शुद्ध खान पान से शुद्ध विचार आते हैं आधुनिक युग में हमारे विकारों का मुख्य कारण हमारा खान पान हैं हम जैसा खाया अन्न वैसा रहे मन और जैसा खाया अन्न वैसा रहे तन, अन्न शुध्द होगा तो तन स्वस्थ्य रहेगा और तन स्वस्थ्य तो मन स्वस्थ्य, हमारा देश कृषि प्रधान देश है जिसमें अधिकांश उत्पादन किसानों द्वारा प्रेस्टिसाइज उपयोग करके किया जाता हैं पहले वातावरण में शुद्धता थी तो लोगो के विचारों में शुद्धता थी पूर्ण रूप से जैविक तरीके से खेती हुआ करती थी जहाँ यूरिया डीएपी जैसी कोई खाद था, प्राकृतिक बीज से कृषि उत्पादन हुआ करता था आज हम अतीत को भूल गए जैविक खेती के तरीके भूल गए शुध्दता का स्वाद नही पता परख के नाम पर शुद्धता की जानकारी नहीं पाश्चात संस्कृति ने हमें बहुत कुछ भुला दिया पुनः हमे हमारी संस्कृति और संस्कारों की ओर आना पड़ेगा , हमने कृषि अनुसंधान में विकल्प खो दिए जो अतीत में नीम और गाय के गोबर से खेती हो जाया करती थी लेकिन वो ही पुराने प्रकल्प तैयार करने होंगे जिससे हम आपस में ही एक दूसरे की मदद खेती उत्पादन में किट नाशक और फसलों की ग्रोथ में लिया करते थे जिससे हमारी फसल वर्तमान समय से अधिक उत्पादन होता था, आज हम हमारी धरती माता को खाद बीज से खराब कर रहे हैं और हमारी पुरानी पद्धति का दोहन हो रहा है, हम जैविक कृषि करेंगे तो पैदावार शुध्द होगी जब शुध्द पैदावार होगी तो हमें शुद्ध खान पान मिलेगा और शुध्द खान पान से हमारे विचारों में शुद्धता आएगी हमारी वाणी मधुर होगी जिससे वातावरण में मधुरता फैलेगी सैकड़ों बीमारियों जड़ से खत्म हो जाएगी अतः हमारे शुद्धता के सेवन से विचार शुद्ध होंगे और शुध्द विचारों की महक प्रवाहित करेंगे।।
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