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Thursday, July 6, 2023
संतान के प्रति पिता का भाव
संतान के प्रति पिता का भाव कैसा होना चाहिए यह आधुनिक शिक्षा प्रणाली, युवा पीढ़ी की मानसिकता को विकसित करने में हमने कितनी भूमिका निभाई और संतानों द्वारा किस प्रकार की सोच को समेटे हुए है उन बातो को ध्यान में रखते हुए हमारे कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए उन्हें कभी भी बेलगाम ना छोड़ता और साथ ही सत्यनिष्ठा ,पवित्रता, ईमानदारी ,सच्चरित्रता ,दया ,करुणा ,क्षमा ,विनम्रता ,मैत्री , सेवा ,त्याग आदि मानवीय गुण मनुष्य परिवार में ही सीखता है तो वैसा माहौल भी पिता ही बनाता है, जिस प्रकार एक पौधे की परवरिस के लिए हम उसके चारों ओर पशुओं आदि से बचने के लिए सुरक्षात्मक घेरा लगाते है जिसके बाद वह विशाल वृक्ष बन जाता हैं तब उसे कोई भयंकर आंधी तूफ़ान भी उसको हिला तक नहीं सकता तत्पश्चात वृक्ष छाया, फल ,लकड़ी के माध्यम से कितनो का सहारा बनता है, उसी प्रकार पिता बच्चो के सर्वांगीण विकास के लिए एक मजबूत रक्षा कवच बनता है,पिता का कर्तव्य बहुत व्यापक होता है स्वयं एक महान गुरु होता है साथ ही उसके लिए एक योग्य गुरु निर्धारित करता है, जो उसे शिक्षा देकर सभ्य समाज में जीने लायक बनाता है उसके इर्द गिर्द सपनों का जाल बुनकर स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करने वाला पिता ही एक ऐसी शख्शियत हैं इस दुनिया में जो यह चाहेगा कि मेरी संतान मुझसे आगे निकले अतः पिता अपनी संतानों को भविष्य निर्धारण के लिए आवश्यक सामग्री के साथ खुद को प्रवृत्ति में परिवर्तन लाकर संस्कार और व्यवहारिक ज्ञान का प्रारूप एक आदर्श पिता ही तैयार करता है पिता का स्थान आसमान से भी ऊंचा होता हैं।।
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