परिवार में अपनो की महत्ता कितनी महत्वपूर्ण है यह गहनता से सोचने का विषय है न कि यह देखने का विषय कि दुनियां में क्या हो रहा है, कौन कितना प्रेम रख रहे हैं यह समझने का विषय नहीं होता सोचना वहां चाहिए कि हम कितना त्याग कर रहे हैं, पैसा तो शायद अकेले की मेहनत के परिणाम से आ सकती हैं लेकिन पुरे जीवन की मेहनत तो क्या कई जन्मों की मेहनत से कमाए धन से परिवार का प्रेम नहीं खरीदा जा सकता, हम हमारे लिए क्या कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण नहीं होता महत्वपूर्ण तो यह होता है कि हमने परिवार के लिए क्या किया , जब हमारा त्याग दिखता है तो हम पर परिवार का प्रेम बिखरता है प्यार की परिभाषा नए आयाम स्थापित करती हैं मन के उदगार फूटने लगते हैं अपने हम पर टूटने लगते हैं जीवन में वो सब कुछ मिलने लगता है जो हम चाहते हैं, दुनियां का स्वर्ग परिवार के आंचल में होता है, दौलत की छाया तो जितनी चाहोगे मिल जाएगी लेकिन अपनो के साए की कीमत नहीं लगा पाओगे, खरीददार तो मिल जायेंगे दौलत का ढेर लगाकर परन्तु बिकने को तैयार कोई नहीं मिलेगा अतः जिनके पास पैसा नहीं उनके एक ही समस्या है कि पैसे नहीं हैं लेकिन जिनके पास पैसा है उनको पैसों के अलावा सब समस्या है ... अपनो के साथ जिए न पैसों की दिक्कत आएगी और न ही किसी वैभव की दिक्कत।।
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