो साथ चलते हैं तो हमें प्रयत्न की कतार को क्यों तोड़े जब तक हमें मुकाम नही मिलता...हमारा गन्तव्य हमारी राह देखता हैं हमारे क्रमिक विकास के पथ को कसौटी पर खरा उतारते हुए कर्मो के ब्रिज पार करते हुए निरन्तर चलने का सम्बोधन करते हुए, अतः हमारे गन्तव्य पर पहुचने तक हमारी सम्पूर्ण ताकत हमारे रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए लगाते रहे, निरन्तरता से प्रयास करते रहे,,, किसी को दोष देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी सफलता चरण चूमेगी।।


क्रमशः पढ़ते रहे ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी

No comments:

Post a Comment

समय का चक्र और संघर्ष की कहानी

जनयुग के प्रहरी में आप पढ़े 😊 समय का चक्र और अज्ञातवास की कहानी, संघर्ष की कहानी  समय का पहिया घूमता रहता है, और हमें अपने जीवन में कई बार ...