दुनिया में हर चीज का महत्व अपनी अपनी जगह होता हैं लेकिन उस महत्ता को समझना हमारे लिए जरूरी हैं, कोई भी वस्तु हम इस्तेमाल करने के लिए लाते हैं तो उसकी उपयोगिता समझते हुए लाना चाहिए कि इसकी हमारे लिए कितनी आवश्यकता है उसी हिसाब से उसका उपयोग करना हमारे लिए फायदेमंद होता हैं, इसके अतिरिक्त हम उस पर जरूरत से अधिक समय निवेश करते हैं तो उसकी महत्ता कम हो जाएगी अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि जो चीज वो खरीदते हैं उसका इस्तेमाल कैसे करें जो चीजे खरीदते हैं वो चीजे उनका इस्तेमाल करने लग जाती हैं, उसके अधीन हो जाते हैं वो हमें गुलाम बना देती हैं, आप उनको काम में ले वहा तक ठीक है लेकिन जब आपको वो चीजे काम में लेने लग जाए तो यह ठीक नहीं है, यदि हमनें यह समझ लिया हर एक की जीवन में सिमित भूमिका होती हैं और बखूबी उस भूमिका को आपने सिमित तरीके से निभाना शुरू कर दिया तो जीवन सफल है, जैसे भौतिक सुख सुविधाओं की सीमित भूमिका, शिक्षा की , रिश्तों की, आर्थिक व्यवस्थाओ की सीमित भूमिका ऐसा ही हर जगह एक दायरा बना कर जीना शुरू कर दिया तो जीवन सुकून से कटने लगेगा आपकी समस्याए स्वतः कम होती चली जाएगी समाधान अपने आप निकलेंगे आपको अधिक परेशान होने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि आप शुरू से अपने आप को एडजस्ट कर चुके होंगे जिस प्रकार का दायरा अपने जीने के लिए बनाया होता हैं उसका प्रयास आपके लिए रास्ते खोलता जाएगा, संयमित एवं सुखी जीवन बन जायेगा, अतः हमनें अपने आप पर विजय पा ली आवश्यकताओं के अनुरूप एक सीमा तय करके सन्तुष्ट हो गए तो वैभवशाली जीवन बन जाएगा
।।क्रमशः।।
पढ़ते रहे *जनयुग के प्रहरी*
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