बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को सफ़ल होने के लिए स्वयं पर भरोसा और अपनी क्षमताओं की पहचान होना बहुत आवश्यक हैं। यदि हमें स्वयं पर भरोसा और अपनी क्षमताओं की जानकारी नहीं है, तो हम स्वयं का छोटा सा भी काम नहीं कर सकते। किसी के भी हालात कभी एक जैसे नहीं रहते। हमेशा यदि सुख नहीं रहता तो दुःख भी नहीं रहता. इसलिए कहते हैं कि जीवन किसी भी पल बदल सकता है। कभी कभी ऐसी स्थितियां बन जाती हैं जिसके कारण हमारा पूरा जीवन ही बदल जाता है, इसलिए हमें प्रत्येक परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
नदी भी हमें यही सन्देश देती है कि हर परिस्थितियों में आगे बढ़ते रहो। राहों में यदि चट्टान रूपी समस्याएं भी आ जाएं, तो हमें चाहे अपना रास्ता बदलना पड़े लेकिन आगे बढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए। समस्याओं से लड़कर हमें जो सीख मिलती है, वैसी सीख हमें किसी भी विद्यालय से प्राप्त नहीं हो सकती।
समस्याओं से मिली किसी भी सीख को यदि हम याद रखते हैं और भविष्य में उसे नहीं दोहराते हैं, तो हमारे जीवन में सुख शान्ति और सफलता बनी रहती है। जो लोग स्वयं की भूलों को स्वीकार कर लेते हैं, वो अपने जीवन में बहुत कुछ अच्छा और सकारात्मक सीख लेते हैं।
पढ़ते रहे ब्लॉग जनयुग के प्रहरी.....
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