भारतीय नववर्ष का महत्व समझे कि हमारे पर्व, हमारी संस्कृति हमारा संस्कार क्या कहता है हमारे त्यौहार, हमारी तिथियां सब पश्चात संस्कृति से जोड़ दिए गए जिसकी गणना अंग्रेजी तारीखों से की जाने लगी है, हमारा नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होता है, हमारे शुभ मुहूर्त, विवाह आदि तिथियों को देखकर किए जाते है, लेकिन हम पश्चात संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं तिथियां कम याद रहती हैं तारीखे अधिक जिसका अधिक कारण यह मोबाइल जो कि विशेष प्रयोजन के लिए बनाया गया है लेकिन जन्म से ही बच्चो को थमा दिया जाता हैं एप्पल कम्पनी के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने बिल क्लिंटन से पूछा कि आपके परिवार में कितने फोन है तो उन्होने कहा कि परिवार में जितने मेंबर उतने फोन, लेकिन स्टीव जॉब्स ने कहा कि मेरे घर में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कोई मोबाइल को छूता तक नहीं क्योंकि स्टीव जॉब्स ने कहा मैने इस मोबाइल को बनाया हैं मैं अधिक समझता हूं इसके बारे में जब तक मैच्युरिटी नहीं आती इसकी उपयोगिता समझ नहीं आएगी, आधुनिक तकनीकी को हमे समझ से पहले इस्तेमाल नहीं करना चाहिए , हमारी संस्कृति को हमे सदैव याद रखना चाहिए हर वार तिथि, पर्व जो हमारी सनातनी संस्कृति में बने हैं उसके पिछे तार्किक और वैज्ञानिक आधार हैं हमे सदैव याद रखना चाहिए समझना चाहिए, हमारे शरीर में 80% पानी की मात्रा होती है जो तिथियों के आधार पर प्रभावित होती है,जब पूर्णमासी होती हैं तो पानी ऊपर चढ़ता है और जब अमावस्या आती हैं तो पानी नीचे उतरता है बुद्धि का बैलेंस खराब हो जाता हैं इसलिए अमावस्या को छुट्टी रखी जाती हैं, जितनी भी यांत्रिक दुर्घटनाएं होती हैं वो सब अमावस्या को होती हैं क्योंकि चन्द्रमा दिखता नहीं है तो शरीर में निष्क्रियता आती हैं दुर्घटनाएं बढ़ती है अधिकांश भूकंप अमावस्या के आस पास आते हैं 2,4 दिन पहले या बाद आता है, हिन्दू कलेंडर को सदैव याद रखें हर तिथि पर्व का अपना महत्व है अतः हमारे हिन्दू वर्ष चैत्र प्रतिपदा को प्रारंभ होता है और हर दिन, माह और त्योहारों के पिछे समय के साथ लॉजिक हैं स्मरण रहे।।
नववर्ष की अनंत कोटिशः बधाई
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