हिन्दू नव वर्ष की मान्यता सूर्य देव की पहली किरण के स्वागत के साथ शुरू किया जाता है और पश्चात देशों के अंग्रेजी कैलेंडर का नव वर्ष रात के अंधेरे में शुरू होता है, दोनों कैलेंडर में यह बुनियादी फर्क है एक में रात को 12 बजे शुरू होता है और एक में सूरज की पहली किरण के साथ शुरू होता है बहुत से देश ग्रेगोरियन कैलेंडर को नहीं मानते थे हमारे देश की तरह वो हिन्दू पंचाग को मानते लेकिन आज पश्चिमी देशों का यह कैलेंडर सभी मानने लग गए और हमारा देश भी व्यापार जन्म दिनांक आदि इसी पर आधारित हो गया जिसका न तो मौसम से न प्रकृति से हैं कोई लेना देना है और न ही तीज त्यौहार से जबकि हमारे हिन्दू कैलेंडर में ऐसा नहीं है भारत में दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति के लोग हैं और विक्रम संवत की शुरुआत भी चैत्र मास के इसी चैत्र प्रतिपदा से होती हैं ब्रह्म पुराण के अनुसार भी सृष्टि इसी दिन बनी थी और इसी दिन से भारतवर्ष में काल गणना भी शुरु हुईं थी हिन्दू कैलेंडर और ग्रेगोरियन कैलेंडर और हिन्दू कैलेंडर में कुछ बुनियादी फर्क बताते है ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत ईशा मसीह के जन्म से मानी जाती हैं और हिन्दू कैलेंडर विक्रम संवत 57 बीसी से मानी जाती हैं, जब महाराज विक्रमादित्य ने युद्ध में सकाज को पराजित किया था , हिन्दू कैलेंडर 2080 में प्रवेश कर चुका है और अंग्रेजी कैलेंडर में 2023 चल रहा है भारतीय कैलेंडर की गणना सूर्य और चंद्रमा से होती हैं जबकि ग्रेगोरियन कैलेण्डर पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के अनुसार चलता है पृथ्वी सूर्य के एक चक्कर 365.25 दिन में लगाती हैं इसलिए 365 दिन में एक वर्ष होता है और हर चार साल में एक लीप ईयर होता है ग्रेगोरियन कैलेण्डर सिर्फ तारीखों पर चलता है जिससे यह पता चलता है कि महीना चेंज हो गया है या नया साल आ गया है जबकि हिन्दू नव वर्ष में पूरी प्रकृति भी नवीनता का एहसास कराती हैं कि नव वर्ष आ गया है पतझड़ होकर प्रकृति अपने श्रृंगार की प्रक्रिया में होती है मानो पूरी सृष्टि में ही नयापन आ गया हो, अग्रेजी नव वर्ष की शुरुआत पार्टी से होती हैं तो हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत त्यौहार की ऊर्जा के साथ मनाते हैं इस पूरे देश में अलग अलग नाम से जाना जाता है इस दिन कश्मीर में नवरोज, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उगादी, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, केरल में विशू और पंजाब में बैसाखी के त्यौहार के साथ शुरु होता है अतः हमारे देश में हमारी संस्कृति से जुड़ा नव वर्ष को मनाए यह प्रकृति के डीएनए से जुड़ा पर्व है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को से नव वर्ष के साथ जीवन में नवाचार लाए।।
पढ़ते रहे अपने ब्लॉग को #जन युग के प्रहरी अब जाग चुके हैं
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