पुरुषार्थ के बिना कुछ नहीं हम भाग्य के भरोसे सब कुछ छोड़ दें कि हमें सब कुछ मिल जाएगा तो कुछ नहीं मिलने वाला हमेशा प्रार्थना एवं प्रयत्न दोनों साथ चलते हैं जब हम यह सोच रहे हैं कि हमारे भाग्य की वस्तु हमें स्वतः मिल जाएगी तो यह हमारी भूल है बिना श्रम के कुछ भी नहीं मिलता चाहे हम कितना ही भाग्य को कोसे श्रम हमारी सफलता की अहम भूमिका है, बहुत से लोग ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञ के पास जाते हैं शनि ग्रह के प्रकोप हैं राहु केतु का साया हैं हमें 6 महीने और रहेगा साल भर और रहेगा कितना भी कर ले समस्या रहने वाली हैं ..... यह सब बातें कर्महीन लोगों की है, विद्वान बताते हैं फलित ज्योतिष सौ प्रतिशत सत्य नही होता, 6 माह साल भर क्या हमें 1 पल भी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए कर्म प्रधान होता हैं प्रार्थना दैनिक जीवन को ऊर्जा प्रदान करता हैं ईश्वर की आस्था के साथ प्रयास करना चाहिए शुध्द वातावरण में रहना चाहिए ताकि मन और धन की शुद्धि के साथ स्वस्थ समृद्ध जीवन जीने का अवसर मिले, जब हम शुद्धता के साथ पूरी ईमानदारी और मेहनत से जीवन जिएंगे तो हमें कोई परेशानी नही आएगी अतः जीवन को सुखद बनाने के लिए श्रम के साथ ईश्वर में श्रद्धा रखने से ऊर्जा का संचार बढ़ता जाएगा सफल जीवन के दोनों मंत्र *प्रार्थना और प्रयत्न* ।।
पढ़ते रहे ब्लॉग जनयुग के प्रहरी
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