आत्म वार्ता से व्यक्ति अपनी मानसिकता को सही दिशा में ले जा सकता है, लेकिन प्रश्न यह है कि आत्म वार्ता हम किस प्रकार की करते हैं आत्म वार्ता मन की गति से होती हैं जैसे हमारे मन में विचार आएंगे उसी के अनुकूल वो चिंतन होगा मनन होगा और अवचेतन मन प्रभावित होगा इसलिए अपने आप से वार्ता करते समय सकारात्मक सोच से किसी दृश्य को बनाकर समझने का प्रयास करें आप सदैव मन मस्तिष्क को स्वस्थ रख पाएंगे अच्छे विचार उर्जा देते है औऱ बेहतर परिणाम की ओर अग्रसर होते है, जैसे रामायण का दृश्य सोचकर राम के शब्दों को मनन करने से वैसे विचार आएंगे, जिससे जीवन में मर्यादा स्थापित होगी, दृश्य से समझने में सरलता आती हैं हम रोज बाजार जाते है और हमारे बैग में कोई चिट्ठी पड़ी हैं जिसे हमे पोस्ट बॉक्स में डालना हैं लेकिन भूल जाते हैं तो घर से निकलते समय पोस्ट बॉक्स का चित्र बनाकर जाएं जिससे पोस्ट बॉक्स आते ही हमें याद आ जायेगा या हमारा दिमाग बाजार जाकर पोस्ट बॉक्स को ढूंढेगा क्योंकि जब हम पढ़ना लिखना सिखे तब दृश्य के माध्यम से सिखे हैं अनार का चित्र देखर उसका पहला अक्षर 'अ' आम का दृश्य देखकर पहला अक्षर 'आ' इसी प्रकार वर्णमाला को सीखा गया, समाधान का सरल उपाय हैं यह क्योंकि चेतन मन हमारी एक्टिविटी हैं और अवचेतन मन दृश्य हैं , अतः दृश्य के माध्यम से हर क्षेत्र में हम सफल क्रिया कर सकते हैं चाहे मानसिक स्थिरता हो या आर्थिक आजादी तथा शारीरिक व्याधियां भी इससे दूर हो सकती हैं ।। क्रमशः ।।
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