राजस्थान दिवस पर राजस्थान को प्रणाम और जय माता दी की
क्या लिखूं मैं कविता में राणा प्रताप की माटी को
त्याग समर्पण बलिदान कि पर्याय बनी परिपाटी को
चूंडा लेकर भीष्म प्रतिज्ञा सिंहासन ठुकराते है
भामाशा त्यागी बनकर भी अपना शीश झुकाते हैं
खण्ड खण्ड राणा सांगा ने हिंदू ध्वज फहराया था
तो पन्ना ने लाल कटाकर कुल का नाम बचाया था
गोरा बादल पद्मन की जहां अमर लिखी कहानी है
कण कण जिसके शौर्य पले वो माटी राजस्थानी है
जय जय राजस्थान
रवि दर्शन सान्दू अणेवा पाली
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