शिक्षक एवं शिक्षा देश, दुनिया व समाज की रीढ़ की हड्डी होते हैं, हमारे देश के व्यवस्थापन में जिनकी अहम भूमिका रहती हैं उस शख्सियत का सुलझा पन होना हर प्रकार की समृद्धि को स्थापित करता है क्योंकि शिक्षक वह कला कृति होते हैं जो स्वयं प्रकाशित होकर दुसरो को भी प्रकाश देते हैं, शिक्षक के द्वारा ही देश के शासन व प्रशासन को चलाने वाले जन्म लेते हैं शिक्षक ज्ञान की उपासना करता हैं जहाँ ज्ञान की उपासना नही होगी वहाँ की जनता गँवार होगी, ज्ञान की उपासना से ज्ञान की गंगा बहती हैं उसी से देश के भविष्य का निर्माण होता हैं शिक्षक एक कुएं की तरह होता हैं जिससे संस्कारो की सिंचाई होती हैं जब कुएं में पानी कम होगा तो खेत सुख जाते हैं , फसलें मुर्जा जाती हैं इसलिए शिक्षक रूपी कुएं का गहरापन और शीतल होना आवश्यक होता हैं तभी गहराइयों का फायदा सबके लिए अनुकूल होता हैं, शिक्षा देने का तरीका जितना महत्वपूर्ण होता हैं उससे कहीं ज्यादा इसे ग्रहण करने की महत्ता होती हैं कथा भागवत, भजन कीर्तन,वीर वीरांगना, डाकू अधर्मी, निर्दयी दयावान सभी शिक्षक द्वारा ही पैदा होते है शिक्षा का महत्व भी शिक्षक बताता है अनुभवों की गंगोत्री धरातल पर क्रियान्वयन गुरु के मार्गदर्शन में ही होती हैं, सभी कार्यशाला पाठशाला से उत्पन्न होती हैं शिक्षा से ही सभी का संगम होता हैं शिक्षक के बिना सब वीरान हो जाता हैं शब्दों का महासागर शिक्षक ही प्रदान करता है अतः महासागर में मंथन करते हुए अमृतपान करते रहना चाहिए।।क्रमशः।।
हमारे ब्लॉग जनयुग के प्रहरी "जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरणा और सकारत्मक भाव के आधार पर ब्लॉग में आप जीवन के हर पहलू पर आधारित लेख पढ़ सकते हैं, जैसे कि प्रेरणा, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत विकास, जैविक खेती संबधित जानकारी और जीवन के अनुभव। हमारा उद्देश्य आपको संघर्ष के साथ आगे बढ़ना और जीवन में नई दृष्टि प्रदान करना है और आपको अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना है।" धन्यवाद
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