गोबर 10 किलो
मुत्र 10 लिटर
काला गुड़ 1 किलो
दाल का आटा 1किलो
मिट्टी 1 किलो
मिट्टी पीपल या बरगद के पेड़ की जो सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देता है,,,तो उसके आसपास की मिट्टी में अधिक जीवाणु होते हैं किसी ड्रम में मिलाकर गोल लो फिर उसको 15 दिन तक कपड़े से ढक कर छांव में रख दो 15 दिन बाद खाद तैयार हो जाएगा, इसमें करोड़ो सूक्ष्म जीवाणु पैदा हो जायेंगे मिट्टी में यदि जीवाणु लाखो में हैं तो 15 दिन में करोड़ो हो जायेंगे यह जीवाणु घोल तैयार हो गया, अब इसको जितना गोबर था उसका दस गुणा पानी मिलाकर खेत में छिड़क दो या ड्रिप द्वारा सिंचाई के साथ भी दे सकते हो, यानि दस किलो गोबर था तो कम से कम 100 लिटर पानी अधिक से अधिक 200 लिटर पानी एक एकड़ के लिए तैयार हो गया, अब जितने जीवाणु थे वो सारे खेत में चले जाएंगे, जिससे पौधे की ग्रौथ करने के लिए जितने भी सूक्ष्म पोषक तत्व चाहिए ये जीवाणु देते हैं, यही जीवाणु पौधे को लम्बा घना बनाता है, पैदावार बढ़ाता है,
डालने का समय : पहला खेत जुताई के दूसरे दिन डाल दो, लगभग 5 दिन बाद बुवाई कर दो दुसरा बुवाई के 21 दिन बाद फिर दुबारा डाल दो, मानो 4 महीने की फसल हैं तो 5 बार डालना पड़ेगा हर 21 दिन बाद छिड़काव करना होगा, फसल अधिक समय की हैं तो उसी समय अंतराल में थोड़ा अधिक बार डालना पड़ेगा , इससे भरपूर कैल्सियम,आयरन, फॉसफेरस जैसे सैकड़ों तत्त्व मिलेंगे फसल को , पहले वर्ष संभव है थोड़ी पैदावार कम हो लेकिन लगातार इस्तेमाल होने से जबर्दस्त पैदावार होगी कम लागत यानि कि नहीं के बराबर खर्च में, सिर्फ मेहनत करनी होगी अतः जैविक उत्पादन से फ़सल पौष्टिक होगी तो हमें पौष्टिक आहार मिलेगा कमाई अधिक होगी और स्वस्थ्य समाज का निर्माण हमारे निरंतर ऐसा करने से होगा ।।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार शर्मा के साथ इंटरव्यू
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