हमारे स्वर्णिम इतिहास से कुछ उदाहरण के माध्यम से गर्भ विज्ञान के बारे में जानते है कि गर्भ में पल रहे शिशु पर माँ की सोच, भावनाएं, व्यवहार एवं वातावरण का बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता हैं, राजा ऋतभध्वज की पत्नि सती मदालसा ब्रम्हज्ञानी और गर्भ विज्ञान की ज्ञाता थी, जिसने अपने 3 पुत्रों विक्रांत, सुबाहु और अरिदमन को गर्भ में ही ब्रम्हा ज्ञान की शिक्षा दी थी जिससे तीनो ही युवा अवस्था मे सारा जीवन लोक मंगल में लगा दिया और सन्यासी बन गए, अब महाराज को एक पुत्र राज्य के लिए उत्तराधिकारी बनाना था, तब रानी मदालसा ने गर्भधारण के 3 माह पूर्व से ही राजा एवं रानी ने शौर्य और साहस का अध्यन किया एवं शयन कक्ष को वीरता के प्रतीकों से सजाकर गर्भधारण किया और गर्भावस्था में ही राजनीति की शिक्षा एवं कुशल राजा के संस्कार दिए जिससे उनका पुत्र अलर्क पिता से अधिक प्रतापी राजा बना , राजा दुष्यंत और शकुंतला का पुत्र भरत को भी माता शकुंतला ने गर्भ में ही संस्कार दिए थे, जो बचपन में ही शेरो के साथ खेलते थे उन्ही के नाम से हमारे देश का नाम भारत पड़ा, इसी प्रकार जीजा बाई ने शिवा जी का, सीता ने लव कुश और ऐसी कई माताओं ने गर्भ में ही ज्ञान देकर प्रतापी एवं कुशल नेतृत्व करने वाले पुत्रों को जन्म दिया अतः गर्भधारण के साथ ही घर के वातावरण को अनुकूल बनाकर श्रेष्ठ सन्तानो को जन्म दिया जा सकता है।।क्रमशः।।
हमारे ब्लॉग जनयुग के प्रहरी "जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरणा और सकारत्मक भाव के आधार पर ब्लॉग में आप जीवन के हर पहलू पर आधारित लेख पढ़ सकते हैं, जैसे कि प्रेरणा, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत विकास, जैविक खेती संबधित जानकारी और जीवन के अनुभव। हमारा उद्देश्य आपको संघर्ष के साथ आगे बढ़ना और जीवन में नई दृष्टि प्रदान करना है और आपको अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना है।" धन्यवाद
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