जीवन में हर जगह भावुकता काम नहीं आती चाहे वो मोटिवेशन हो या डिमोटिवेशन आप जीवन में खुश हो तब भी अच्छे काम कर पाओ यह निश्वित नहीं है और न ही यह निश्चित होता है कि आपके दुःखी होने पर सही काम कर पाओ, ठीक उसी तरह यह भी फिक्स नहीं होता कि लाभ या हानि होने पर अच्छा काम कर पाए, हमें यह समझना चाहिए कि हम जो काम कर रहे हैं उसमें हम फोकस कीतना दे रहे हैं, जितना फायदेमंद हमारे उस कार्य पर फोकस देकर करेंगे वो कार्य उतना ही बेहतर परिणाम देगा, सफ़लता लगन से मिलती हैं न कि भावुकता से ,,, हमारी मेहनत के साथ हमारे उद्देश्य और कार्य करने का संकल्प हमारे सफल निर्णायक दायरे में जब पहुंचाएंगे कि हमारी तल्लीनता उसी दिशा में काम कर रही होगी क्योंकि हमारे पास भावनाओ का महासागर होता है जो प्रोद्योगिकी को भी फॉलो नहीं करने देता और हमारी कार्य करने की दक्षता उस समय कम हो जाती हैं जब हम स्वयं को केंद्रित नहीं करते.....जब हम किसी कार्य को सम्पन्न करते समय अपने आप को केंद्रित करते हैं तो हम भावुक नहीं होंगे निपुण होकर कार्य करेगें जो श्रेष्ठ परिणाम देगा अतः जीवन में हमें इमोशन और प्रेरणा के साथ अधिक जिम्मेदार होकर कार्य करना चाहिए ताकि केन्द्र बिन्दु को ध्यान में रखकर कर्म करने से सफ़लता की गारंटी रहेगी ।।
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