इतनी विशेषताओं को देखकर लगता है कि परमात्मा ने मनुष्य के साथ पक्षपात किया है। मात्र अधिकारों को ही देखा जाए तो यही धारणा बनती है, लेकिन गहराई से विचार किया जाए तो समझ में आता है कि विशेष अधिकारों के साथ विशेष कर्तव्य भी जुड़े होते हैं। एक बैंक मैनेजर और एक चपरासी को बैंक से मिलने वाली सुविधाओं में जो अंतर है, वह उत्तरदायित्व की गंभीरता और विशेषता के कारण ही है। परमात्मा की ओर से मनुष्य को जो अतिरिक्त अनुदान मिले हैं, वह पक्षपात नहीं है और न ही अन्य जीवों के साथ अंधेर-अन्याय। उसे जो विशेष सुविधाएँ मिली हैं, वे इसलिए कि मनुष्य उनकी सहायता से अधिक काम कर सके। जिस दायित्व की पूर्ति को सरल-साध्य बनाने के लिए मनुष्य को यह सुविधाएँ मिली है, वह दायित्व है-परमात्मा के इस विश्व उद्यान को सुंदर बनाना।
घर में पिता अपने जवान और समझदार बड़े बेटे को घर की विशेष जिम्मेदारियों सौंपता है, तो उसे दूसरों की अपेक्षा अधिक अधिकार-अनुदान भी देता है। ऐसा करना उचित भी है और आवश्यक भी। परमात्मा ने अन्य जीवों की तुलना में मनुष्य को अपना वरिष्ठ पुत्र मानकर विशेष अनुदान दिये हैं। उद्देश्य यही है कि जब वह अपने विशेष उत्तरदायित्व पूरे करने के लिए आगे आये तो उन्हें संभाल भी सके और पूरा भी कर सके
पढ़ते रहे ब्लॉग #जनयुग के प्रहरी
No comments:
Post a Comment