मानवीय रिश्ते पूर्ण नहीं होते उसे सुरक्षित और प्रभावी बनाने पड़ते हैं उस पर लगातार काम करना पड़ता है क्योंकि कोई भी रिश्ता कभी विकसित नहीं होता सदा विकासशील होता है, सदैव उसे विकसित करने का प्रयास करना होता है क्योंकि जो रिश्ते बने हैं उसे खूबसूरत अभिनय में स्थान देना चाहिए, चाहे वो जीवन के किसी भी कैरेक्टर में निर्वहन कर रहे हो, शैक्षणिक जीवन, व्यावसायिक जीवन हों या पारिवारिक जीवन हों हर रिश्ते की अपनी गरिमा होती हैं मर्यादा होती हैं, पहले तो हमें यह समझना होगा कि कौनसा रिश्ता किस दर्जे का हैं उसके उस महत्व को समझ कर फॉलो करना होता है तब वो रिश्ते प्रगाढ़ बनते हैं, एक तो कोई आपके साथ रहना चाहता है यह अनोखी बात है और किसे यदि आपके साथ रहना पड़े यह एक मजबूरी होती है , मजबूरी से नहीं मजबूती से खड़े रहे ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास अनवरत होना चाहिए उसी में जीवन का आनंद है, इसके लिए आपको सबमें सर्वोत्तम बनना होगा , एक अच्छे पिता_माता, अच्छे पुत्र_पुत्री, अच्छे शिक्षक_विद्यार्थी ,अच्छे मालिक_एम्प्लॉय और अच्छे व्यक्तित्व के व्यक्ति बनने से रिश्ते अच्छे बनते चले जाते हैं अतः हम श्रेष्ठ बनेंगे तो सारे रिश्ते श्रेष्ठ बनेंगे यह प्रयास निरंतर करते रहना चाहिए यह कभी पूर्ण नहीं होते उस पर गंभीरता रखते रहना होता है।।
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