"अध्यात्म" भारत की महानतम संपत्ति है। उसे मानवता का मेरुदंड कहा जा सकता है। मनुष्य के भौतिक एवं आध्यात्मिक चिरस्थायी उत्कर्ष का एकमात्र आधार यही है। मनुष्य जाति की अगणित समस्याओं को हल करने और सुख-शांतिपूर्वक जीने के लिए "अध्यात्म" ही एकमात्र उपाय है। इस जीवनतत्त्व की उपेक्षा करने से पतन और विनाश का ही मार्ग प्रशस्त होता है। दुःख और दारिद्रय, शोक और संताप इसी उपेक्षा के कारण उत्पन्न होते हैं। मनुष्य के भविष्य को अंधकारमय बनाने वाला निमित्त इस उपेक्षा से बढ़कर और कोई नहीं हो सकता।
"अध्यात्म" मानव जीवन के श्रेष्ठतम सदुपयोग की एक वैज्ञानिक पद्धति है। उसे जीवन जीने की विद्या भी कहा जा सकता है। छोटे- छोटे कार्यों की भी कोई प्रणाली एवं पद्धति होती है, उसी ढंग से चलने पर सफलता मिलती है। अस्त-व्यस्त ढंग से कार्य किया जाए तो लाभ के स्थान पर हानि ही होगी। मानव जीवन इस संसार का सर्वोत्कृष्ट वरदान है। भगवान के पास जो कुछ विभूतियाँ हैं, वे सभी मनुष्य शरीर में बीज रूप में भर दी हैं। ऐसे बहुमूल्य संयंत्र का सुसंचालन एवं सदुपयोग यदि प्राप्त न हो तो उसे एक दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। मानव जीवन एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं मूल्यवान क्रिया है।उसका विज्ञान एवं विधान जाने बिना या जानकर उस पर चले बिना यह आनंद और श्रेय नहीं मिल सकता जो मनुष्य जीवन जीने वाले को मिलना ही चाहिए।
खेदपूर्वक यह स्वीकार करना होगा कि हमारे आलस्य और प्रमाद ने योग की उन उच्च स्तरीय विद्याओं को गंवा दिया। वैज्ञानिक शोध जैसी निष्ठा में संलग्न होने वाले साधक आज कहां ! जो हैं उन्हें बहुत कुछ मिलता भी है । जिनके आशीर्वाद प्राप्त करके मनुष्य अपना जीवन धन्य और सफल बना सके ऐसे ऋषि कल्प सत्पुरुष अभी भी मौजूद हैं
पढ़ते रहे #ब्लॉग जनयुग के प्रहरी
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