जैविक खेती से दोहरा फायदा मिलता है कम लागत में अधिक उत्पादन एवम् स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता भी आती हैं, हमारा देश कृषि प्रधान देश है अधिक निर्भरता कृषि पर आधारित है जिसमें हमने खेती करने के तरीके को इतना बदल दिया कि आज हम रसायनिक खाद बीज से कुछ समय तो लाभन्वित हो जाते हैं लेकिन लम्बे समय में हम स्वास्थ्य और जमीन दोनो को खराब करते हैं जानकारी के अभाव में हमने जैविक खेती से दूरी बना ली है लेकिन समय के साथ यदि हमने सही फसल का चुनाव एवम् सही उत्पादन प्रक्रिया को समझ लिया तो हम कम बजट में अधिक पौष्टिक आहार पैदावार कर सकते हैं अपने परिवार के साथ हमारे देश को समृद्ध बनाने में बडी भूमिका निभा सकते हैं इसके लिए पहले हमें प्रशिक्षित होना पड़ेगा तभी हम आस पास में प्रशिक्षण दे पाएंगे और यही क्रम आगे मल्टीपल होगा तथा साथ ही सुदृढ़ एवम् स्वस्थ्य समाज में सफल प्रयास का हिस्सा बन पाएंगे, पहले न इतनी बीमारियां थी और न ही इतने हॉस्पिटल थे अब अनगिनत बीमारियां हो रही हैं तो न जाने कितने हॉस्पिटल खुल रहे हैं कारण यही है कि हमारा खान पान बिगड़ गया है और बिना सोचे समझे हमने अनचाहें तत्व फसलों को देना प्रारंभ कर दिया जिससे कई बीमारियों का जन्म हो रहा है अतः हमें स्वस्थ्य रहने और आर्थिक संपन्नता में क्रान्ति लाने हेतु किस फसलों में अधिक आमदनी होती है ऐसी जैविक खेती जैसे अनुष्ठान आरंभ कर दिए तो निश्चित इस महाभियान में बड़े बदलाव की संभावना बनेगी।।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार शर्मा के साथ इंटरव्यू
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